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Friday, October 19, 2012
प्रदेश में रबी सीजन में 104 लाख हेक्टेयर में बोवाई का कार्यक्रम
गत वर्ष की तुलना में चार लाख हेक्टेयर रकबा बढ़ेगा
प्रदेश
में इस साल 104 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की बोवनी की जायेगी। पिछले साल
रबी मौसम में 99 लाख 52 हजार हेक्टेयर रकबे में फसलें बोई गई थीं। पिछले
साल की तुलना में इस साल रबी क्षेत्रफल में 4 लाख 28 हजार हेक्टेयर की
वृद्धि भरपूर वर्षा के कारण होगी। किसानों को तिलहनी और दलहनी फसलों की
बोवाई संचित नमी के कारण करने की सलाह दी जा रही है।
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Saturday, August 25, 2012
सोयाबीन में कीट बचाव के लिए किसानों को सलाह
खरीफ फसलों में सोयाबीन पर इस मौसम में कीट से बचाव के लिए किसान-कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने किसानों को आवश्यक सलाह दी है। विभाग
के अनुसार कीट नियंत्रण के लिए उचित बीज दर रखना, अंतरवर्ती फसल बोना, खेत
के चारों ओर गेंदे के पौधे लगाना, फेरोमेन ट्रेप या प्रकाश ट्रेप,
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Friday, June 15, 2012
रबी के लिये ताप विद्युतगृहों के समयबद्ध रख-रखाव की योजना
इकाइयों का कार्य सितम्बर में होगा पूर्ण
Bhopal:Thursday, June 14, 2012रबी मौसम में किसानों को सिंचाई के लिये पर्याप्त विद्युत आपूर्ति के लिये ताप विद्युतगृहों के वार्षिक रख-रखाव की कार्य-योजना तैयार की गई है। मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी द्वारा प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार इकाइयों का वार्षिक रख-रखाव कार्य माह सितम्बर, 2012 तक पूर्ण किया जाना सुनिश्चित किया गया है।
Tuesday, January 17, 2012
मप्र में फसलो पर पाला पडने की संभावना
फसलो को पाले से बचाने हेतु खेतो के पास आग लगाए
सागर १७ जनवरी २०१२. जिले में कुछ समय से शीत लहर का प्रकोप जारी होने से फसलो पर पाला पडने की संभावना है । फसलो को पाले से बचाने हेतु खेतो के पास १०-१० मीटर के अंतर पर कचरे के ढेर लगाकर सांय ६ बजे से आग लगाए ।
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Sunday, January 1, 2012
इल्ली के प्रकोप से फसलें को बचाव करने किसानों को सलाह
यह बहुभक्षी कीट है इससे चना अरहर मूंग ज्यादा प्रभावित होती है
सागर १ जनवरी २०११/जिले के किसानों को चना, अरहर, मूंग आदि फसलों को इल्ली के प्रकोप से बचाये रखने के लिये कृषि विभाग के अधिकारियों ने सलाह जारी की है तथा पहले से नियन्नण संबंधी उपाय अपनाने की अपील किसानों से की गई है ।
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Thursday, December 8, 2011
एक लाख मी. टन से ज्यादा धान की खरीद
साढ़े पाँच लाख मी.टन धान खरीदी की तैयारियाँ
Bhopal:Wednesday, December 7, 2011
प्रदेश में समर्थन मूल्य पर अब तक 1 लाख 10 हजार 116 मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है। राज्य सरकार मौजूदा सीजन में 5 लाख 50 हजार मीट्रिक टन धान खरीदने के सारे इन्तजाम सुनिश्चित कर चुकी है। इस साल भी धान की खरीदी पर 50 रूपये प्रति क्विटल बोनस किसानों को दिया जा रहा है। पिछले साल 21 करोड़ 40 लाख रूपये का बोनस बाँटा गया था। पिछले ख्ररीफ सीजन और और मौजूदा सीजन में अब तक कुल 5 लाख्र 13 हजार 786 मी.टन चावल सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बाँटे जाने के लिए प्राप्त हो चुका है।
