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दीक्षांत समारोह

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Thursday, October 29, 2009

मांग के अनुरूप खाद बीज की आपूर्ति की जायेगी - कृषि विकास मंत्री

ग्रामीणों को जैविक खेती के लिये प्रोत्साहित करें
Bhopal:Wednesday, October 28, 2009:Updated 17:42IST किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा है कि प्रदेश में रबी सीजन में किसानों को खाद-बीज की कमी नहीं होने दी जायेगी। उन्होंने कृषि अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि वे किसानों को उनकी मांग के अनुरूप खाद-बीज की आपूर्ति सुनिश्चित करें। कृषि विकास मंत्री डॉ. कुसमरिया मंगलवार को भोपाल जिले के ग्राम बरखेड़ी अब्दुल्ला में किसानों से बातचीत कर रहे थे।
कृषि विकास मंत्री डॉ. कुसमरिया मंगलवार को आकस्मिक रूप से इस गांव में पहुंचे थे। उन्होंने कृषकों से फसलों की स्थिति एवं खाद एवं बीज की आपूर्ति के बारे में जानकारी प्राप्त की। कृषि विकास मंत्री ने कृषि अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे जिले के प्रत्येक गांव में ग्रामीणों को जैविक खेती के लिये प्रोत्साहित करें।
कृषकों ने कृषि मंत्री के समक्ष भोपाल की करोंद मण्डी में अनाज की नीलामी एवं भुगतान प्रक्रिया की दिक्कतों के बारे में बताया। करोंद मण्डी के सचिव श्री रोहणी चक्रवर्ती ने बताया कि इन दिनों करोंद मण्डी में आवक अधिक होने के कारण व्यस्तता ज्यादा बढ़ गई है।
मण्डी प्रशासन का प्रयास है कि व्यवस्थाओं में और सुधार कर किसानों को और बेहतर सुविधा दी जाये। उन्होंने बताया कि मण्डी में 50 नग इलेक्ट्रानिक तौल कांटे के लगे हुए हैं। किसानों को नीलामी के बाद उनकी अनाज के तत्काल भुगतान की व्यवस्था की गई है।
भोपाल संभाग के संयुक्त संचालक श्री डी.के. दुबे ने बताया कि अक्टूबर माह के प्रारंभ में हुई बारिश से इस वर्ष संभाग में रबी सीजन में 14 लाख 10 हजार हेक्टेयर के करीब बोनी की जायेगी। संभाग में गेहूँ 5 लाख 81 हजार हेक्टेयर में और चना 6 लाख 17 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बोया जायेगा।
संभाग में इस वर्ष 2 लाख 56 हजार 550 मेट्रिक टन फर्टिलाइजर के वितरण का कार्यक्रम तय किया गया है। अब तक 78 हजार मेट्रिक टन से अधिक फर्टिलाइजर का भण्डारण हो चुका है। किसानों को उनकी मांग के अनुसार 54 हजार मेट्रिक टन से अधिक फर्टिलाइजर का वितरण किया जा चुका है।
संभाग में किसानों की मांग के अनुरूप फर्टिलाइजर की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। किसानों को प्रमाणित बीज के बोने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों को 71 हजार क्विंटल से अधिक का प्रमाणित बीज वितरित किया जा चुका है। किसानों को प्रमाणित बीज पर अनुदान भी दिया जा रहा है।
कृषि मंत्री डॉ. कुसमरिया ने किसानों से बिजली आपूर्ति के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने ग्रामीणों को उन्नत नस्ल के दुधारु पशु पालन के लिये कहा।

