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Monday, October 12, 2009

आदर्श कृषि फार्म विकसित किये जायेंगे - कृषि विकास मंत्री डॉ. कुसमरिया

प्रदेश में खेती का लाभ का धंधा बनाने के लिये चयनित गाँवों में 5 से 10 हेक्टेयर रकबे में आदर्श कृषि फार्म विकसित किये जायेंगे। इन कृषि फार्मों में कृषि की आधुनिक तकनीकों, जैविक पद्धति, बायोगैस एवं कृषि उपकरणों की जानकारी के साथ-साथ किसानों को उद्यानिकी एवं अन्य गतिविधियों की जानकारी प्रायोगिक तौर पर दी जायेगी।
किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री डॉ। रामकृष्ण कुसमरिया ने उक्त जानकारी पिछले दिनों भोपाल के नजदीक शासकीय फन्दा कृषि फार्म के आकस्मिक निरीक्षण के बाद दी। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि फन्दा कृषि फार्म लाभ की स्थिति में है।
इन आदर्श कृषि फार्मों में किसानों को मत्स्य पालन, पशुपालन, सब्जी-फल उत्पादन, औषधि खेती, मधुमक्खी पालन, रेशम पालन आदि के बारे में एक ही स्थान पर जानकारी दी जायेगी। कृषि विकास मंत्री डॉ. कुसमरिया ने कहा कि प्रदेश में खेती को लाभ का धंघा बनाने के लिये किसानों को परम्परागत फसल लेने के अलावा कृषि से जुड़ी अन्य गतिविधियों की जानकारी दिया जाना जरूरी है। कृषि विभाग इन तमाम गतिविधियों को एक क्षेत्र में आदर्श रूप में प्रस्तुत कर किसानों को इनसे जुड़ने के लिये प्रोत्साहित करेगा। प्रदेश में वर्तमान में किसानों को जैविक खेती से अधिक से अधिक जोड़ने के लिये प्रयास किये जा रहे हैं। इस समय 3130 गांव का चयन जैविक ग्राम के रूप में किया गया है।
कृषि विकास मंत्री ने अपने निरीक्षण के दौरान फन्दा कृषि फार्म में गौशाला, नाडेप एवं वर्मी कम्पोस्ट की विधि को देखा। फन्दा कृषि फार्म के प्रभारी श्री मनोहर दिलवारिया ने बताया कि लगभग 120 हेक्टेयर के इस कृषि फार्म की गौशाला में 125 गायों का पालन किया जा रहा है। इनमें गौमूत्र एवं गोबर का उपयोग बायो गैस संयंत्र एवं जैविक औषधि के लिये किया जा रहा है। कृषि मंत्री ने नाडेप एवं वर्मी कम्पोस्ट की प्रक्रिया को देखा।
कृषि फार्म के बायोगैस संयंत्र से पैदा होने वाली बिजली का उपयोग फार्म हाउस में लगे हेलोजन बल्ब को जलाने में किया जा रहा है। कृषि विकास मंत्री डॉ. कुसमरिया ने बीज प्रोसेसिंग मशीन का निरीक्षण किया। कृषि फार्म में रबी एवं खरीफ सीजन में उन्नत एवं प्रमाणित बीज पैदा किया जा रहा है। साथ ही आसपास के किसानों के उन्नत बीज की ग्रेडिंग भी की जा रही है।
संयुक्त संचालक कृषि श्री डी.के. दुबे ने बताया कि कृषि फार्म में राज्य के अलावा अन्य राज्यों के किसानों के दल नियमित रूप से जैविक खेती एवं बीज प्रोसेसिंग देखने को आते हैं। कृषि विकास मंत्री को बताया गया कि फार्म हाउस में लगी सोयाबीन की उन्नत किस्म जे.एस. 9305 को हाल ही में हुई बारिश के बाद भी नुकसान नहीं पहुंचा है। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे कृषि फार्म को देखने आने वाले किसानों को उन्नत फसलों की विभिन्न किस्मों के बारे में भी जानकारी दें। इस मौके पर कृषि विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे।

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Saturday, October 10, 2009

चावल लेव्ही की नई नीति

खाद्य आपूर्ति राज्य मंत्री श्री पारसचंद्र जैन ने आज यहां प्रदेश के राइस मिलर्स महासंघ से चर्चा कर उनके द्वारा उठाई गई कई माँगों को मान लिया। श्री जैन ने यह वादा खास तौर पर किया कि अब से हर सीजन में चावल लेव्ही तय होने के पहले राइस मिलर्स से चर्चा कर दिक्कतों का समाधान किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि मौजूदा खरीफ विपणन साल में चावल पर लेव्ही की नीति हाल ही में तय कर दी गई है। इस पर अमल के पहले आज राज्य मंत्री श्री जैन ने महासंघ को बुलाकर यहाँ चर्चा की।
मिलिंग दर बढ़ाने का प्रस्ताव वित्त को
आज राइस मिलर्स महासंघ ने चावल की लेव्ही के लिए कस्टम मिलिंग की मौजूदा 10 रुपए प्रति क्विंटल की दर में इजाफे की माँग उठाई थी। इसे खाद्य आपूर्ति राज्य मंत्री श्री पारस चंद्र जैन ने सैद्धांतिक रूप से मंजूर कर दिया। इस दर में मुनासिब इजाफे का प्रस्ताव जल्द वित्त विभाग को भेजा जाएगा। श्री जैन ने यह भरोसा भी दिलाया कि इस मामले में वित्त विभाग से बाकायदा पैरवी और सिफारिश की जाएगी क्योंकि इन दरों में कई सालों से इजाफा नहीं हुआ है।
मिलिंग अवधि एक महीने बढ़ी
महासंघ ने लेव्ही को लेकर चावल मिलिंग की एक महीने की मौजूदा अवधि को नाकाफी बताया था। राज्य मंत्री श्री जैन ने आज मौके पर ही अपनी रजामंदी जताते हुए इसे बढ़ाकर दो महीने कर दिया। मिल वालों का कहना यह भी था कि लेव्ही चावल संग्रहण के लिए एक बार इस्तेमाल हो चुके बारदाने की दरें भिन्न होने और वाजिब नहीं होने के चलते उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।
राज्य मंत्री श्री जैन ने इसे मंजूर करते हुए प्रदेश में इन बारदानों की एक समान और वाजिब दर तय करने का ऐलान किया। आज से अफसरों ने इस पर काम शुरू कर दिया है। श्री जैन ने अलबत्ता सरकार का यह पक्ष भी साफ कर दिया कि बारदाने वापिस नहीं लिए जाएंगे।
राज्य मंत्री श्री जैन ने यह माँग भी मान ली कि मिलर्स को भण्डारण के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराई जाए। इस इंतजाम के लिए अफसरों ने फौरन संपर्क शुरू कर दिया है महासंघ यह भी चाहता था कि लेव्ही के सिलसिले में बनी जिला स्तरीय कमेटियों में चावल मिलर्स का प्रतिनिधित्व हो ताकि कुछ व्यावहारिक दिक्कतों का मौके पर ही निदान हो जाए। राज्य मंत्री श्री जैन ने इससे सहमत होते हुए जिला स्तरीय कमेटियों में एक प्रतिनिधि शामिल करने की मंजूरी दे दी है। कलेक्टरों को इस बारे में खबर की जा रही है।
धान की मिलिंग पहले करें
राज्य मंत्री श्री जैन ने राइस मिलर्स महासंघ से यह अपील भी की कि प्रदेश के सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े उपभोक्ताओं के हित में सरकार के लिए धान की मिलिंग पहले की जाए। इसी तरह उसकी गुणवत्ता पर कोई आँच नहीं आए। उन्होंने यह भी कहा कि चावल के मिलर्स अपने करीब के जिलों में ही धान जमा करें ताकि उन्हें अनावश्यक परिवहन व्यय नहीं भुगतना पड़े। श्री जैन ने आश्वस्त किया कि सरकार व्यापारियों के साथ अन्याय कभी होने नहीं देगी लेकिन उन्हें जनता के व्यापक हितों में कानून के दायरे में रह कर काम करना होगा।
महासंघ ने की तारीफ
मध्यप्रदेश राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री ललित माहेश्वरी ने राज्य सरकार के इस कदम की सराहना की कि पहली बार उसने महासंघ से रूबरू होकर उनकी समस्याओं पर गौर किया। इस मौके पर सतना, जबलपुर, बालाघाट, मंडला, डबरा और गाडरवारा जगहों के जहाँ चावल मिलें हैं, सभी मिलर्स मौजूद थे। राज्य सरकार की तरफ से प्रमुख सचिव खाद्य श्री अशोक दास, आयुक्त श्री अजीत केसरी तथा भंडार गृह निगम, भारतीय खाद्य निगम, राज्य विपणन संघ मंडी बोर्ड के आला और मैदानी अफसर भी मौजूद थे।