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प्रदेश में समर्थन मूल्य पर अब तक 1 लाख 10 हजार 116 मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है। राज्य सरकार मौजूदा सीजन में 5 लाख 50 हजार मीट्रिक टन धान खरीदने के सारे इन्तजाम सुनिश्चित कर चुकी है। इस साल भी धान की खरीदी पर 50 रूपये प्रति क्विटल बोनस किसानों को दिया जा रहा है। पिछले साल 21 करोड़ 40 लाख रूपये का बोनस बाँटा गया था। पिछले ख्ररीफ सीजन और और मौजूदा सीजन में अब तक कुल 5 लाख्र 13 हजार 786 मी.टन चावल सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बाँटे जाने के लिए प्राप्त हो चुका है।
Thursday, October 13, 2011
रबी सीजन में विगत वर्ष की अपेक्षा आठ लाख हेक्टेयर रकबा बढ़ेगा
गेहूँ और चने की बोवनी में सर्वाधिक वृद्धि का लक्ष्य
Bhopal:Wednesday, October 12, 2011
प्रदेश में हुई अच्छी वर्षा तथा जल-स्रोतों में पानी की उपलब्धता के कारण गेहूँ और चने की बोवनी के लिये इस वर्ष अनुकूल संभावनाएँ हैं। वर्ष 2011-12 में रबी फसलों के रकबे में लगभग 8 लाख हेक्टेयर बढ़ोत्तरी का अनुमान है।
प्रदेश में हुई अच्छी वर्षा तथा जल-स्रोतों में पानी की उपलब्धता के कारण गेहूँ और चने की बोवनी के लिये इस वर्ष अनुकूल संभावनाएँ हैं। वर्ष 2011-12 में रबी फसलों के रकबे में लगभग 8 लाख हेक्टेयर बढ़ोत्तरी का अनुमान है।
रबी मौसम में सिंचाई के लिये कृषि पम्पों का भार आना शुरू
विद्युत की अधिकतम माँग 7 हजार मेगवॉट तक पहुँची
Bhopal:Wednesday, October 12, 2011 रबी मौसम में फसलों की सिंचाई के लिये कृषि पम्पों का भार आना शुरू हो गया है। विद्युत की अधिकतम माँग 7 हजार मेगावॉट तक पहुँच गई है। उल्लेखनीय है कि गत सितम्बर माह में विद्युत की माँग 5000 से 6000 के बीच दर्ज की गई थी।
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Tuesday, July 12, 2011
प्रदेश में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज
अब तक बरसा 344 मिमी पानी
पिछले कुछ सालों से मानसून की बेरूखी झेल रहे मध्यप्रदेश पर इस वर्ष पावस ऋतु मेहरबान है। वर्तमान वर्षा काल में 12 जुलाई 2011 तक प्रदेश में औसत 344 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई है जो सामान्य वर्षा से 50 मिमी. अधिक है। गुना में सामान्य से 245 मिमी, अशोकनगर में सामान्य से 216 मिमी, टीकमगढ़ में 209 मिमी, राजगढ़ जिले में सामान्य से 179 मिमी. अधिक वर्षा दर्ज की गई है।
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Sunday, July 3, 2011
खिली धूप ने खोली बोवाई की राह, अब तक खरीफ रकबे के 21 प्रतिशत में बोवाई
प्रदेश में खरीफ बोनी में तेजी
मौसम साफ होने और धूप खिलने के साथ ही किसानों ने तेजी से खरीफ फसलों की बोवाई करना शुरू कर दिया है। लगभग सभी जिलों से बोवाई की खबरे मिल रही हैं। अब तक खरीफ फसलों के सामान्य क्षेत्रफल का लगभग 21 प्रतिशत रकबा बोया जा चुका है।
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Thursday, June 16, 2011
गर्मियों में हरे चारे के स्थान पर उपयोगी है यूरिया उपचारित भूसा
गर्मियों में हरे चारे की कमी दुग्ध उत्पादन को प्रभावित करती है। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए एमपी स्टेट को-आपरेटिव डेयरी फेडरेशन की इकाई ग्वालियर दुग्ध संघ द्वारा अपने कार्य क्षेत्र ग्वालियर, भिण्ड, मुरैना, दतिया, शिवपुरी, श्योपुर एवं टीकमगढ़ जिलों में हरे चारे के स्थान पर यूरिया उपचारित भूसे का उपयोग करने की सलाह पशुपालकों को दी जा रही है। इसके लिये दुग्ध संघ द्वारा विशेष कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
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Thursday, July 29, 2010
उन्नत बीज के प्रति किसानों का रूझान बढ़ा