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Wednesday, October 28, 2009

काल सेंटर के जरिये किसानों की समस्याओं का निराकरण

कॉल सेंटर में 30 कृषि विषय विशेषज्ञ कार्यरत
Bhopal:Tuesday, October 27, 2009:Updated 15:38IST कृषि विकास एंव किसान कल्याण विभाग द्वारा संचालित किसान कॉल सेंटर में इन दिनों प्रदेश भर के अंचलों से किसानों के रबी फसल की बुवाई के संबंध में फोन काल्स प्राप्त हो रहे हैं। किसान कॉल सेंटर में उपलब्ध कृषि विशेषज्ञ किसानों को रबी फसल की बुवाई एवं रबी फसलों की किस्मों के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
किसानों को इस कॉल सेंटर के जरिए पशुपालन, मछली पालन एवं उद्यानिकी विषयों से संबंधित सवालों के जवाब भी दिये जा रहे हैं। किसान कॉल सेंटर के जरिए पिछले एक वर्ष में लगभग एक लाख 85 हजार कॉल्स के माध्यम से किसानों की समस्याओं का निराकरण किया गया है।
किसान कॉल सेंटर में 30 कृषि विषय विशेषज्ञ कार्यरत हैं जो किसानों को कृषि से जुड़ी अन्य विषयों की आधुनिक तकनीकों की जानकारी किसानों को दे रहे हैं।
किसानों को खेती की अद्यतन एवं व्यवहारिक जानकारियां उपलब्ध कराये जाने के उद्देश्य से भोपाल के गंगोत्री भवन में इंडियन सोसायटी ऑफ एग्रीबिजनेस प्रौफेशनल्स (आईसेप) द्वारा सितम्बर 2008 से कॉल सेंटर का संचालन किया जा रहा है।
कॉल सेंटर की रिजनल कॉडीनेटर श्री सुरेश मोटवानी ने बताया कि पूरे भारत में प्रदेश स्तर पर एक अनूठा व एक मात्र कॉल सेंटर है जो प्रात: 7 बजे से शाम 7 बजे तक सातों दिन किसानों को नि:शुल्क सेवायें दे रहा है। किसान कॉल सेंटर में टोल फ्री नम्बर 1800-233-4433 है। इस नम्बर पर 15 लाईनें उपलब्ध हैं जिन पर एक साथ 15 कॉल्स एक साथ अटेंड किये जा सकते हैं।
इस कॉल सेंटर में एक सॉफ्टवेयर ऐसा भी तैयार किया गया है जिसमें आमतौर पर किसानों द्वारा पूछे जाने वाले एक जैसे सवालों के लिये उपयुक्त उत्तर तैयार कर रिकार्डेड कराया गया है। इस सॉफ्टवेयर में कीट नियंत्रण पर जानकारी का विशेष रूप से समावेश किया गया है।
प्रदेश के 9 जिले ऐसे हैं जिनमें वर्ष भर में 5 हजार से ज्यादा किसानों ने संपर्क किया है। इनमें बैतूल, छतरपुर, दतिया, राजगढ़, सागर, शाजापुर, शिवपुरी, टीकमगढ़ एवं विदिशा है। किसान कॉल सेंटर में वर्ष भर में 55 हजार सवाल किसानों के उद्यानिकी फसलों से संबंधित थे।
किसानों को टिशु कल्चर से केले की फसल लेने की तकनीक के बारे में भी जानकारी दी गयी। इस जानकारी से खण्डवा-बुरहानपुर बेल्ट में केले की फसल के उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है। किसान कॉल सेंटर में पशुपालन एवं मत्स्य पालन से संबंधित 9 हजार कॉल्स आये इनमें किसानों द्वारा उन्नत दुधारू पशुओं की नस्ल, टीकाकरण, पशु आहार, मत्स्य पालन आदि के बारे में जानकारी प्राप्त की गयी।
किसान कल्याण विभाग द्वारा क्षेत्रीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिये गये हैं कि वे किसानों को भोपाल में संचालित किसान कॉल सेंटर की अधिक से अधिक जानकारी दें, जिससे किसान अपनी समस्याओं का निराकरण विषय-विशेषज्ञ से सीधे कर सकें।

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Tuesday, October 27, 2009

किसानों और महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रयास जारी-श्री अग्रवाल

