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Tuesday, June 21, 2011
मध्यप्रदेश में जी.एम. फसलों का क्षेत्र परीक्षण नहीं
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Friday, July 16, 2010
प्रदेश में खरीफ सीजन में 57 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी
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Thursday, July 15, 2010
गेहूँ साफ करने और पिसाने की नहीं अब जहमत
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Monday, July 12, 2010
खाद्य, बीज और जैव-विविधता संबंधी विधेयक राष्ट्रीय बहस होना आवश्यक
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Sunday, July 11, 2010
किसानों को वापस मिलेगी अतिरिक्त भूमि
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Thursday, July 8, 2010
कृषकों को तीन प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण
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Tuesday, July 6, 2010
खरीफ सीजन में एक लाख 12 हजार मिनिकिट प्रदाय किये जायेंगे
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किसानों को कृषि यंत्र खरीदी पर अनुदान का प्रावधान
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Saturday, July 3, 2010
मप्र में खाद की आपूर्ति समय पर करने के लिए दस रेक्स की आवश्यकता
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Wednesday, June 30, 2010
हर गांव का मास्टर प्लान बनेगा
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Monday, June 7, 2010
मप्र में राजस्व विभाग का सम्पूर्ण रिकार्ड कम्प्यूटर में होगा
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Sunday, May 30, 2010
नर्मदा घाटी में दो लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता
बैठक में नर्मदा घाटी विकास राज्य मंत्री श्री के.एल. अग्रवाल, मुख्य सचिव श्री अवनि वैश्य, अपर मुख्य सचिव श्री ओ.पी. रावत तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश को आवंटित नर्मदा जल का सन् 2021 तक पूरा उपयोग सुनिश्चित करने की परियोजनावार और क्षेत्रवार जानकारी शीघ्र प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में निर्माणाधीन नर्मदा परियोजनाओं की पूर्णता की भी समयबद्ध कार्ययोजना बनायी जाये।
बैठक में बताया गया कि राज्य में इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, रानी अवंती बाई सागर (बरगी), मान तथा जोबट परियोजनाओं के बांधों का निर्माण पूरा हो चुका है। अपर बेदा, पुनासा उद्वहन तथा लोअर गोई परियोजनाओं के बांधों का काम जारी है। अटारिया, अपर नर्मदा, हालोन, राघवपुर, रोसरा तथा बमानिया परियोजनाओं में भी बांध का निर्माण प्रस्तावित है।
नर्मदा परिक्रमा पथ के विकास के अंतर्गत नर्मदा के दोनों तटों पर अमरकंटक से गुजरात सीमा तक चिन्हांकन का कार्य पूरा हो चुका है। पथ के विकास का परियोजना प्रतिवेदन भी तैयार कर लिया गया है। अब प्रस्तावित मार्ग का पैदल सर्वेक्षण किया जायेगा।
विभाग द्वारा 15 मेगावाट की इंदिरा सागर तथा 3.5 मेगावाट की ओंकारेश्वर नहर शीर्ष विद्युत गृह परियोजनाएं 2013 तक पूरी कर ली जायेंगी। जोबट परियोजना से 9868 हेक्टेयर की निर्धारित क्षमता से अधिक वर्ष 2009-10 में 10,000 हेक्टेयर में वास्तविक सिंचाई की गई।
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Monday, May 17, 2010
निजी भूमि साढ़े बासठ लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी
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Saturday, May 15, 2010
्रामीण क्षेत्रों में परिवहन के लिए बस-टैक्सी परमिट
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Friday, April 23, 2010
रीवा और शहडोल संभाग में दाल की पैदावार बढ़ाई जायेगी
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Thursday, April 22, 2010
तेन्दूपत्ता संग्रहण दर में 100 रुपये की वृद्धि
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Sunday, April 18, 2010
भोपाल मण्डी अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित
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Friday, February 26, 2010
किसानों को मिलेंगे 7.56 लाख से अधिक बिजली कनेक्शन
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Wednesday, February 24, 2010
मप्र में किसानों को ग्रीष्मकालीन फसल लेने की सलाह
प्रदेश में प्रमुख रूप से रबी सीजन में गेहूँ की बोनी 42.62 लाख हेक्टेयर में तथा चने की बोनी 32.33 लाख हेक्टेयर में की गयी थी। अच्छे मौसम को देखते हुये प्रदेश में गेहूँ एवं चने का रिकार्ड उत्पादन होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
रबी सीजन में खेतों में कटाई के बाद ग्रीष्मकालीन फसल लेने की सलाह
जल संरचनाओं में पानी की अच्छी उपलब्धता के कारण जायद फसलें लिया जाना लाभकारी होगा
ग्रीष्मकालीन फसलों की अवधि 50 से 60 दिन की
किसान कल्याण विभाग ने रबी फसलों की अच्छी स्थिति के बाद प्रदेश में किसानों के लिये ग्रीष्म काल में जायद फसलों के उत्पादन की अच्छी संभावना बताई है। कृषि अधिकारियों ने कहा है कि प्रदेश के कृषक खाली खेतों में अथवा रबी की शीघ्र बोई गयी फसल काटने के बाद मूँग, उड़द, सब्जियों तथा चारे की फसलों की बोनीकर अतिरिक्त लाभ ले सकते हैं। जायद फसलों के तैयार होने की अवधि 50 से 60 दिन की होती है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि भूमि संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता की दृष्टि से भी इन फसलों का बोया जाना उपयोगी होगा। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री एम.के. राय ने पिछले दिनों मंत्रालय में आयोजित कृषि अधिकारियों की बैठक में रबी फसलों की स्थिति एवं संभावित रबी उत्पादन की समीक्षा की थी। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री राय ने कृषि अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे प्रदेश में किसानों को जायद फसल बोने के लिये अधिक से अधिक प्रोत्साहित करें। संचालक किसान कल्याण डॉ. डी.एन. शर्मा ने बताया कि खाली खेतों में मूँग की खेती के लिये फरवरी के दूसरे सप्ताह से मार्च के तीसरे सप्ताह का समय सबसे उपयुक्त रहता है। प्रदेश में इस वर्ष अच्छी बारिश के कारण जल संरचनाओं में पानी की उपलब्धता अच्छी है। इसका फायदा कृषक गर्मी के मौसम की अल्पकालीक फसलें उड़द, सूरजमुखी, मक्का, चने की फसलें, लोबिया, ग्वार आदि की कम लागत पर सफल खेती कर सकते हैं। सब्जियों में वर्गी फसलें गिल्की, लोकी, खीरा, खरबूज, तरबूज आदि बोया जाना भी किसानों के लिये लाभकारी सिद्ध होगा।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जायद की फसल के रूप में दलहन फसलें बोया जाना कृषि भूमि की उर्वरता वृद्धि के लिये काफी फायदेमंद हैं। जायद फसलें वायुजनित मिट्टी के क्षण को कम करती हैं और प्राकृतिक नत्रजन बढ़ाती हैं। कृषि विशेषज्ञों ने कहा है कि हरदा, होशंगाबाद एवं नर्मदा नदी से जुड़े जिलों के ग्रामीण क्षेत्रो में ग्रीष्मकालीन खेती काफी लाभकारी होगी। किसान कल्याण विभाग ने मैदानी अधिकारियों को ग्रीष्मकालीन फसल लिये जाने के संबंध में किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन दिये जाने के निर्देश दिये हैं।
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किसान कल्याण मंत्री कॉल सेन्टर में सुनेंगे किसानों की समस्याएँ
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