इस वर्ष भी भरपूर मात्रा में उन्नत बीज का प्रयोग
खरीफ बोवनी अब अपने उत्तरार्ध पर है। मौसम की धूप छांह के बीच किसानों ने भरपूर आत्म विश्वास का प्रदर्शन करते हुए मुख्य फसलों की बोवाई की है। अच्छा उत्पादन लेने के लिये उन्नत बीज का प्रयोग करना खेती का एक प्रमुख सूत्र है।
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Friday, July 9, 2010
सोयाबीन उत्पादक किसान शीघ्र पकने वाली फसलों पर ध्यान दें
बीज का बीजोपचार करना अति आवश्यक
सोयाबीन उत्पादक किसानों को अब शीघ्र पकने वाली फसलों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। बोये जाने वाले सम्पूर्ण बीज का बीजोपचार करना अति आवश्यक है। ऐसे मौसम में फफूंद रोग लगने की संभावनाएँ बढ़ जाती है। इसके लिए ट्राइकोडर्मा विरीडी जैविक फफूंदनाशक का प्रयोग करना प्रभावी होगा।
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Tuesday, July 6, 2010
खरीफ सीजन में एक लाख 12 हजार मिनिकिट प्रदाय किये जायेंगे
हेक्टेयर के दसवें हिस्से के लिये आवश्यक बीज की मात्रा मिनिकिटों में
उन्नत किस्मों के बीज किसानों को मुहैया कराने बीज प्रतिस्थापन दर में बढ़ोत्तरी करने और अगले वर्षों के लिये किसानों को बीज स्वावलम्बी बनाने के उद्देश्य से इस वर्ष एक लाख 12 हजार 111 बीज मिनिकिट प्रदाय किये जायेंगे।
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Wednesday, June 30, 2010
जिलों की मांग पर तत्काल प्रदाय किये जायें अतिरिक्त बीज
राज्यभर में 20 लाख 24 हजार क्विंटल बीज का भण्डारण
किसान कल्याण मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने आज मंत्रालय में खरीफ मौसम के लिये कृषि आदान आपूर्ति की एक बैठक में आज मंत्रालय में समीक्षा की। डॉ. कुसमरिया ने अधिकारियों से कहा कि जिले के उप संचालक किसान कल्याण से धान तथा दलहनी फसलों के बीजों की मांग होने पर उन्हें तत्काल आपूर्ति की जाये।
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Monday, June 28, 2010
किसानों को खाद बीज की समस्या न हो - किसान कल्याण राज्यमंत्री
खाद बीज की उपलब्धता की समीक्षा
किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि वे खरीफ सीजन के दौरान खाद बीज वितरण की मॉनीटरिंग इस तरह करें कि किसानों को खरीफ सीजन के दौरान समस्या का सामना न करना पड़े।
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Sunday, June 27, 2010
सोयाबीन का बीज बदलने में किसानों की सर्वाधिक रूचि
किसानों को 2 लाख क्विंटल उन्नत बीज वितरित
किसानों को इस खरीफ सीजन के लिए अब तक 2 लाख क्विंटल उन्नत बीज वितरित किया जा चुका है। प्रदेश के किसानों को खरीफ फसलों के उन्नत बीज उपलब्ध कराये जाने के लिये 20.06931 क्विंटल आधार और प्रमाणित बीज की उपलब्धता है। सहकारी संस्थाओं और बीज प्रक्रिया केन्द्रों पर पर्याप्त मात्रा में उन्नत बीज उपलब्ध है तथा किसी भी क्षेत्र में बीज की कमी से संबंधित कोई सूचना नहीं है।
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Wednesday, February 24, 2010
मप्र में किसानों को ग्रीष्मकालीन फसल लेने की सलाह
जायद फसलों के तैयार होने की अवधि 50 से 60 दिन
मध्यप्रदेश में रबी की फसल स्थिति काफी अच्छी है। इसकी वजह प्रदेश में अक्टूबर, नवम्बर एवं दिसम्बर में सही अंतराल से हुई बारिश का होना रहा है। प्रदेश में रबी सीजन में इस वर्ष लगभग 95 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोनी की गयी थी। प्रदेश में रबी के सामान्य क्षेत्रफल से लगभग 11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की अतिरिक्त बोनी की गयी।