रामपुर कालोनी में शाला भवन लोकार्पित
Bhopal:Monday, October 26, 2009:Updated 19:16IST प्रदेश के सामान्य प्रशासन, नर्मदा घाटी विकास एवं विमानन राज्य मंत्री श्री के.एल.अग्रवाल ने कहाकि किसानों और महिलाओं के विकास के प्रति मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान की सकारात्मक सोच ने कृषि को फायदे का सौदा बनाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया है। इस दिशा में शासन प्रशासन ने मिलकर जो मंथन किया उसके शीघ्र ही अच्छे परिणाम प्रदेश में देखने को मिलेंगे।
राज्यमंत्री श्री अग्रवाल रविवार को विधानसभा क्षेत्र बमोरी के ग्राम म्याना एवं बमोरी मुख्यालय पर आयोजित किसान संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर जिला किसान मोर्चा के अध्यक्ष श्री बहादुर सिंह रघुवंशी, महामंत्री महाराजसिंह लोधा सहित बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधि एवं कृषकगण उपस्थित थे।
श्री अग्रवाल ने कहाकि किसानों को रवी फसल के पूर्व तकनीकी मार्गदर्शन देने और खाद बीज की उन्नत किस्मों से अवगत कराने के लिये पूरे प्रदेश में किसान संगोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। इन संगोष्ठियों में कृषि वैज्ञानिकों के माध्यम से उचित सलाह किसानों तक पहुंचाई जा रही है। साथ ही शासन द्वारा किसानों को उन्नतखेती के लिये उपलव्ब्ध कराई जाने वाली कृषि सामग्री का वितरण भी किया जा रहा है।
कार्यक्रम में कृषि विभाग द्वारा किसानों को मिनीकिट, कृषियंत्र, नलकूप खनन के अनुदान चैक सहित अन्य सामग्री राज्यमंत्री द्वारा वितरित की गई। बमोरी किसान संगोष्ठी में 15 ग्राम पंचायतों की कलामंडलियों को भजन कीर्तन के उपकरण हेतु सहायता राशि, 15 वृद्धजनों को राष्ठ्रीय परिवार सहायता योजना के स्वीकृति आदेश वितरित किये गये।
रामपुर कालोनी को दी 60 लाख रुपये के शाला भवन की सौगात
अपने सघन ग्राम भ्रमण के दौरान सामान्य प्रशासन, नर्मदा घाटी विकास एवं विमानन राज्यमंत्री श्री के.एल. अग्रवाल ने ग्राम रामपुर कालोनी में 60 लाख रुपये की लागत से निर्मित हुये माध्यमिक विद्यालय के नवीन भवन का लोकार्पण किया।
इस अवसर पर उन्होंने छात्र छात्राओं से कहा कि वे शिक्षा के प्रति अपना रुझान बढ़ायें और आगे चलकर उस मुकाम को हासिल करें जहां परिवार, गांव, जिले के साथ प्रदेश का नाम भी रोशन हो सके। नवीन शाला भवन की बाउण्ड्री वाल के लिये अपनी विधायक निधि से एक लाख रुपये देने की घोषणा सामान्य प्रशासन राज्यमंत्री श्री अग्रवाल द्वारा की गई।
इस अवसर पर राज्यमंत्री द्वारा बमोरी में प्राथमिक शाला भवन का भूमि पूजन, ग्राम बिलोदा में 4 पुलियों और ग्राम बन्जारीपुरा, शिकारीपुरा, डूमेला एवं अम्बाराम चक में रोजगार गारंटी योजनान्तर्गत 4 खरंजा नाली निर्माण एवं पुलिया निर्माण का लोकार्पण भी किया गया।

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जैविक नीति बनाने के लिये समिति की बैठक 4 नवम्बर को

किसान भवन अरेरा हिल्स) में आयोजित
Bhopal:Monday, October 26, 2009:Updated 18:18IST मध्यप्रदेश में खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिये जैविक खेती की नीति तैयार की जा रही है। नीति तैयार करने के लिये गठित समिति की पहली बैठक 4 नवम्बर को प्रात: 11.30 बजे मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड (किसान भवन अरेरा हिल्स) में आयोजित की गई है।
राज्य सरकार ने जैविक खेती की नीति तैयार करने के लिये एक समिति गठित की है। इस समिति में शासकीय अधिकारियों के साथ-साथ कृषि क्षेत्र के विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है।
जैविक खेती को प्रोत्साहन के उद्देश्य से 28 अक्टूबर को इंदौर के कृषि महाविद्यालय में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का भी आयोजन किया गया है। इस कार्यशाला में कृषि वैज्ञानिकों के साथ-साथ प्रत्येक संभाग के दो प्रगतिशील कृषक शामिल होकर जैविक खेती के संबंध में अपने विचार प्रकट करेंगे।

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Sunday, October 25, 2009

खेतों की गहरी जुताई के लिये मिलेगा 50 प्रतिशत तक अनुदान

प्रदेश में हलधर योजना प्रारंभ
Bhopal:Saturday, October 24, 2009:Updated 18:58IST प्रदेश में कृषि उत्पादकता को बढ़ाने के लिये इस वर्ष से हलधर योजना प्रारंभ की गई है। इस योजना में किसानों को गहरी जुताई के लिये 50 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जायेगा।
हलधर योजना में अनुसूचित जाति, जनजाति एवं सामान्य वर्ग के लघु एवं सीमांत कृषकों को गहरी जुताई के लिये प्रति कृषक एक हेक्टेयर तक जुताई लागत का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम एक हजार रुपये तक अनुदान उपलब्ध कराया जायेगा।
इस योजना का लाभ अधिक से अधिक किसान उठा सकें इसके लिये क्षेत्रीय कृषि कार्यालयों को पात्र हितग्राहियों के प्रकरण शीघ्र तैयार किये जाने के निर्देश दिये गये हैं।

