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दीक्षांत समारोह

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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

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Tuesday, June 21, 2011

मध्यप्रदेश में जी.एम. फसलों का क्षेत्र परीक्षण नहीं

मध्यप्रदेश में जेनेटिकली मोडीफाइड (जी.एम.) फसलों के परीक्षण हेतु कोई प्रयोग नहीं किया गया है। यह जानकारी केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन राज्य मंत्री श्री जयराम रमेश ने प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया को लिखे एक पत्र में दी है।

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Friday, July 16, 2010

प्रदेश में खरीफ सीजन में 57 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी

 अनाज की फसलें कुछ ही कम रकबे में
प्रदेश में खरीफ बोवाई रूक-रूक कर होने के बाद भी अब तक सामान्य क्षेत्रफल की लगभग 55 प्रतिशत बोवनी पूरी हो चुकी है। गत वर्ष कुल खरीफ फसलें 106.11 लाख हेक्टेयर में बोई गई थी जिसे देखते हुये इस वर्ष खरीफ फसलों का रकबा 108.25 लाख बोये जाने का अनुमान किया गया है। 

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Thursday, July 15, 2010

गेहूँ साफ करने और पिसाने की नहीं अब जहमत

 लोगों की सुधरेगी सेहत
राज्य सरकार ने शहरी क्षेत्रों के खासकर निम्न और मध्यम आयवर्गीय परिवारों को गेहूँ की बजाए अब गुणवत्तापूर्ण आटा उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। इस योजना को 15 अगस्त से प्रदेश के सारे संभागों के शहरी क्षेत्रों में लागू करने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।

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Monday, July 12, 2010

खाद्य, बीज और जैव-विविधता संबंधी विधेयक राष्ट्रीय बहस होना आवश्यक

 खाद्य सुरक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन में केन्द्र सरकार से आग्रह
खाद्य सुरक्षा विधेयक, बीज विधेयक और राष्ट्रीय जैव-विविधता नियमन विधेयक जल्दबाजी में पारित नहीं किये जाना चाहिये। इन प्रस्तावित कानूनों के दीर्घगामी परिणाम होंगे। इसलिये इस पर राष्ट्रीय बहस होना आवश्यक है ताकि राष्ट्र और जनता के व्यापक हितों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

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Sunday, July 11, 2010

किसानों को वापस मिलेगी अतिरिक्त भूमि

 यंत्रो पर मिलने वाली अनुदान राशि अब सीधे किसानो के खातो मे
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज सतना जिले में यह महत्वपूर्ण घोषणा की कि लिलजी बॉध की जमीन तथा टमस बराज बॉध की ऊचाई कम करने के चलते शेष बची भूमि किसानों को वापस की जायेगी। श्री चौहान ने यह घोषणा सतना जिले के केसौरा ग्राम मे

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Thursday, July 8, 2010

कृषकों को तीन प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण

राज्य शासन ने आदेश जारी
किसानों को तीन प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने के लिये राज्य शासन ने आदेश जारी कर दिये हैं। उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व किसानों को सहकारी बैंको से पांच प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण देने की व्यवस्था थी।

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Tuesday, July 6, 2010

खरीफ सीजन में एक लाख 12 हजार मिनिकिट प्रदाय किये जायेंगे

 हेक्टेयर के दसवें हिस्से के लिये आवश्यक बीज की मात्रा मिनिकिटों में
उन्नत किस्मों के बीज किसानों को मुहैया कराने बीज प्रतिस्थापन दर में बढ़ोत्तरी करने और अगले वर्षों के लिये किसानों को बीज स्वावलम्बी बनाने के उद्देश्य से इस वर्ष एक लाख 12 हजार 111 बीज मिनिकिट प्रदाय किये जायेंगे। 

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किसानों को कृषि यंत्र खरीदी पर अनुदान का प्रावधान

 राज्य स्तरीय पंजीयन समिति द्वारा उपयुक्त पाये गये यंत्र व उपकरण
किसानों को खेती के काम आने वाले कृषि यंत्र तथा सिंचाई उपकरण खरीदने के लिये किसी खास विक्रेता या एजेंसी का मोहताज नहीं होना पड़ेगा। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की योजनाओं के अंतर्गत किसी यंत्र खरीदने पर अनुदान का प्रावधान है।

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Saturday, July 3, 2010

मप्र में खाद की आपूर्ति समय पर करने के लिए दस रेक्स की आवश्यकता

 55 रेक्स  के विरुद्ध मात्र 45 रेक्स ही प्राप्त
किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने आज दिल्ली में केन्द्रीय रेल राज्यमंत्री से भेंट कर मध्यप्रदेश में खाद की आपूर्ति समय पर सुनिश्चित करने के लिये 10 रेक्स की मांग की है। 
उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश राज्य को रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय भारत सरकार से जून माह में