प्रदेश में प्रमुख रूप से रबी सीजन में गेहूँ की बोनी 42.62 लाख हेक्टेयर में तथा चने की बोनी 32.33 लाख हेक्टेयर में की गयी थी। अच्छे मौसम को देखते हुये प्रदेश में गेहूँ एवं चने का रिकार्ड उत्पादन होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
रबी सीजन में खेतों में कटाई के बाद ग्रीष्मकालीन फसल लेने की सलाह
जल संरचनाओं में पानी की अच्छी उपलब्धता के कारण जायद फसलें लिया जाना लाभकारी होगा
ग्रीष्मकालीन फसलों की अवधि 50 से 60 दिन की
किसान कल्याण विभाग ने रबी फसलों की अच्छी स्थिति के बाद प्रदेश में किसानों के लिये ग्रीष्म काल में जायद फसलों के उत्पादन की अच्छी संभावना बताई है। कृषि अधिकारियों ने कहा है कि प्रदेश के कृषक खाली खेतों में अथवा रबी की शीघ्र बोई गयी फसल काटने के बाद मूँग, उड़द, सब्जियों तथा चारे की फसलों की बोनीकर अतिरिक्त लाभ ले सकते हैं। जायद फसलों के तैयार होने की अवधि 50 से 60 दिन की होती है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि भूमि संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता की दृष्टि से भी इन फसलों का बोया जाना उपयोगी होगा। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री एम.के. राय ने पिछले दिनों मंत्रालय में आयोजित कृषि अधिकारियों की बैठक में रबी फसलों की स्थिति एवं संभावित रबी उत्पादन की समीक्षा की थी। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री राय ने कृषि अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे प्रदेश में किसानों को जायद फसल बोने के लिये अधिक से अधिक प्रोत्साहित करें। संचालक किसान कल्याण डॉ. डी.एन. शर्मा ने बताया कि खाली खेतों में मूँग की खेती के लिये फरवरी के दूसरे सप्ताह से मार्च के तीसरे सप्ताह का समय सबसे उपयुक्त रहता है। प्रदेश में इस वर्ष अच्छी बारिश के कारण जल संरचनाओं में पानी की उपलब्धता अच्छी है। इसका फायदा कृषक गर्मी के मौसम की अल्पकालीक फसलें उड़द, सूरजमुखी, मक्का, चने की फसलें, लोबिया, ग्वार आदि की कम लागत पर सफल खेती कर सकते हैं। सब्जियों में वर्गी फसलें गिल्की, लोकी, खीरा, खरबूज, तरबूज आदि बोया जाना भी किसानों के लिये लाभकारी सिद्ध होगा।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जायद की फसल के रूप में दलहन फसलें बोया जाना कृषि भूमि की उर्वरता वृद्धि के लिये काफी फायदेमंद हैं। जायद फसलें वायुजनित मिट्टी के क्षण को कम करती हैं और प्राकृतिक नत्रजन बढ़ाती हैं। कृषि विशेषज्ञों ने कहा है कि हरदा, होशंगाबाद एवं नर्मदा नदी से जुड़े जिलों के ग्रामीण क्षेत्रो में ग्रीष्मकालीन खेती काफी लाभकारी होगी। किसान कल्याण विभाग ने मैदानी अधिकारियों को ग्रीष्मकालीन फसल लिये जाने के संबंध में किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन दिये जाने के निर्देश दिये हैं।
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प्रदेश में प्रमुख रूप से रबी सीजन में गेहूँ की बोनी 42.62 लाख हेक्टेयर में तथा चने की बोनी 32.33 लाख हेक्टेयर में की गयी थी। अच्छे मौसम को देखते हुये प्रदेश में गेहूँ एवं चने का रिकार्ड उत्पादन होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
रबी सीजन में खेतों में कटाई के बाद ग्रीष्मकालीन फसल लेने की सलाह
जल संरचनाओं में पानी की अच्छी उपलब्धता के कारण जायद फसलें लिया जाना लाभकारी होगा
ग्रीष्मकालीन फसलों की अवधि 50 से 60 दिन की