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शिवपुरी जिले में बढ़ता सब्जी का रकबा

टमाटर एवं कद्दू इस जिले की चेंम्पियन फसलें
Shivpuri:Saturday, October 24, 2009:Updated 18:24IST शिवपुरी जिला प्रदेश में सब्जी उत्पादन के मामलें अग्रणी जिला है। इस जिले की मिट्टी एवं जलवायु सब्जी एवं फलों के लिए काफी अनुकूल होने के कारण कृषकों का रूझान सब्जियों की खेती के प्रति अधिक देखा गया है। कृषकों के बढ़ते रूझान को देखते हुए सब्जी के क्षेत्र में लगातार रकबा एवं उत्पादन बढ़ रहा है।
सब्जी के क्षेत्र में टमाटर एवं कद्दू इस जिले की चेंम्पियन फसलो के रूप में जानी जाती है। कद्दू की फसल जिले में मुख्यतः कोलारस, शिवपुरी, पोहरी और बदरवास तहसीलों में अधिक ली जाती हैं। यहां पैदा होने बाला कद्दू 05 से 20 किलों तक का होता है।
इस जिले के कद्दू की खास विशेषता यह है कि यह शिवपुरी में ही नही बल्कि देश की राजधानी की सब्जी मण्डी में अपनी धाक जमाये हुए है। कद्दू वर्ग के कुमढा का उपयोग ग्वालियर एवं आगरा में बड़े पैमाने पर पेठा बनाने के रूप में उपयोग किया जा रहा है।
उघानिकी विभाग के सहायक संचालक श्री आर.एस. सेंगर ने बताया कि कद्दू की फसलें लेने के प्रति कृषकों का रूझान दिन प्रतिदिन बढ रहा है। इसी का परिणाम है कि कद्दू का रकबे में उत्पादन भी प्रतिवर्ष वृद्वि हो रही है। वर्ष 2005-06 में 459 हेक्टेयर क्षेत्र में 9180 मैट्रिक टन फसलें ली गई। इसी प्रकार वर्ष 2006-07 में 416 हेक्टेयर क्षेत्र में 8320 मैट्रिक टन कद्दू का उत्पादन हुआ।
जबकि वर्ष 2007-08 में 532.5 हेक्टेयर क्षेत्र में 1 लाख 65 हजार मैट्रिक टन का उत्पादन हुआ वर्ष 2008-09 में 423 हेक्टेयर क्षेत्र में 10 हजार 575 मैट्रिक टन कद्दू की पैदावार ली गई। जिलें में रणनीति बनाकर शंकर, सब्जी टमाटर, मिर्च, प्याज, लहसुन, कद्दू बीजा का अधिकतम उपयोग करके उत्पादन बढाने के जिले में प्रयास किये जा रहे हैं।
संभाग का प्रथम एवं प्रदेश का दूसरा कृषक प्रशिक्षण केन्द्र शिवपुरी में होने के कारण कृषकों को सब्जी उत्पादन की आधुनिक एवं उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रदाय किया जा रहा है। जिसका उपयोग कृषक भाई सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में अधिक उत्पादन ले रहे है।
जिले में वर्ष 2005-06 में 1 हजार 664 हेक्टेयर क्षेत्र. में 26 हजार 562 मैट्रिक टन सब्जी का उत्पादन, वर्ष 2006-07 में एक हजार 952 हेक्टेयर क्षेत्र में 23 हजार 190 मैट्रिक टन, वर्ष 2007-08 में 20 हजार '93 हेक्टेयर क्षेत्र में 4 लाख 40 हजार 650 मेट्रिक टन और वर्ष 2008-09 में एक हजार 758 हेक्टेयर क्षेत्र में 48 हजार 425 मैट्रिक टन सब्जी का उत्पादन किया गया हैं।
सब्जी बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत वर्ष 2008-09 में 250 कृषकों को 120 हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जी उत्पादन हेतु 2 लाख 26 हजार की अनुदान सहायता उपलब्ध कराई गईं। जबकि वर्ष 2009-10 में लगभग 300 कृषकों को 192 हेक्टेयर क्षेत्र में 3 लाख 90 हजार रूपये का अनुदान उपलब्ध कराया गया।