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Friday, October 9, 2009

अब मजूदरी मिलेगी हाट-बाजार में

रोजगार गारंटी योजना में ग्रामीणों की मजदूरी के लिये अब बीस किलोमीटर दूर नहीं जाना पड़ेगा। जिला योजना समिति की बैठक में प्रभारी मंत्री श्रीमती रंजना बघेल ने आज निर्देश दिये कि ग्रामीणों को निकट के हाट-बाजार में जाकर मजदूरी दी जाये।
बैंक खुद चलकर मजदूर के पास में जाये। विधायक विजय शाह ने खालवा ब्लाक के कुछ गांवों में बैंक की शाखा 20 किलोमीटर दूर होने पर आ रही दिक्कतों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया था।

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अब मजूदरी मिलेगी हाट-बाजार में

रोजगार गारंटी योजना में ग्रामीणों की मजदूरी के लिये अब बीस किलोमीटर दूर नहीं जाना पड़ेगा। जिला योजना समिति की बैठक में प्रभारी मंत्री श्रीमती रंजना बघेल ने आज निर्देश दिये कि ग्रामीणों को निकट के हाट-बाजार में जाकर मजदूरी दी जाये।
बैंक खुद चलकर मजदूर के पास में जाये। विधायक विजय शाह ने खालवा ब्लाक के कुछ गांवों में बैंक की शाखा 20 किलोमीटर दूर होने पर आ रही दिक्कतों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया था।

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Thursday, October 8, 2009

समर्थन मूल्य पर धान और मोटा अनाज

प्रदेश में 15 अक्टूबर से धान और मोटे अनाज की खरीदी शुरू होने जा रही है। उपार्जन व्यवस्था का जायजा लेने तथा स्टॉक की गुणवत्ता और विषयांतर्गत अन्य निर्णय लेने के लिए हर जिले में प्रशासकीय समितियाँ गठित की जा रही हैं। इस समिति को खरीदी संबंधी सारे विवादों के अंतिम निराकरण का अधिकार भी होगा। उपार्जन की तैयारियाँ तेज कर दी गई हैं।
राज्य शासन के निर्देश के मुताबिक जिला प्रशासकीय समिति के अध्यक्ष संबंधित कलेक्टर या उनके प्रतिनिधि होंगे। इसके सदस्यों में उप पंजीयक या सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं, जिला या शाखा प्रबंधक भारतीय खाद्य निगम, प्रबंधक जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक, उप संचालक कृषि, जिला प्रबंधक म.प्र. राज्य सहकारी विपणन संघ, जिला प्रबंधक या शाखा प्रभारी म.प्र. राज्य भंडार गृह और लाजिस्टिक्स निगम तथा सचिव कृषि उपज मंडी शामिल रहेंगे।
अनुभाग स्तर पर खास दल
धान और मोटे अनाज के समर्थन मूल्य पर उपार्जन संबंधी निगरानी, सुपरवीजन आदि के लिए अनुभाग स्तर पर खास दल भी गठित किए जा रहे हैं। कलेक्टर द्वारा गठित होने वाले इन दलों में कृषि, राजस्व, सहकारिता, भारतीय खाद्य निगम और उपार्जन संस्था के प्रतिनिधि शामिल होंगे। ये दल खरीदी केन्द्रों का आकस्मिक निरीक्षण करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि वहाँ बिक्री के लिए आ रहा खाद्यान्न तयशुदा गुणवत्ता के मुताबिक ही खरीदा जा रहा है या नहीं। इनके जिम्मे क्रेता और विक्रेताओं के विभिन्न विवादों का निराकरण करना भी होगा।

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Friday, October 2, 2009

मोटे अनाज का उपार्जन 15 अक्टूबर से

प्रदेश में खरीफ साल 2009-10 में समर्थन मूल्य पर मोटे अनाज की खरीदी के लिए तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। उपार्जन का सिलसिला 15 अक्टूबर से शुरू होकर 15 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान धान, ज्वार, बाजरा और मक्का खरीदे जाएंगे। केन्द्र सरकार ने धान कॉमन के लिए 950 रुपए और धान “ए’’ ग्रेड के लिए 980 रुपए प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य घोषित किया है। मोटे अनाज में औसत अच्छी गुणवत्ता के ज्वार, बाजरा और मक्का के लिए समर्थन मूल्य 840 रुपए प्रति क्विंटल रहेगा।
उपार्जन एजेंसियाँ
धान का उपार्जन मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ और मध्यप्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के जिम्मे किया गया है। ज्वार, बाजरा और मक्का की खरीद सिर्फ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम करेगी। उन 11 जिलों में जहाँ धान की फसल प्रमुखत: पैदा की जाती है वहाँ उपार्जन के लिए दोनों एजेंसियों के बीच जिले बाँट दिए गए हैं। अन्य धान उत्पादन वाले जिलों में भी उपार्जन कार्य का युक्तिसंगत बंटवारा किया गया है।
कृषि साख सेवा सहकारी समितियाँ होंगी एजेंट
उपरोक्त दोनों उपार्जन एजेंसियों के लिए धान एवं मोटे अनाज के उपार्जन का काम संबंधित क्षेत्रों की कृषि साख सेवा सहकारी समितियों के जरिए होगा और ये बतौर एजेंट काम करेंगी। इनका मध्यप्रदेश सहकारी समिति अधिनियम 1960 के तहत पंजीबद्ध होना जरूरी होगा। जहाँ ये समितियां नहीं हैं वहां मार्कफेड से जुड़ी पंजीकृत विपणन सहकारी समितियाँ भी बतोर एजेंट धान खरीद सकेंगी। अन्य किसी समिति को यह अधिकार नहीं होगा।
खरीदी का लक्ष्य
धान खरीदी के लिए नागरिक आपूर्ति निगम और सहकारी विपणन संघ को 1-1 लाख मे. टन उपार्जन का लक्ष्य दिया गया है। इसी तरह 50 हजार मे. टन मक्का और ज्वार तथा बाजरा 5-5 हजार मे.टन खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। दोनों उपर्जान एजेंसियाँ इन लक्ष्यों के मुताबिक बारदाना, साख सीमा, भण्डारण और स्टॉफ का इंतजाम करेंगी। खरीदी केन्द्रों का निर्धारण कलेक्टरों की अध्यक्षता वाली समितियाँ करेंगी।
सिर्फ स्थानीय फसल और किसान को ही लाभ
समर्थन मूल्य पर धान तथा मोटे अनाज की खरीद केवल मध्यप्रदेश के किसानों और स्थानीय तौर पर उत्पादित फसल की ही होगी। इसी तरह खरीदी सीधे वास्तविक किसानों से होगी और बिचौलियों का दखल बिल्कुल नहीं रहेगा। संबंधित एजेंसियों और सारे संबंधित जिला कलेक्टरों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