किसान कल्याण विभाग ने रबी फसलों की अच्छी स्थिति के बाद प्रदेश में किसानों के लिये ग्रीष्म काल में जायद फसलों के उत्पादन की अच्छी संभावना बताई है। कृषि अधिकारियों ने कहा है कि प्रदेश के कृषक खाली खेतों में अथवा रबी की शीघ्र बोई गयी फसल काटने के बाद मूँग, उड़द, सब्जियों तथा चारे की फसलों की बोनीकर अतिरिक्त लाभ ले सकते हैं। जायद फसलों के तैयार होने की अवधि 50 से 60 दिन की होती है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि भूमि संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता की दृष्टि से भी इन फसलों का बोया जाना उपयोगी होगा। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री एम.के. राय ने पिछले दिनों मंत्रालय में आयोजित कृषि अधिकारियों की बैठक में रबी फसलों की स्थिति एवं संभावित रबी उत्पादन की समीक्षा की थी। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री राय ने कृषि अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे प्रदेश में किसानों को जायद फसल बोने के लिये अधिक से अधिक प्रोत्साहित करें। संचालक किसान कल्याण डॉ. डी.एन. शर्मा ने बताया कि खाली खेतों में मूँग की खेती के लिये फरवरी के दूसरे सप्ताह से मार्च के तीसरे सप्ताह का समय सबसे उपयुक्त रहता है। प्रदेश में इस वर्ष अच्छी बारिश के कारण जल संरचनाओं में पानी की उपलब्धता अच्छी है। इसका फायदा कृषक गर्मी के मौसम की अल्पकालीक फसलें उड़द, सूरजमुखी, मक्का, चने की फसलें, लोबिया, ग्वार आदि की कम लागत पर सफल खेती कर सकते हैं। सब्जियों में वर्गी फसलें गिल्की, लोकी, खीरा, खरबूज, तरबूज आदि बोया जाना भी किसानों के लिये लाभकारी सिद्ध होगा।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जायद की फसल के रूप में दलहन फसलें बोया जाना कृषि भूमि की उर्वरता वृद्धि के लिये काफी फायदेमंद हैं। जायद फसलें वायुजनित मिट्टी के क्षण को कम करती हैं और प्राकृतिक नत्रजन बढ़ाती हैं। कृषि विशेषज्ञों ने कहा है कि हरदा, होशंगाबाद एवं नर्मदा नदी से जुड़े जिलों के ग्रामीण क्षेत्रो में ग्रीष्मकालीन खेती काफी लाभकारी होगी। किसान कल्याण विभाग ने मैदानी अधिकारियों को ग्रीष्मकालीन फसल लिये जाने के संबंध में किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन दिये जाने के निर्देश दिये हैं।
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Thursday, February 18, 2010
मप्र के लिए केन्द्र ने किया शक्कर का कोटा कम
गरीब उपभोक्ताओं पर पड़ा असर, खाद्य मंत्री ने जताया विरो, प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
केन्द्र से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत प्रदेश को मिलने वाले शक्कर के कोटे में लगातार कमी हो रही है। इस शक्कर को सिर्फ बीपीएल और अन्त्योदय अन्न योजना के हितग्राहियों को प्रदाय किया जाता है, लिहाजा शक्कर के कोटे में कमी का सीधा असर गरीब उपभोक्ताओं पर पड़ा है। खाद्य आपूर्ति राज्यमंत्री श्री पारसचंद्र जैन ने इस भेदभावपूर्ण रवैये पर अफसोस और कड़ा विरोध जताते हुए प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को पत्र लिखा है।केन्द्र से साविप्र के तहत मिलने वाली इस शक्कर में कमी का सिलसिला चार महीने पहले शुरू हुआ है। इससे पहले अक्टूबर तक प्रदेश को 15 हजार 274 मे. टन शक्कर मिल रही थी। नवम्बर में करीब पौने तीन हजार मे. टन शक्कर कम करके प्रदेश को 12 हजार 571 और इसके बाद दिसम्बर और जनवरी में इस मात्रा में और कमी करते हुए 12 हजार 513 मे. टन शक्कर दी गई है। फरवरी में तो केन्द्र ने सारी हदें पार कर प्रदेश को केवल 9 हजार 863 मे. टन शक्कर ही आवंटित की है।
वितरण पर असर