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Wednesday, June 30, 2010

हर गांव का मास्टर प्लान बनेगा

किसानों को मिलेगा 3 प्रतिशत पर ऋण
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि गांवों का सुनियोजित ढंग से विकास हो, इसके लिये हर गांव का मास्टर प्लान बनाया जायेगा। गांव में मकानों के अधिकार-पत्र दिये जायेंगे। खेती में काम करते समय करंट से होने वाली मृत्यु पर भी पीड़ित परिवार को एक लाख रूपये मिलेंगे।

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Monday, June 7, 2010

मप्र में राजस्व विभाग का सम्पूर्ण रिकार्ड कम्प्यूटर में होगा

ई-गवर्नेंस पारदर्शी प्रशासन की दिशा में पहला कदम 
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि राज्य शासन ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। मध्यप्रदेश बहुत जल्दी इस क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शुमार होगा। श्री विजयवर्गीय ने आज यहां नेशनल ई-गवर्नेंस नॉलेज शेयरिंग सामिट-2010 का शुभारंभ करते हुए कहा कि ई-गवर्नेंस पारदर्शी प्रशासन की दिशा में पहला कदम है।

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Sunday, May 30, 2010

नर्मदा घाटी में दो लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता

ओंकारेश्वर नहर शीर्ष विद्युत गृह परियोजनाएं 2013 तक पूरी
नर्मदा घाटी में आगामी चार वर्षों में दो लाख हेक्टेयर के अतिरिक्त सिचाई क्षमता का लक्ष्य प्राप्त करने के लिये तेजी से काम जारी है तथा इस वर्ष 40,000 हेक्टेयर का लक्ष्य प्राप्त कर लिया जायेगा। यह जानकारी मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई विभाग की समीक्षा बैठक में दी गई।

बैठक में नर्मदा घाटी विकास राज्य मंत्री श्री के.एल. अग्रवाल, मुख्य सचिव श्री अवनि वैश्य, अपर मुख्य सचिव श्री ओ.पी. रावत तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश को आवंटित नर्मदा जल का सन् 2021 तक पूरा उपयोग सुनिश्चित करने की परियोजनावार और क्षेत्रवार जानकारी शीघ्र प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में निर्माणाधीन नर्मदा परियोजनाओं की पूर्णता की भी समयबद्ध कार्ययोजना बनायी जाये।

बैठक में बताया गया कि राज्य में इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, रानी अवंती बाई सागर (बरगी), मान तथा जोबट परियोजनाओं के बांधों का निर्माण पूरा हो चुका है। अपर बेदा, पुनासा उद्वहन तथा लोअर गोई परियोजनाओं के बांधों का काम जारी है। अटारिया, अपर नर्मदा, हालोन, राघवपुर, रोसरा तथा बमानिया परियोजनाओं में भी बांध का निर्माण प्रस्तावित है। 

कुल 414 करोड़ रूपये लागत की हालोन परियोजना का कार्य इस वर्ष तथा 570 करोड़ रूपये लागत की अपर नर्मदा परियोजना का निर्माण आगामी वर्ष शुरू किया जाना प्रस्तावित है। इन सभी परियोजनाओं से 8.39 लाख हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता निर्मित होगी जिसमें से अब तक 2.75 लाख हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता का निर्माण हो चुका है।

नर्मदा परिक्रमा पथ के विकास के अंतर्गत नर्मदा के दोनों तटों पर अमरकंटक से गुजरात सीमा तक चिन्हांकन का कार्य पूरा हो चुका है। पथ के विकास का परियोजना प्रतिवेदन भी तैयार कर लिया गया है। अब प्रस्तावित मार्ग का पैदल सर्वेक्षण किया जायेगा।

विभाग द्वारा 15 मेगावाट की इंदिरा सागर तथा 3.5 मेगावाट की ओंकारेश्वर नहर शीर्ष विद्युत गृह परियोजनाएं 2013 तक पूरी कर ली जायेंगी। जोबट परियोजना से 9868 हेक्टेयर की निर्धारित क्षमता से अधिक वर्ष 2009-10 में 10,000 हेक्टेयर में वास्तविक सिंचाई की गई। 

विभाग द्वारा बरगी डायवर्शन परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे इस परियोजना को निश्चित अवधि में पूरा करने में मदद मिलेगी।