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Friday, October 23, 2009

प्रदेश में जैविक खेती की नीति तैयार करने के लिय

कृषि विकास मंत्री डा. कुसमरिया की अध्यक्षता में समिति का गठन
Bhopal:Friday, October 23, 2009:Updated 18:51IST मध्यप्रदेश में खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिये राज्य सरकार द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। इसी संबंध में प्रदेश में जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिये जैविक खेती की स्पष्ट नीति तैयार करने के लिये किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है।
यह समिति 45 दिन के भीतर अपनी अनुशंसाएं राज्य शासन को सौंपेगी। समिति में शासकीय सदस्यों के साथ-साथ कृषि क्षेत्र के विभिन्न विषय-विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। यह समिति विभिन्न स्टेक होल्डर्स के साथ बैठक एवं संगोष्ठी आयोजित कर नीति के प्रारूप को अंतिम रूप देगी।
समिति में अशासकीय सदस्यों में जैविक खेती विशेषज्ञ इंदौर श्री एम.जी.के. मेनन, पूर्व कृषि संचालक डा. जी.एस. कौशल, श्री दीपक सचदे सीईओ मालपाणी ट्रस्ट बजवाड़ा, श्री सुनील गंगराडे के.जे. एजुकेशन सोसायटी भोपाल, श्री डब्ल्यू.आर. देशपाण्डे सेवा निवृत्त प्रधान कृषि वैज्ञानिक, श्री के.के. तिवारी सलाहकार दावत फूड, श्री अजीत केलकर जैविक खेती विशेषज्ञ, प्रगतिशील जैविक कृषकों में श्री इंद्र बहादुर सिंह, श्री अशोक पाटीदार, श्री वीरेन्द्र जैन, श्री दयाराम धाकड़, श्री ओम नारायण पटेल, डा.राजेन्द्र सिंह नेगी कृषि वैज्ञानिक, श्री शिवकुमार शर्मा महामंत्री भारतीय किसान संघ एवं डॉ. ध्यानपाल सिंह सदस्य राज्य कृषक आयोग को शामिल किया गया है।
समिति में शासकीय सदस्यों में अपर मुख्य सचिव, सह कृषि उत्पादन आयुक्त, प्रमुख सचिव किसान कल्याण तथा कृषि विकास, पशुपालन, उद्यानिकी, संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास, मत्स्य पालन, उद्यानिकी, पशु चिकित्सा सेवायें, प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड, राज्य जैविक प्रमाणीकरण संस्था, मध्यप्रदेश गौ संवर्धन बोर्ड एवं कृषि उद्योग विकास निगम भोपाल, संचालक राष्ट्रीय जैविक खेती केन्द्र जबलपुर, संचालक राष्ट्रीय जैविक खेती केन्द्र गाजियाबाद, संचालक अनुसंधान सेवायें जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर एवं राजमाता विजयाराजे सिंधियां कृषि विश्वविद्यालय को शामिल किया गया है।समिति के सदस्य सचिव उप सचिव किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग रहेंगे।

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दतिया जिले में कृषकों को किसान क्रेडिट कार्ड सुविधा

56 हजार 339 किसानों को क्रेडिट कार्ड जारी
Bhopal:Friday, October 23, 2009:Updated 16:37IST दतिया जिले में सहकारिता के माध्यम से किसानों को ऋण, खाद एवं बीज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड जारी किये जा रहे है। जिले में अब तक 56 हजार 339 किसानों को क्रेडिट कार्ड जारी किये जा चुके हैं। जिले में सहकारिता के क्षेत्र में क्रेडिट कार्ड जारी किये जाने के पात्र किसानों की संख्या लगभग 60 हजार है।
जिले में शेष रहे किसानों को क्रेडिट कार्ड वितरित किये जाने के लिये सहकारिता विभाग द्वारा संस्था स्तर पर शिविर आयोजित किये जा रहे हैं।