केन्द्र से मिली कम शक्कर से इसका गरीबों को वितरण गड़बड़ा गया है। खुले बाजार में इसकी कीमत वैसे ही गरीबों की पहुंच के बाहर है। अगर सीधेतौर पर गौर करें तो फरवरी में बीपीएल और अन्त्योदय अन्न योजना (एएवाय) के हितग्राहियों को पूर्व की तयशुदा मात्रा से करीब 700 ग्राम शक्कर कम मिलेगी। अक्टूबर में जहां इन लोगों को 2 किलो 205 ग्राम शक्कर प्रति राशनकार्ड दी जा रही थी, नवम्बर में कम कोटा मिलने से इसे घटाकर 1 किलो 810 ग्राम किया गया और अब फरवरी मं इसे 1 किलो 500 ग्राम के हिसाब से प्रदाय किया जा सकेगा।
प्रधानमंत्री को पत्र
खाद्य आपूर्ति राज्यमंत्री श्री पारसचंद्र जैन फरवरी महीने के इस कोटे के जिलेवार आवंटन की सोमवार को अनुमोदन के लिए उनके पास आई फाईल देखते ही सकते में आ गए। महंगाई की मार झेल रहे लोग और खास कर गरीब पहले से ही टूट रहे हैं। उसके बाद केन्द्र के इस रवैये का इशारा क्या हो सकता है, यह एकाएक श्री जैन भांप नहीं सके।
वितरण पर असर
केन्द्र से मिली कम शक्कर से इसका गरीबों को वितरण गड़बड़ा गया है। खुले बाजार में इसकी कीमत वैसे ही गरीबों की पहुंच के बाहर है। अगर सीधेतौर पर गौर करें तो फरवरी में बीपीएल और अन्त्योदय अन्न योजना (एएवाय) के हितग्राहियों को पूर्व की तयशुदा मात्रा से करीब 700 ग्राम शक्कर कम मिलेगी। अक्टूबर में जहां इन लोगों को 2 किलो 205 ग्राम शक्कर प्रति राशनकार्ड दी जा रही थी, नवम्बर में कम कोटा मिलने से इसे घटाकर 1 किलो 810 ग्राम किया गया और अब फरवरी मं इसे 1 किलो 500 ग्राम के हिसाब से प्रदाय किया जा सकेगा।
प्रधानमंत्री को पत्र
खाद्य आपूर्ति राज्यमंत्री श्री पारसचंद्र जैन फरवरी महीने के इस कोटे के जिलेवार आवंटन की सोमवार को अनुमोदन के लिए उनके पास आई फाईल देखते ही सकते में आ गए। महंगाई की मार झेल रहे लोग और खास कर गरीब पहले से ही टूट रहे हैं। उसके बाद केन्द्र के इस रवैये का इशारा क्या हो सकता है, यह एकाएक श्री जैन भांप नहीं सके।
अपना कड़ा विरोध जताते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री को तत्काल पत्र लिखकर यह पूरी वस्तुस्थिति साफ करना उचित समझा। श्री जैन ने पत्र में स्मरण कराया है कि पिछले सप्ताह ही केन्द्र सरकार ने सारे राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाकर देश में महंगाई के खिलाफ कदम उठाए जाने की जरूरत बताई थी।
इसके नतीजों का इंतजार हो ही रहा है और अब इस महीने केन्द्र ने प्रदेश का शक्कर कोटा और घटा दिया है। इसने गरीबों के हितों पर कुठाराघात कर महंगाई में आग पर घी का काम किया है। राज्यमंत्री श्री जैन ने इस मामले में प्रधानमंत्री से सीधे हस्तक्षेप का अनुरोध करते हुए प्रदेश का शक्कर कोटा तत्काल बढ़ाए जाने की मांग की है।
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Wednesday, January 13, 2010
मप्र में मावठे से गेहूँ का रिकार्ड उत्पादन का अनुमान
कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी द्वारा रबी फसलों की समीक्षा
मध्यप्रदेश में रबी सीजन में पिछले वर्ष अक्टूबर, नवम्बर एवं दिसम्बर माहों में हुई बारिश से रबी की बोनी का रकबा लगभग 11 लाख हेक्टेयर तक बढ़ गया है। प्रदेश में इस वर्ष 95.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों द्वारा रबी की बोनी की गई है। रबी सीजन में गेहूँ की बोनी 42.3 लाख हेक्टेयर तथा चने की बोनी 32.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की गई है। प्रदेश में समय पर मावठा गिरने से गेहूँ का उत्पादन पिछले वर्ष के मुकाबले 15 प्रतिशत अधिक आने का अनुमान लगाया गया है। कृषि विभाग को अनुमान है कि इस वर्ष प्रदेश में 85 लाख मैट्रिक टन गेहूँ का उत्पादन होगा। यह जानकारी पिछले दिनों मंत्रालय में कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दी गई।
सामयिक मावठे से गेहूँ का रिकार्ड 85 लाख मैट्रिक टन उत्पादन का अनुमान