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Monday, May 17, 2010

निजी भूमि साढ़े बासठ लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी

 महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना
प्रदेश के लगभग साढ़े बासठ लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी, सिंचाई एवं भूमि विकास के कार्य किये गये हैं। यह कार्य महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत कराये गये हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा सामाजिक न्याय मंत्री श्री गोपाल भार्गव ने यह जानकारी देते हुये बताया कि मनरेगा के तहत जहां जरूरतमंदों को व्यापक पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है वहीं अधोसंरचना से जुड़े हुये महत्वपूर्ण कार्य किये जा रहे हैं।

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Saturday, May 15, 2010

्रामीण क्षेत्रों में परिवहन के लिए बस-टैक्सी परमिट

 मध्यप्रदेश का विकास हमारा मिशन
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने मध्यप्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र के अंतिम दिन आज राजस्व प्रकरणों के निपटारे के लिए समय सीमा निर्धारित करने, एक हजार जनसंख्या तक के गांवों के लिए मुख्यमंत्री नल-जल योजना, खेतों तक पहुंच के लिए सड़क निर्माण, शासकीय भवनों के निर्माण तथा रखरखाव के लिए पृथक इकाई, किसानों को

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Friday, April 23, 2010

रीवा और शहडोल संभाग में दाल की पैदावार बढ़ाई जायेगी

 कृषि उत्पादन आयुक्त द्वारा आगामी खरीफ की तैयारियों की समीक्षा
रीवा एवं शहडोल संभाग में दलहनी फसलों की पैदावार बढाई जायेगी। इसके लिये किसानों को उन्नत किस्म का बीज और अन्य कृषि आदान समय पर उपलब्ध कराया जायेगा। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री एम.के. राय ने मंगलवार को रीवा में शहडोल और रीवा संभाग में आगामी खरीफ सीजन के लिये की जा रही तैयारियों की एक बैठक में समीक्षा की।

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Thursday, April 22, 2010

तेन्दूपत्ता संग्रहण दर में 100 रुपये की वृद्धि

दस दिन में तेन्दूपत्ता संग्रहण का कार्य शुरू 
राज्य शासन ने वनवासियों को तोहफा देते हुए तेन्दूपत्ता संग्रहण की दर में एक सौ रुपये प्रति मानक बोरा के मान से वृद्धि कर दी है। पिछले दो साल से यह दर 550 रुपये थी जो अब बढ़ाकर 650 रुपये कर दी गई है। वर्ष 2003 में यह दर 300 रुपये थी।

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Sunday, April 18, 2010

भोपाल मण्डी अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित

कृषि उपज मण्डियों के आरक्षण की प्रक्रिया सम्पन्न
प्रदेश की दो सौ उन्तालिस कृषि उपज मण्डी समितियों में आगामी निर्वाचन के लिए अध्यक्ष पदों के लिए आरक्षण की प्रक्रिया आज समन्वय भवन (एपेक्स बैंक) भोपाल में प्रबंध संचालक, मण्डी बोर्ड श्री विवेक अग्रवाल की उपस्थिति में सम्पन्न हुई। अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 38, अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 48 और पिछड़े वर्ग के लिए 90 पद आरक्षित किये गए, इन सभी पदों पर एक तिहाई पद महिलाओं के लिए आरक्षित किये गये हैं।

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Friday, February 26, 2010

किसानों को मिलेंगे 7.56 लाख से अधिक बिजली कनेक्शन

विद्युत वितरण कम्पनियों को 225 करोड़ रुपये से ज्यादा राजस्व की प्राप्ति
प्रदेश में वर्तमान वित्तीय वर्ष 2009-10 में गत माह जनवरी तक कृषकों को सिंचाई पम्प और थ्रेशर के लिये सात लाख 56 हजार 531 अस्थाई कनेक्शन प्रदान किये गये। मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मण्डल की पूर्व, मध्य और पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड को अस्थाई कनेक्शनों के माध्यम से 225 करोड़ आठ लाख 15 हजार रुपये राशि का राजस्व प्राप्त हुआ है।

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Wednesday, February 24, 2010

मप्र में किसानों को ग्रीष्मकालीन फसल लेने की सलाह

जायद फसलों के तैयार होने की अवधि 50 से 60 दिन
मध्यप्रदेश में रबी की फसल स्थिति काफी अच्छी है। इसकी वजह प्रदेश में अक्टूबर, नवम्बर एवं दिसम्बर में सही अंतराल से हुई बारिश का होना रहा है। प्रदेश में रबी सीजन में इस वर्ष लगभग 95 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोनी की गयी थी। प्रदेश में रबी के सामान्य क्षेत्रफल से लगभग 11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की अतिरिक्त बोनी की गयी।
प्रदेश में प्रमुख रूप से रबी सीजन में गेहूँ की बोनी 42.62 लाख हेक्टेयर में तथा चने की बोनी 32.33 लाख हेक्टेयर में की गयी थी। अच्छे मौसम को देखते हुये प्रदेश में गेहूँ एवं चने का रिकार्ड उत्पादन होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
रबी सीजन में खेतों में कटाई के बाद ग्रीष्मकालीन फसल लेने की सलाह
जल संरचनाओं में पानी की अच्छी उपलब्धता के कारण जायद फसलें लिया जाना लाभकारी होगा
ग्रीष्मकालीन फसलों की अवधि 50 से 60 दिन की