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Tuesday, September 22, 2009

रबी का रकबा घटाने की आवश्यकता नहीं

कलेक्टर कृषि कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के प्रति अपना नजरिया बदलें तथा कृषि में प्रत्येक घटक का गहन अध्ययन कर अपनी कार्ययोजना बनाएं। मालवा क्षेत्र में इस वर्ष जितनी बारिश हुई है वह विगत दस वर्षों के औसत से ज्यादा कम नहीं है अत: रबी के रकबे में कमी करने की आवश्यकता नहीं है।
कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी पिछले दिनों उज्जैन में उज्जैन संभाग के सभी जिला कलेक्टरों, कृषि अधिकारियों एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की बैठक में समीक्षा कर रही थी। बैठक में बताया गया कि उज्जैन संभाग में इस वर्ष रबी सीजन में प्रमुख फसलों में गेहूँ 3 लाख हेक्टेयर में तथा चना 4 लाख 80 हजार हेक्टेयर में बोनी की जायेगी।
कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती चौधरी ने कहा कि निर्वाचन कार्यक्रम निरंतर चलते रहेंगे और आचरण संहिता भी समय समय पर लगती रहेगी इससे लक्ष्य आधारित कार्यक्रमों की पूर्ति पर प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने हिदायत दी कि किसी भी तरह के अनुदान का 10 रूपया भी यदि सरेण्डर होता है तो यह प्रबंधकीय खामी माना जाएगा।
श्रीमती चौधरी ने सभी कृषि अधिकारियों को हिदायत दी कि जिलों में रबी मौसम में शत प्रतिशत बीज उपचारित किए जाएं, साथ ही बीज प्रतिस्थापन के लिए योजना तैयार करते समय पिछले 5 वर्षों के आंकड़ों का अध्ययन कर योजना बनाई जानी चाहिए।
बैठक में उज्जैन संभाग के विभिन्न जिला कलेक्टरों ने कृषि विभाग से संबंधित उपयोगी सुझाव कृषि उत्पादन आयुक्त के समक्ष रखे।
मछुआरों को मत्स्य बीज उत्पादन के लिये भी प्रेरित करें
बैठक में मत्स्य पालन के संदर्भ में हुई विस्तृत चर्चा के दौरान कृषि उत्पादन आयुक्त ने जिला कलेक्टरों और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे वर्षाकाल के बाद ऐसे मौसमी तालाबों में जहाँ डेढ़ मीटर से तीन मीटर तक की गहराई का पानी उपलब्ध हो मछुआरों को मत्स्य पालन के लिये जरूरी सहायता सुलभ कराये।
उनहोंने बताया कि राज्य में आवश्यकता का केवल 65 प्रतिशत मत्स्य बीज का उत्पादन होता है तथा 35 प्रतिशत बीज बाहर से मंगाना पड़ता है। उन्होंने रतलाम जिले में घौलावड़, मंदसौर जिले में गांधीसागर तथा उज्जैन जिले में गंभीर बांध के निचले हिस्सों में हेचरी बनाकर मत्स्य बीज उत्पादन का कार्य शुरू किये जाने की प्रशंसा की।
पशुपालन कार्यक्रम के संदर्भ में हुई चर्चा के दौरान कृषि उत्पादन आयुक्त ने सहमति व्यक्त की कि वर्तमान में दुधारू पशुओं के लिए प्रचलित 56 हजार रूपये के इकाई मूल्य को संशोधित किया जाना चाहिए ताकि हितग्राहियों द्वारा उपयुक्त दुघारू पशुओं की खरीदी की जा सके। एम.पी.स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड की प्रबंध संचालक श्रीमती शिखा दुबे ने बताया कि संभाग में वर्तमान में 32 लाख 29 हजार 853 लीटर प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन होता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अधिक से अधिक दुग्ध उत्पादकों को दुग्ध संघ का सदस्य बनने के लिए प्रेरित किया जाए।
बैठक में पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव श्री मनोज गोयल, मध्य प्रदेश स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज़ डेव्हलपमेंट कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक डॉ. व्ही.एस. निरंजन सहित मध्यप्रदेश मत्स्य महासंघ की प्रबंध संचालक श्रीमती कंचन जैन और एम.पी.स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड की प्रबंध संचालक श्रीमती शिखा दुबे तथा उज्जैन संभाग के कमिश्नर श्री प्रेमचन्द मीना खासतौर उपस्थित थे।

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Sunday, September 20, 2009

हरित क्रांति की दिशा में पावर टिलर (मिनी ट्रेक्टर)