रबी सीजन में लक्ष्य से अधिक 95.36 लाख हेक्टेयर में बोनी
रबी सीजन में 15.70 लाख मैट्रिक टन रसायन उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित की गई
बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी ने बताया कि इस वर्ष रबी की बोनी पिछले वर्ष के मुकाबले 113 प्रतिशत है। प्रदेश में किसानों को उनकी मांग के अनुसार रसायन उर्वरक मिल सके इसके लिये भी केन्द्रीय रसायन मंत्रालय एवं रेल मंत्रालय से निरंतर सम्पर्क कर इसकी आपूर्ति सुनिश्चित की गई। प्रदेश में इस रबी सीजन में अब तक 15.70 लाख मैट्रिक टन उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित की गई, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 25 प्रतिशत अधिक है। किसानों को अब तक 13.81 लाख मैट्रिक टन उर्वरक का वितरण किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश में पिछले वर्ष के मुकाबले डीएपी की उपलब्धता 17.5 प्रतिशत एवं यूरिया की उपलब्धता 26 प्रतिशत अधिक रही है। कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी के निर्देश पर आगामी वर्ष 2010-11 के लिये डीएपी उर्वरक की उपलब्धता के लिये अग्रिम भण्डारण की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है।
प्रदेश में इस वित्तीय वर्ष में किसानों को कृषि कार्य के लिये सहकारी बैंकों के माध्यम से 3 हजार 407 करोड़ रुपये का ऋण वितरण किया गया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक है।
प्रदेश में गेहूँ के अच्छे उत्पादन को देखते हुए शासकीय रूप से गेहूँ उपार्जन की व्यवस्था के लिये खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को अग्रिम व्यवस्था किये जाने के लिये कहा गया है।
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सामयिक मावठे से गेहूँ का रिकार्ड 85 लाख मैट्रिक टन उत्पादन का अनुमान
रबी सीजन में लक्ष्य से अधिक 95.36 लाख हेक्टेयर में बोनी
रबी सीजन में 15.70 लाख मैट्रिक टन रसायन उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित की गई
बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी ने बताया कि इस वर्ष रबी की बोनी पिछले वर्ष के मुकाबले 113 प्रतिशत है। प्रदेश में किसानों को उनकी मांग के अनुसार रसायन उर्वरक मिल सके इसके लिये भी केन्द्रीय रसायन मंत्रालय एवं रेल मंत्रालय से निरंतर सम्पर्क कर इसकी आपूर्ति सुनिश्चित की गई। प्रदेश में इस रबी सीजन में अब तक 15.70 लाख मैट्रिक टन उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित की गई, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 25 प्रतिशत अधिक है। किसानों को अब तक 13.81 लाख मैट्रिक टन उर्वरक का वितरण किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश में पिछले वर्ष के मुकाबले डीएपी की उपलब्धता 17.5 प्रतिशत एवं यूरिया की उपलब्धता 26 प्रतिशत अधिक रही है। कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी के निर्देश पर आगामी वर्ष 2010-11 के लिये डीएपी उर्वरक की उपलब्धता के लिये अग्रिम भण्डारण की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है।
प्रदेश में इस वित्तीय वर्ष में किसानों को कृषि कार्य के लिये सहकारी बैंकों के माध्यम से 3 हजार 407 करोड़ रुपये का ऋण वितरण किया गया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक है।
प्रदेश में गेहूँ के अच्छे उत्पादन को देखते हुए शासकीय रूप से गेहूँ उपार्जन की व्यवस्था के लिये खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को अग्रिम व्यवस्था किये जाने के लिये कहा गया है।
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