किसान कल्याण विभाग ने रबी फसलों की अच्छी स्थिति के बाद प्रदेश में किसानों के लिये ग्रीष्म काल में जायद फसलों के उत्पादन की अच्छी संभावना बताई है। कृषि अधिकारियों ने कहा है कि प्रदेश के कृषक खाली खेतों में अथवा रबी की शीघ्र बोई गयी फसल काटने के बाद मूँग, उड़द, सब्जियों तथा चारे की फसलों की बोनीकर अतिरिक्त लाभ ले सकते हैं। जायद फसलों के तैयार होने की अवधि 50 से 60 दिन की होती है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि भूमि संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता की दृष्टि से भी इन फसलों का बोया जाना उपयोगी होगा। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री एम.के. राय ने पिछले दिनों मंत्रालय में आयोजित कृषि अधिकारियों की बैठक में रबी फसलों की स्थिति एवं संभावित रबी उत्पादन की समीक्षा की थी। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री राय ने कृषि अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे प्रदेश में किसानों को जायद फसल बोने के लिये अधिक से अधिक प्रोत्साहित करें। संचालक किसान कल्याण डॉ. डी.एन. शर्मा ने बताया कि खाली खेतों में मूँग की खेती के लिये फरवरी के दूसरे सप्ताह से मार्च के तीसरे सप्ताह का समय सबसे उपयुक्त रहता है। प्रदेश में इस वर्ष अच्छी बारिश के कारण जल संरचनाओं में पानी की उपलब्धता अच्छी है। इसका फायदा कृषक गर्मी के मौसम की अल्पकालीक फसलें उड़द, सूरजमुखी, मक्का, चने की फसलें, लोबिया, ग्वार आदि की कम लागत पर सफल खेती कर सकते हैं। सब्जियों में वर्गी फसलें गिल्की, लोकी, खीरा, खरबूज, तरबूज आदि बोया जाना भी किसानों के लिये लाभकारी सिद्ध होगा।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जायद की फसल के रूप में दलहन फसलें बोया जाना कृषि भूमि की उर्वरता वृद्धि के लिये काफी फायदेमंद हैं। जायद फसलें वायुजनित मिट्टी के क्षण को कम करती हैं और प्राकृतिक नत्रजन बढ़ाती हैं। कृषि विशेषज्ञों ने कहा है कि हरदा, होशंगाबाद एवं नर्मदा नदी से जुड़े जिलों के ग्रामीण क्षेत्रो में ग्रीष्मकालीन खेती काफी लाभकारी होगी। किसान कल्याण विभाग ने मैदानी अधिकारियों को ग्रीष्मकालीन फसल लिये जाने के संबंध में किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन दिये जाने के निर्देश दिये हैं।

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किसान कल्याण मंत्री कॉल सेन्टर में सुनेंगे किसानों की समस्याएँ

कॉल सेन्टर का टोल फ्री नम्बर 1800-233-44-33 
किसान कल्याण मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया 24 फरवरी को दोपहर 3 बजे से 4 बजे तक भोपाल के गंगोत्री भवन में स्थित किसान काल सेन्टर उपस्थित रहकर किसानों की समस्याओं को सुनेंगे और उनका निराकरण करेंगे।किसान कॉल सेन्टर किसान कल्याण विभाग की मदद से इण्डियन सोसायटी ऑफ एग्री बिजनेस प्रोफेशनल्स (आईसेफ) के द्वारा संचालित हो रहा है। इस कॉल सेन्टर का टोल फ्री नम्बर 1800-233-44-33 है। किसान कॉल सेन्टर में अब तक प्रदेश के ढाई लाख से अधिक किसानों की समस्याओं का निराकरण किया जा चुका है। यह कॉल सेन्टर सप्ताह में सातों दिन प्रात: 7 बजे से शाम 7 बजे तक संचालित हो रहा है। इस कॉल सेन्टर में कृषि विशेषज्ञों द्वारा कृषि से संबंधित समस्याओं के साथ-साथ पशुपालन, मछलीपालन, डेयरी विषय से संबंधित समस्याओं का भी निराकरण भी किया जा रहा है।

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