ताबड़तोड़ पावरटिलर (मिनी टेक्टर) वितरण करने के कृषि विभाग के कदम से शहडोल के गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले आदिवासियों की काश्तकारी में चमक लौट आई है और उनके लिए यह वरदान साबित हुए हैं। उनकी आथिर्क एवं सामाजिक हैसियत में सुधार आया है।
इस बदलाव की मिसाल बने हैं शहडोल जिले के दूरवतीर् और पिछड़े गांवों के 60 स्व-सहायता समूहों के 639 गरीब आदिवासी काश्तकार, जिनने पावर टिलर की मदद तथा अपनी मेहनत और लगन से अपनी फसल का उत्पादन दो गुना कर लिया है।
राज्य सरकार ने तकनीकी दक्षता वाले पावर टिलर देकर हताश गरीब आदिवासी काश्तकारों को नई रोशनी दी है। इसे अपने खेतों में चलाकर आदिवासी काश्तकार बिना किसी लागत के अपने खेतों की जुताई और फसलों की मचाई कर सकते हैं।
पावर टिलर का खेतों में प्रचलन बढ़ने से निश्चित रूप से आदिवासी काश्तकार समूहों का कारोबार बढ़ा है। इन काश्तकारों के समूहों में जैसिंहनगर के खुशरबा के एक ज्वालामुखी स्व-सहायता समूह के आठ काश्तकार सदस्यों के 30 एकड खेतों में जुताई होती है। समूह के अध्यक्ष श्री मानसिंह बताते हैं कि पहले बैलों से चार एकड़ में जुताई करने पर पन्द्रह-बीस दिन का समय लग जाता था।
पर अब पावर टिलर से एक ही दिन में जुताई हो जाती है। साथ ही दूसरों के खेतों में जुताई करने और खाद, मिट्टी, ईटों की ढुलाई करने से अतिरिक्त आमदनी भी हो जाती है।
खेतों में जुताई और मचाई करने तथा काश्तकारों की बेहतरी के लिए कृषि लागत व समय बचाने के साथ पावर टिलर अन्य तरीकों से कमाई का उपयुक्त माध्यम भी बन रहे हैं। इससे इन काश्तकारों के खेतों की माटी गुलजार हो गई है। आमतौर पर साधनांे के अभाव में गरीब काश्तकार बैलों से ही खेतों में जुताई करते थे। असिंचित क्षेत्र में सिर्फ एक ही फसल ले पाते थे।
इस एक फसल में भी उत्पादन कम होने से जो मिला उसी से काम चलाना पड़ता था। गुजरबसर के लिए उन्हें दूसरों के यहां दिहाड़ी मजदूरी करनी पड़ती थी। जिले के छत्तीसगढ़ की सीमा पर बसे गांव बरगवां के पन्द्रह सदस्यीय सिंह वाहिनी स्व-सहायता समूह के अध्यक्ष बिहारी पाव बताते है कि पहले बैलों से खेतों में जुताई करने से उतना उत्पादन नहीं हो पाता था। लिहाजा दूसरों के यहां मजदूरी करके आजीविका चलानी पड़ती थी। अब पावर टिलर से खेतों में उत्पादन दो गुना हो जाने से आय बढ़ गई है। पावर टिलर का अन्य कार्यो में भी उपयोग होने से आमदनी बढ़ गई है। उन्हें अब दूसरों के यहां मजदूरी करने नहीं जाना पड़ता।
गरीब आदिवासी काश्तकारों की बेहतरी के लिए जिले में 60 स्व-सहायता समूहों के 639 काश्तकारों को 95.28 लाख रूपये के अनुदान पर 60 नग पावरटिलर अब तक दिए जा चुके हैं। इनके साथ ट्राली, कैजव्हील, सीडड्रिल आदि भी दिए गए हैं। इससे इनने स्वयं की 1752 एकड़ भूमि पर जुताई कर आमदनी बढ़ाई है। ये अन्य काश्तकारो की करीब 1800 एकड़ भूमि पर भी जुताई कर कमाई कर रहे हैं।
जब ये बैलों से जुताई करते थे तो खाद, बीज आदि की समय पर व्यवस्था नहीं कर पाते थे। साथ ही खेतों की जुताई, मताई (मचाई) कार्य समय पर तथा अच्छे तरीके से नहीं कर पाने के कारण बोआई व रोपाई कार्य में भी प्राय: देरी हो जाया करती थी, जिससे गरीब आदिवासी काश्तकार अधिकतम मात्र तीन-चार क्विं0 प्रति एकड़ धान का औसत उत्पादन ही ले पाते थे।
पर अब यही उत्पादन बढ़कर छ:-सात क्विं0 प्रति एकड़ हो गया है। धान की उपज भी बढ़कर दो गुनी हो गई हैं, जिससे उन्हें चार-पांच हजार रूपये प्रति एकड़ अतिरिक्त आय अजिर्त हो रही है। जिनके यहां सिंचाई के साधन है, वे अब दो फसलें ले रहे हैं। इन 60 स्व-सहायता समूहों के 639 काश्तकारों को 1752 एकड़ जमीन पर धान की खेती करने पर 25 से 30 लाख रूपये की अतिरिक्त आय होने से उनके जीवन में खुशहाली आ गई है।
हरित क्रांति के संवाहक बने हुए पावरटिलर की उपयोगिता के बार में शहडोल के उपसंचालक कृषि श्री के.एम. टेकाम कहते हैं कि पावरटिलर के इस्तेमाल से गरीब आदिवासी काश्तकारों की माली हालत में सुधार हो रहा है। वे अब अच्छी खेती कर रहे हैं और दूसरों के यहां किराए पर पावर टिलर देकर भी आमदनी कर रहे हैं। और भी जरूरतमंद गरीब आदिवासी काश्तकारों को अनुदान पर पावरटिलर मुहैया कराए जाएगें।

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क्षति आंकलन सर्वे में कोई भी प्रभावित नहीं छूटे- मंत्री श्री बिसेन

हाल ही में जिले में अतिवृष्टि व बाढ़ के कारण हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी व सहकारिता मंत्री तथा नरसिंहपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन ने शुक्रवार को गाडरवारा अंचल के सांईखेड़ा के समीपी करीब एक दर्जन से अधिक गांवों का सघन भ्रमण किया।
उन्होंने अतिवृष्टि से प्रभावित लोगों से रूबरू चर्चा की, उनका हाल जाना और आवेदन लिये। इस मौके पर श्री बिसेन ने जिला प्रशासन को निर्देशित किया कि अतिवृष्टि व बाढ़ से फसलों, रहवासी मकानों व अन्य प्रकार के नुकसान का आंकलन नियमानुसार तत्परता से किया जावे और यह सुनिश्चित हो कि इस सर्वे से कोई भी प्रभावित व्यक्ति नहीं छूटे। क्षति का आकलन वास्तविक तथ्यों के आधार पर किया जावे और किसी भी प्रभावित के साथ नाइन्साफी नहीं हो।
प्रभारी मंत्री ने भ्रमण के दौरान कहा कि क्षति के आंकलन में उदारता बरती जावे और राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के प्रावधानों के तहत प्रभावितों को उनके नुकसान की भरपाई के लिए नियमानुसार अधिकतम मुआवजा दिया जावे। अतिवृष्टि से हुई क्षति के आकलन में कोई भी कोताही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। उन्होंने तत्संबंध में मिलने वाली शिकायतों का निराकरण तत्परता से करने के निर्देश जिला कलेक्टर को दिये।
श्री बिसेन ने कौंड़िया, गाडरवारा, कामती, देवरी, सांईखेड़ा, पीपरपानी-सोनादहार, बंधा, तूमड़ा, संसारखेड़ा-झिकोली, मेहरा गांव, मुआंर, सिरसिरी, टेकापार, पिपरिया कलां, मड़गुला, बम्हौरीकला, बेलखेड़ी आदि ग्रामों का भ्रमण किया और अतिवृष्टि से हुए नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने करेली बस्ती समेत अन्य गांवों में भी लोगों की समस्याओं की जानकारी ली।
भ्रमण के दौरान श्री बिसेन ने पीपरपानी में हाईस्कूल शुरू करने और टेकापार में नलजल योजना स्वीकृत करने की घोषणा की। उन्होंने तूमड़ा में हायर सेकेण्ड्री स्कूल शुरू करने के प्रस्ताव को शासन स्तर से स्वीकृति दिलाने के लिए आश्वस्त किया। श्री बिसेन ने करपगांव के एक मरीज श्री रमेश चौकसे के इलाज के लिए 5 हजार रूपये की नगद राशि गाडरवारा में प्रदान की। उन्होंने निराश्रित पेंशन भुगतान में विलम्ब की जानकारी पर तूमड़ा में बताया कि पेंशन की राशि जनपद पंचायत में आ चुकी है और बढ़ी हुई दर पर पेंशन का भुगतान शीघ्र किया जायेगा।
श्री बिसेन ने कहा कि जिले के सर्वांगीण विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी जायेगी, तेन्दूखेड़ा क्षेत्र के सभी ऐसे गांव जो सड़कों से नहीं जुड़े हैं और जो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में भी शामिल नहीं हैं, उन गांवों में डब्ल्यु. बी.एम. सड़कें बनाई जायेंगी। ऐसे गांवों को चिन्हित कर आवश्यक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये गये हैं।
उन्होंने कहा कि विकास की दिशा में कोई भेदभाव नहीं किया जायेगा और चहुँमुखी विकास के लिए सभी आवश्यक कदम उठाये जायेंगे ताकि मध्यप्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप स्वर्णिम मध्यप्रदेश का मार्ग प्रशस्त हो सके। उन्होंने सर्वांगीण विकास में सहयोग के लिए आम जनता से आव्हान किया। श्री बिसेन ने सभी वर्गों के कल्याण के लिए चलाई जा रहीं मध्यप्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री बिसेन ने बताया कि जमीन में काफी गहराई से पानी निकालने के उद्देश्य से इस साल 20 मशीनें खरीदी जायेंगी, इसके पहले प्रदेश में केवल 12 मशीनें ही थी। तूमड़ा के समीप एन.टी.पी.सी. के थर्मल पावर प्रोजेक्ट की स्थापना के बारे में कहा कि आस-पास के गांवों के लोगों की शंकाओं का समाधान किया जायेगा। इस मौके पर विधायक श्री भैयाराम पटैल व पूर्व विधायक श्री गोविंद सिंह पटैल ने भी सम्बोधित कर स्थानीय जरूरतों की ओर ध्यान आकृष्ट किया।

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Saturday, September 19, 2009

वन विभाग द्वारा इस वर्ष पौध रोपण में बांस को प्राथमिकता

वन विभाग द्वारा इस वर्षा ऋतु में वन समितियों के माध्यम से बांस रोपण के विशेष प्रयास किये गये है। वन अनुसंधान और विस्तार की रोपणियों में तैयार किये गये पौध प्रथम आवे, प्रथम पावें के आधार पर जन साधारण विशेषकर ग्रामीणों को उपलब्ध कराये जा रहें है।
उल्लेखनीय है कि ग्रीन गोल्ड के रूप में विख्यात बांस सबसे तेजी से बढ़ने वाला तथा उत्पादकता देने वाला वृक्ष है। प्रदेश की वन समितियों द्वारा अपने कार्यक्षेत्र में सदस्यों के माध्यम से बांस के पौधे तथा राइजोम के रोपण का कार्य किया जा रहा है। वन समितियों द्वारा मांगे जाने पर पांच रूपये प्रति पौधे की दर से बांस के पौधे तथा एक रूपये प्रति राइजोम की दर से रोपण योग्य राइजोम वन अनुसंधान रोपणियों में उपलब्ध कराये जा रहे है।
प्रदेश के शिक्षण संस्थानों तथा शासकीय विभागों को न लाभ न हानि के आधार पर निर्धारित दर पर पौधे उपलब्ध करायें जा रहे है। इस वर्ष भारत सरकार रक्षा मंत्रालय के अधीन संस्थानों के पास उपलब्ध स्थलों पर रोपण का कार्य पर्यावरण वानिकी के तहत करने का प्रावधान रखा गया है। इसके लिये संबंधित संस्थान के नियत्रणकर्ता अधिकारी को इन पौधो के रोपण तथा सुरक्षा के दायित्व का वचन पत्रा देना होगा।

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Friday, September 18, 2009

इंदौर संभाग में रबी सीजन में 6.89 लाख हेक्टेयर फसल लेने का कार्यक्रम

इंदौर संभाग में रबी में उत्पादन बढ़ाने की कार्य योजना बनायी जायेगी, इसमें अलग-अलग फसल और भूमि के अनुसार योजना बनायी जायेगी। इंदौर संभाग में रबी के मौसम में 6 लाख 89 हजार हेक्टेयर में फसल लेने का कार्यक्रम तैयार किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक है।
खरीफ में इस वर्ष संभाग में 20 लाख 8 हजार हेक्टर क्षेत्र में बोनी की गयी है। यह जानकारी इंदौर में गुरुवार को कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित रबी के प्रस्तावित कार्यक्रम की समीक्षा बैठक में दी गयी।
कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती चौधरी ने कहा कि संभाग में कृषि उत्पादन बढ़ाने की रणनीति बनाई जाये, जिसमें भूमि एवं जल प्रबंधन, बीज प्रतिस्थापन, सिंचाई प्रबंधन, पौध संरक्षण और उन्नत कृषि यंत्र प्रबंधन को शामिल किया जाये। उन्होंने निर्देश दिये कि प्रत्येक जिले में समन्वित जिला कृषि विकास योजना कलेक्टर अपने मार्गदर्शन में बनवायें।
उन्होंने अधिकारियों को राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना में भूमि और जल प्रबंधन के तहत खेत सुधार योजना पर अधिक से अधिक काम कराने के लिये कहा। अधिकारीगण प्रत्येक जिले में जल संसाधनों की क्षमता का वास्तविक आंकलन करें। क्रेडिट प्लान के तहत सभी लघु और सीमांत किसानों को सहकारी समिति का सदस्य बनाने के लिये विशेष मुहिम चलायी जाये। जिला स्तर पर फसलों की इकाई लागत का पुनर्निधारण किया जाये।
समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव कृषि श्री आई.एस. दाणी ने कहा कि प्रत्येक जिले में बीज उत्पादन कार्यक्रम चलाया जाये, प्रत्येक जिला बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बने। सभी जिलों में भूमि उर्वरकता का नक्शा बनाया जाये। रबी में बीज ग्राम योजना का क्रियान्वयन प्राथमिकता से कराया जाये। बैठक में संचालक कृषि डॉ. डी.एन. शर्मा ने रबी की तैयारियों की जानकारी दी। संभाग के जिलों के कलेक्टर ने अपने-अपने जिले में रबी के बारे में तैयारियों तथा विभिन्न समस्याओं की जानकारी दी।
उद्यानिकी का क्षेत्र तथा उत्पादन बढ़ाने के प्रयत्न किये जायें
महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु तथा आन्ध्र प्रदेशों में छोटे किसान भी फल, फूल, सब्जी, मसालों की बेहतरीन खेती कर रहे हैं। ये फसलें कम वर्षा वाले क्षेत्रों तथा अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों में भी प्रयास पैदा की जा रही हैं। इंदौर संभाग में भी किसानों का ध्यान आकर्षित कर उद्यानिकी का क्षेत्र और उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किये जायें।
कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी ने इंदौर संभाग में उद्यानिकी फसलों की स्थिति की समीक्षा की। कृषि उत्पादन आयुक्त ने बैठक में उद्यानिकी सहित पशु पालन, डेयरी, कुक्कुट तथा मछली पालन की समीक्षा की।
बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश में उद्यानिकी का रकबा पांच लाख हेक्टेयर से बढ़ कर साढ़े सात लाख हेक्टेयर हो गया है।
इसे बढ़ाकर सम्पूर्ण कृषि क्षेत्र का 10 प्रतिशत करने का लक्ष्य है जो करीब 12 लाख हेक्टेयर होता है। इंदौर संभाग के बारे में बताया गया कि यहां के जिलों में एक लाख 53 हजार 452 हेक्टेयर में फल, सब्जी, मसाला, पुष्प, औषधियों की खेती होती है। संभाग में इनका उत्पादन 31 लाख 92 हजार मीट्रिक टन है। श्रीमती चौधरी ने इंदौर सहित संभाग के अन्य शहरी क्षेत्रों से क्षेत्र में किसानों की आर्थिक स्थिति सुधार की दृष्टि से सब्जी की खेती पर ध्यान देने के निर्देश दिये। इंदौर के आसपास 2646 हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जी का उत्पादन होता है।
बैठक में प्रमुख सचिव पशुपालन, श्री मनोज गोविल, आयुक्त सहकारिता श्री विश्वमोहन उपाध्याय, डेयरी फेडरेशन, एम.पी. एग्रो, कुक्कुट विकास निगम, राज्य बीज निगम के प्रबंध संचालक, संभाग के जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

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Thursday, September 17, 2009

नरेगा से किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने की योजना पर काम शुरू

मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना से सिंचाई का पानी किसानों के खेतों तक पहुंचाने के लिए नालियों (वॉटर कोर्स एवं फील्ड चैनल) को बनाने की योजना का लाभ किसानों को मिलने लगा है। किसान बेहद उत्साह से इस योजना का लाभ उठाने में जुट गए है।
अभी तक नहर से अपने खेतो तक पानी पहुंचाने के लिए किसान स्वयं मशक्कत करते थे, क्योकि नहर से अपने खेत तक पानी ले जाने का काम किसान को खुद करना पड़ता था। अब यह कार्य किसानों की चुनी हुई जल उपभोक्ता संथाओं के माध्यम से हो रहा है। यह संथा किसानों की सहमति से एक-एक खेत तक नालियों (फील्ड चैनल एवं वॉटर कोर्स) का निर्माण कर रही है।
रीवा जिले की गोविन्दगढ़ जल उपभोक्ता संथा के 10 गांवों के 110 किसानों के खेतों तक नालियां का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। संथा कुल 47 लाख रू की लागत से 8 नालियों के माध्यम से लगभग 58 हैक्टेयर क्षेत्र के खेतों तक सिंचाई जल पहुंचाने का कार्य कर रही है।
इसमें से 19 लाख रू लागत के कार्य पूर्ण हो चुके है। संथा अध्यक्ष श्री चंडिकेश्वर सिंह तिवारी ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना से वॉटर कोर्स बनाने का काम शुरू होने से अंतिम छोर के किसान को सही समय पर सही मात्रा में पानी मिलेगा। इससे पानी की भी बचत होगी और विवाद भी नही होंगे।
इसके पूर्व किसानों के बीच अपने खेतों तक पानी पहुंचाने का रास्ता बनाने और पानी लेने का क्रम तय करने में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती थी। संथा के सक्षम प्राधिकारी भी पवन कुमार तिवारी ने बताया कि तीन पक्की और 5 कच्ची लगभग बीस हजार मीटर लम्बी नालियों का निर्माण किया जाएगा।
Justify Fullमध्यप्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के माध्यम से कृल रू 1264 करोड़ राषि से म.प्र. जल संसाधन विभाग के द्वारा सिंचाई योजनाओं में विभिन्न रोजगारमूलक कार्य किए जाएंगे। जिनमें फील्ड चैनल और वॉटर कोर्स निर्माण भी शामिल है।

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प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिये 3130 गांवों का चयन

प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिये किसान कल्याण विभाग द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। किसानों को जैविक खेती के फायदे एवं उनकी विधियों को बताने के लिये प्रत्येक विकासखण्ड में आदर्श खेतों की पहचान की गई है। इन खेतों में कृषि विभाग की मदद से जैविक खेती के नये-नये कार्यक्रम हाथ में लिये गये हैं।
प्रदेश के प्रत्येक विकासखण्ड में 10 गांव के हिसाब से 3130 गांवों का चयन किया गया है। इन गांवों में पांच-पांच कृषकों का चयन कर आने वाले तीन वर्षों वर्ष 2011 तक प्रत्येक गांव में औसतन 75 कृषक जैविक खेती कार्यक्रम से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जैविक खेती के अंतर्गत किसानों के खेतों पर विभिन्न कार्यक्रम लिये जा रहे हैं। उनमें नाडेप कंपोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, बॉयोगैस निर्माण एवं खाद बनवाने को प्रोत्साहन, जैव उर्वरकों जैसे राइजोवियम, पी.एस.बी., नीली-हरी काई कल्चर के उपयोग को बढ़ावा देना, हरी खाद वितरण, फसल अवशेष प्रबंधन यांत्रिकीय उपकरण प्रदर्शन को बढ़ावा, जैविक कीटनाशी नीम, फोरोमेनट्रेप के उपयोग को प्रोत्साहन आदि शामिल हैं। जैविक आदानों को कृषकों को सुलभ कराने के लिये विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत किसान कल्याण विभाग द्वारा अनुदान भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
प्रदेश में जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण हेतु मध्यप्रदेश राज्य जैविक प्रमाणीकरण संस्था की स्थापना की गई है, ताकि किसानों को जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण की सुविधा सरल एवं कम दर पर उपलब्ध हो सके।

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Wednesday, September 16, 2009

म.प्र. से कृषि उत्पादों एवं प्रसंस्करित खाद्य पदार्थों के निर्यात की अपार संभावनायें

म.प्र. राज्य से कृषि उत्पादनों एवं प्रसंस्करित खाद्य पदार्थों की अपार संभावनायें हैं। जिसके लिये किसानों को अच्छे बीज, उर्वरक, दवायें उपलब्ध कराने के साथ आवश्यक तकनीकी ज्ञान एवं मार्गदर्शन प्रदान करना आवश्यक है। इस आशय के उद्गर आज यहाँ संसाधन केन्द्र विश्व व्यापार संगठन प्रशासन अकादमी भोपाल द्वारा फेडरेशन आफ एम.पी.चेम्बर्स आफ कामर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज के सहयोग से 'कृषिगत/प्रसंस्करित खाद्य पदार्थों के म.प्र. से निर्यात पर विश्व व्यापार संगठन का प्रभाव विषय' पर आयोजित संगोष्ठी में विभिन्न वक्ताओं ने व्यक्त किये। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री संजय बागची, पूर्व सलाहकार डी.जी. गेट ने की।
प्रारंभ में आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन अकादमी के महानिदेशक डॉ. संदीप खन्ना ने संगोष्ठी में उपस्थित अतिथियों एवं अन्य लोगों का स्वागत किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संगोष्ठी के माध्यम से प्राप्त जानकारी से म.प्र. के किसानों को लाभ मिलने के साथ ही केन्द्रीय सेवाओं के प्रशिक्षणरत अधिकारी भी लाभांवित होंगे।
अध्यक्ष श्री बागची ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुये जानकारी दी कि विश्व व्यापार संगठन के कतिपय अनुबंध भारत को लाभ पहुँचाने वाले है। जिसके कृषि से संबंधित अनुबंधों में कृषि आधारित उत्पादों को प्रोत्साहित कर स्वस्थ स्पर्धा को बढ़ावा प्रदान करते हैं। जिससे राष्ट्रीय सदस्यों की विश्व बाजार में पहुँच सुधार हो सके। उन्होंने बताया कि भारत में मानसून के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित होता है जिससे देश का व्यापार भी प्रभावित होता है।
उन्होंने कहा कि म.प्र. सहित देश के अन्य भागों में उत्पादित शीघ्र नष्ट होनें वाले पदार्थों के निर्यात हेतु प्रशीतन व्यवस्था के साथ तीव्रगामी परिवहन की व्यवस्था आवश्यक है। श्री ओ.पी गोयल पूर्व अध्यक्ष सोपा (सोयाबीन-आयल प्रोडक्शन एसोशियेसन) ने बताया कि म.प्र. से विभिन्न कृषि उत्पादों के निर्यात की काफी संभावनायें हैं।
जिसके बारे में आवश्यक तकनीकी ज्ञान एवं मार्गदर्शन किसानों को देनी की आवश्यकता है। इसके साथ ही किसानों को अच्छा बीज, उर्वरक दवायें भी कम कीमत पर उपलब्ध करानें की जरूरत है। उन्होंने कहा कि म.प्र. में 22 प्रजाति के गेहूँ की पैदावार किसानों द्वारा ली जाती है। यदि गेहूँ की विभिन्न प्रजाति की पैदावार का सही प्रकार संग्रहण किसान करनें लगे तो उसका निर्यात आसानी से संभव हो सकेगा।
इसी प्रकार प्रदेश में उत्पादित कपास की निर्धारित गुणवत्ता बनाये रखकर उसके निर्यात से ज्यादा आमदनी किसानों को हो सकती है। म.प्र. सोया उत्पादों का एक बड़ा निर्यातक है। प्रदेश में उत्पादित सब्जी एवं फलों का निर्यात भी विदेशों को किया जा सकता है। श्री गोयल ने बताया कि पंजाब के किसानों को नयी तकनीक एवं अच्छा बीज उपलब्ध कराने से टमाटर की पैदावार किसानों द्वारा प्रति हेक्टर 5 टन से बढ़ाकर 20 टन तक ली जानें लगी है। उन्होंने म.प्र. के किसानों को प्रोसेंसिंग आफ फुड प्रोडक्शन की जानकारी देने की बात कही।
जे.एन.एल.आई.यू भोपाल के श्री सी. राजशेखर ने अंर्तराष्ट्रीय व्यापार संगठन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। श्री विजय भटनागर, ईडीईएफटी भोपाल ने निर्यात की विभिन्न नियम प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी। श्री शिवेन्द्र श्रीवस्तव मुख्य वन संरक्षक ने म.प्र. में पैदा होने वाली विभिन्न लघु वनोपजों के निर्यात पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत की जैव-विविधता काफी समृद्ध है।
उन्होंने इण्डियन बायोडायवर्सिटीज एक्ट तथा म.प्र. बायोडायवर्सिटीज बोर्ड के बारे में जानकारी देने के साथ पेटेंट के बारे में भी बतलाया। श्री के.के. तिवारी, पूर्व मुख्य महानिदेशक म.प्र. कृषि उद्योग निगम ने कृषि व्यापार की नई संभावनायें एवं कृषि प्रक्षेत्रों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मुख्य कार्यकारी अधिकारी, संसाधन केन्द्र विश्व व्यापार संगठन श्री व्ही.एस. शर्मा ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर केन्द्रीय सिविल सेवा में चयनित अधिकारी, विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित थे।

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Friday, September 11, 2009

वायदा सौदों से अलग करें खाद्यान्न सामग्री

तेजी से बढ़ रही महंगाई के मद्देनज़र खाद्य आपूर्ति राज्य मंत्री श्री पारसचंद्र जैन ने प्रदेश की तरफ से चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को चिट्ठी लिखी है। इसकी रोकथाम का एक कारगर नुस्खा सुझाते हुए उन्होंने कहा है कि ऑन लाईन वायदा सौदों से खाद्यान्न सामग्री को जितनी जल्दी हो अलग कर दें। इसका सीधा खामियाजा देश के आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
राज्य मंत्री श्री जैन ने चिट्ठी में साफ किया है कि केन्द्र महंगाई पर यदि वास्तविक नियंत्रण चाहता है तो उसे कमॉडिटी टर्मीनल वायदा सौदों के बाज़ार से खाद्यान्न वस्तुओं को पूरी तरह मुक्त कर देना चाहिए। उन्होंने आशंका व्यक्त की है कि वायदा सौदों के छद्म व्यापारियों (सटौरियों) का इस शक्ल में होने वाला दखल खाद्यान्न वस्तुओं के मूल्यों पर केन्द्र के नियंत्रण को खत्म कर देगा।
मौजूदा हालात में जबकि महंगाई सिर चढ़ कर बोल रही है आगे यह और विकराल हो जाएगी। श्री जैन ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि आज संकट की घड़ी में इस प्रयोग को अंजाम देना देश के आम लोगों के हित में एक अच्छी कोशिश साबित होगा, इसलिए इस पर जल्द फैसला जरूरी है।
कम उत्पादन के ढिंढौरे से बढ़ेगी मुनाफाखोरी
प्रदेश में शक्कर की मुनाफाखोरी और ज़माखोरी पर लगाम कसी जाने के प्रयासों के बीच आज खाद्य आपूर्ति राज्य मंत्री श्री पारसचंद्र जैन ने केन्द्र के कथित नेताओं के उन हालिया बयानों पर सख्त ऐतराज जताया है जिनमें शक्कर और दालों के कम उत्पादन का ढिंढौरा पीटा गया है।
उन्होंने कहा है कि इससे मुनाफाखोर इन चीजों को बाज़ार से गायब करने के लिए प्रवृत्त होंगे। खाद्यान्न वस्तुओं के लगातार बढ़ते दामों पर तो ऐसे बयान आग में घी का काम करेंगे। श्री जैन ने आशंका जताई है कि पिछले दिनों एक ऐसे ही बयान में कि देश की जरूरत के मान से इस साल 41 लाख मे.टन शक्कर कम उत्पादित हुई है, चीनी मिलों को शक्कर दबाने का मौका मिला है।
इसका सबूत यह है कि बाज़ार में चीनी की आवक कम हुई है और भाव आसमान छूने लगे हैं। राज्य मंत्री ने साफ किया है इन मिलों के पास जो शक्कर है वह पुराने भाव की है, लेकिन अब वे ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में इसे बेच नहीं रहे हैं।
राज्य मंत्री श्री जैन ने कहा है कि मध्यप्रदेश को केन्द्रीय पूल की अधिकांश शक्कर महाराष्ट्र से मिलती है। इस हिसाब से अब महाराष्ट्र की शक्कर मिलों ने प्रदाय कम कर दिया है और इसके चलते प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की शक्कर का वितरण भी गड़बड़ा गया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने विशेष कोशिशों के जरिए शक्कर और दालों के भाव थामने की तत्परता दिखाई है और इसके नतीजे में आज भी अन्य राज्यों की तुलना में इनके भाव यहां कम हैं, लेकिन वक्त-बेवक्त दिए जाने वाले बयान इन कोशिशों पर भी असर डालेंगे। उन्होंने केन्द्र सरकार से आग्रह किया है कि बढ़ती महंगाई रोकने के लिए वह कोई सार्थक काम जल्द अंजाम दे।

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Thursday, September 10, 2009

छिन्दवाड़ा में संतरे की पैदावार बढ़ाने के लिये कार्ययोजना

छिन्दवाड़ा जिले में संतरे की पैदावार बढ़ाने के लिए एक कार्ययोजना तैयार की गई है। कार्ययोजना के क्रियान्वयन के संबंध में पिछले दिनों कलेक्टर श्री निकुंज कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में बैठक सम्पन्न हुई।
बैठक में कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि संतरा पौधों के वितरण कार्य का विभागीय अधिकारी शत-प्रतिशत सत्यापन कराए। अधिकारियों को संतरों के बगीचों के फोटोग्राफ करवाने की भी हिदायत दी गई।
इस वर्ष 30 लाख रूपये की लागत से बनने वाले सामुदायिक जल स्त्रोतों का निर्माण के लिये हितग्राहियों के चयन की प्रक्रिया शीघ्र पूरा करने के लिये कहा गया। बैठक में सहायक संचालक उद्यान ने इस वर्ष उद्यानिकी के अंतर्गत भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्यों की जानकारी दी।

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Wednesday, September 9, 2009

रासायनिक उर्वरक का विकल्प "नाडेप कम्पोस्ट"

प्रदेश में किसानों को जैविक खेती की और लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश को जैविक प्रदेश के रूप में पहचान दिलाने के लिये एक जन अभियान किसान कल्याण विभाग द्वारा छेड़ा हुआ है।
अधिकतर कृषक मनमाने तरीके से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कर रहे हैं, परिणाम स्वरूप खेतों की मृदा संरचना खराब हो रही हैं तथा उत्पादन स्थिर हो गया है। इस कमी को दूर करने के लिये 'नाडेप कम्पोस्ट' कारगर उपाय है।
महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के ग्राम पुसर के नारायण देवराज पण्डरी पांडे ने नाडेप कम्पोस्ट की नयी विधि विकसित की है। नाडेप कम्पोस्ट प्रदूषण मुक्त एवं रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में खेतों के लिये अच्छी खाद सिद्ध हुई है।
यह भूमि में रासायनिक उर्वरकों से उत्पन्न विकारों को दूर करने के साथ-साथ मृदा संरचना को भी सुधारती है। कम से कम गोबर का उपयोग करके अधिक से अधिक खाद बनाने की यह उत्तम पद्धति है। इस पद्धति द्वारा एक गाय के वार्षिक गोबर से 80 से 100 टन यानि लगभग 150 गाड़ी खाद बनाई जा सकती है।
इस खाद में नत्रजन 0.5 से 1.5 प्रतिशत, स्फुर 0.5 से 0.9 प्रतिशत, पोटाश 1.2 से 1.4 प्रतिशत व इसके अतिरिक्त अन्य सूक्ष्म मृदा पोषक तत्व भी पाये जाते हैं।
नाडेप खाद तैयार करने के लिये तीन प्रकार के नाडेप टांका बनाये जा सकते हैं। पक्के नाडेप टांका, कच्चे नाडेप टांका तथा भू नाडेप टांका। आकार में टांका 10 फीट लम्बा, 6 फीट चौड़ा एवं 3 फीट ऊंचा बनाया जाना चाहिये। इस विधि से तैयार खाद परम्परागत तरीके से तैयार की गई खाद से 3 से 4 गुना अधिक प्रभावशाली है।
परम्परागत खाद से नींदा बढ़ते हैं । जबकि नाडेप कम्पोस्ट से नींदा में वृद्धि नहीं होती। क्यों कि नाडेप कम्पोस्ट में गर्मी के कारण नींदा बीजों की उगने की शक्ति नष्ट हो जाती है। नाडेप कम्पोस्ट के उपयोग से कृषक रासायनिक खाद एवं कीटनाशक दवाओं के दुष्परिणाम से बचेगा और विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।
नाडेप कम्पोस्ट पद्धत्ति सम्पूर्णतया अप्रदूषणकारी है व इसके उपयोग से फ्यूमिक एसिड बनने की प्रक्रिया में गति आती है जिसके फलस्वरूप पर्याप्त ह्मूमस बनने की प्रकिया भूमि की जीवंतता को बनाये रखती है।

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Saturday, September 5, 2009

मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के 150 दैनिक वेतनभोगी नियमित हुए


मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड में पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से कार्यरत 150 दैनिक वेतनभोगी की सेवाओं को नियमित किया गया है।
बोर्ड के ये वे दैनिक वेतन भोगी है जो लम्बे समय से अपनी सेवाओं के नियमितीकरण किये जाने की मांग कर रहे थे। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने इन कर्मचारियों के नियमित किये जाने के प्रस्ताव पर संवेदनशीलता पूर्वक विचार करते हुए अनुमोदन दिया है।
राज्य कृषि उपज मण्डी बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री विवेक अग्रवाल ने इन कर्मचारियों के नियमितीकरण किये जाने के लिये मण्डी बोर्ड के अधिकारियों की एक कमेटी गठित की थी। इस कमेटी ने प्रकरणों का परीक्षण करने के बाद नियमितीकरण का प्रस्ताव तैयार किया।
बोर्ड के जिन कर्मचारियों का नियमितीकरण किया गया है उनमें उपयंत्री 9, सहायक मानचित्रकार 1, स्टेनो टायपिस्ट 1, सहायक वर्ग-3 (बोर्ड सेवा) 11, भृत्य (बोर्ड सेवा) 17, सहायक उप निरीक्षक 40, सहायक वर्ग-3 मण्डी सेवा 12, इलेक्ट्रीशियन 3, वाहन चालक 2, भृत्य मण्डी सेवा 52 एवं दो सफाईकर्मी भी हैं। इन कर्मचारियों के नियमितीकरण के आदेश मण्डी बोर्ड द्वारा जारी कर दिये गये हैं।

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Friday, September 4, 2009

कृषि उत्पादन आयुक्त द्वारा परियोजनाओं को समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश

मध्यप्रदेश मण्डी बोर्ड की कृषि अनुसंधान एवं अधोसंरचना विकास निधि से अनुदान मंजूरी के लिये गठित समिति की 36वीं बैठक आज मण्डी बोर्ड मुख्यालय, भोपाल में अपर मुख्य सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में समिति द्वारा अब तक स्वीकृत लगभग 85 करोड़ रुपये की 45 परियोजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा की गई।
कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती चौधरी ने कहा कि सभी परियोजनाओं की सघन समीक्षा नियमित रूप से की जाये। यह सभी परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण हों। आज की बैठक में समिति के समक्ष 7 और नये प्रस्तावों पर विचार किया गया।
इनमें लघु वनोपज संघ भोपाल द्वारा रीवा में औषधीय एवं सुगंधीय पौधों के प्रशिक्षण, प्रसंस्करण, औद्योगिक विकास व हर्बल अवेयरनेस कार्यक्रम के विकास की परियोजना को मंजूरी दी गई। इस परियोजना की लागत लगभग 5.35 करोड़ रुपये है। बैठक में छिन्दवाड़ा वन मण्डल में औषधीय एवं सुगंधीय पौधों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिये परियोजना की शेष राशि जारी किये जाने पर भी स्वीकृति दी गई।
समिति द्वारा राजमाता विजयराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर के अधोसंरचना विकास पर होने वाले व्यय हेतु परियोजना पर भी विचार-विमर्श किया गया। बैठक में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर की पूर्व में स्वीकृत तीन परियोजनाओं की अवधि मार्च 2010 तक बढ़ाये जाने की स्वीकृति दी गई।
कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती चौधरी ने निर्देश दिये कि मण्डी बोर्ड द्वारा तलेगांव (पुणे) महाराष्ट्र के पैटर्न पर प्रायोगिक तौर पर एक ऐसी कार्ययोजना प्रदेश में भी तैयार की जाये जिसमें फ्लोरीकल्चर के विकास के लिये किसानों को स्थान आवंटित किया जा सके।
बैठक में प्रमुख सचिव किसान कल्याण, प्रबंध संचालक मण्डी बोर्ड, संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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Monday, August 31, 2009

प्रदेश के किसानों को गेहूं के समर्थन मूल्य पर प्रति क्विंटल 100 रूपये बोनस

मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने रबी मौसम 2009-10 के लिये गेहूं के समर्थन मूल्य पर प्रदेश के किसानों को 100 रूपये प्रति क्विंटल का बोनस देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने यह घोषणा आज सीहोर जिले के आष्टा तहसील मुख्यालय पर कृषि उपज मंडी के प्रांगण में राजमाता विजयाराजे सिंधिया की प्रतिमा अनावरण समारोह में की।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2008-09 के रबी मौसम में प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को गेहूं के समर्थन मूल्य पर प्रति क्विंटल 50 रूपये का बोनस दिया गया था। वर्ष 2009-10 के लिये रबी फसलों के समर्थन मूल्य केन्द्र सरकार द्वारा आगामी फरवरी माह में घोषित किये जायेंगे।
श्री चौहान ने कहा कि खेती को लाभदायी व्यवसाय बनाने की राज्य सरकार की प्राथमिकता के अंतर्गत प्रदेश में अनेक किसान हितैषी फैसले लिये गये हैं। वर्तमान में देश में मध्यप्रदेश पहला राज्य है जो किसानों को कृषि कार्यों के लिये तीन प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण मुहैया करवा रहा है।
कार्यक्रम में कृषि मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया, संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा, वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री गुरूप्रसाद शर्मा, राज्य भण्डार गृह निगम के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र सिंह राजपूत, मार्कफेड के अध्यक्ष श्री रमाकान्त भार्गव, स्थानीय विधायक श्री रणजीतसिंह गुणवान, सीहोर विधायक श्री रमेश सक्सेना और अन्य स्थानीय जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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ADMARK

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