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Thursday, October 22, 2009

ग्वालियर में खरीफ फसल उपार्जन हेतु 15 खरीदी केन्द्र

ग्वालियर जिले में खरीफ फसलों धान, ज्वार, बाजरा और मक्का की समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिये 15 उपार्जन केन्द्र स्थापित किये गये हैं। इन केन्द्रों पर खरीदी प्रारम्भ हो गयी है। जिले में 8 हजार मेट्रिक टन धान की खरीदी का कार्यक्रम तय किया गया है।
धान सामान्य 950 रुपये प्रति क्विंटल, ग्रेड-ए 980 रुपये प्रति क्विंटल तथा 50 रुपये प्रति क्विंटल बोनस की दर पर क्रय किया जायेगा। मोटे अनाज के रूप में मक्का, बाजरा, ज्वार औसत अच्छी गुणवत्ता (एमएक्यू) किस्म का 840 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर खरीद की जायेगी।
जिले में खरीदी केन्द्रों पर उपार्जित फसल का तत्काल भुगतान करने की व्यवस्था की गयी है। किसानों से खरीदी के दौरान खसरा, बी-वन एवं ऋण पुस्तिका व राशन कार्ड की फोटोकापी प्राप्त की जायेगी।

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किसानों के लिये स्थाई कृषि पम्प कनेक्शन योजना

Bhopal:Wednesday, October 21, 2009:Updated 19:18IST मध्यप्रदेश में राज्य शासन द्वारा किसानों को स्थाई पम्प कनेक्शन प्रदान करने की योजना लागू की गई है। इस योजना में लघु एवं सीमान्त वर्ग के किसानों को 25 प्रतिशत तथा अन्य को 40 प्रतिशत अंशदान देने पर स्थाई पम्प कनेक्शन हेतु अधोसंरचना विकसित की जायेगी।
कृषि उपभोक्ता अपने खेत पर कृषि पम्प कनेक्शन लेने हेतु आवेदन संबंधित विद्युत वितरण केन्द्र पर प्रस्तुत करेंगे। निर्धारित आवेदन के साथ आवश्यक प्रमाण पत्र जिसमें स्वयं की जमीन, जल उपलब्धता का प्रमाण आदि संलग्न करना होगा।
वे ही आवेदन स्वीकार किये जायेंगे जिन पर विद्युत ऊर्जा की बकाया राशि नही होगी। ऐसे कृषक जिनसे स्थाई पम्प कनेक्शन हेतु पूर्व में राशि जमा कराई जा चुकी है यदि वे चार या उससे अधिक का समूह बनाकर पम्प कनेक्शन चाहते हैं उन्हें वरीयता दी जायेगी।
प्रदेश के उन अंचलों में जहां अनुसूचित जाति, जनजाति कृषकों की संख्या कुल आबादी का 50 प्रतिशत तक है उनको उच्च प्राथमिकता दी जायेगी। इस योजना की विस्तृत जानकारी नजदीक के विद्युत कार्यालयों पर उपलब्ध है।

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Wednesday, October 21, 2009

केन्द्र द्वारा मप्र को 33 हजार मीट्रिक टन खाद का आवंटन

मुख्यमंत्री श्री चौहान के साथ बैठक के बाद आदेश जारी
New Delhi:Tuesday, October 20, 2009:Updated 19:48IST मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से आज यहां मध्यप्रदेश भवन में उर्वरक मंत्रालय में संयुक्त सचिव श्री सतीश चन्द्रा ने मुलाकात की। वे केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री अझागिरी के दिल्ली से बाहर होने के कारण मुख्यमंत्री श्री चौहान से भेंट के लिये मध्यप्रदेश भवन पहुंचे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने उन्हें मध्यप्रदेश को उसकी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक आवंटित किये जाने संबंधी केन्द्र सरकार को भेजे गये पत्रों के अनुसार कार्यवाही करने को कहा।
मुख्यमंत्री श्री चौहान को उर्वरक मंत्रालय में संयुक्त सचिव श्री चन्द्रा ने 33 हजार मीट्रिक टन खाद का आवंटन आदेश आज ही जारी करने का आश्वासन दिया। श्री चन्द्रा ने मुख्यमंत्री श्री चौहान से कहा कि मध्यप्रदेश सरकार रेलवे से रैक की समुचित व्यवस्था कर लें। केन्द्र सरकार की ओर से मध्यप्रदेश को खाद की नियमित आपूर्ति की जायेगी और भविष्य में उर्वरक की कमी नहीं होने दी जायेगी।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि मध्यप्रदेश को एक लाख 82 हजार मीट्रिक टन खाद की जरूरत है। इसकी तुलना में अब तक 74 हजार मीट्रिक टन खाद ही मिला है। श्री चौहान ने केन्द्र सरकार को अवगत कराया कि रबी की बुवाई शुरू हो रही है। इसे देखते हुए केन्द्र सरकार द्वारा खाद की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। श्री चौहान ने नई दिल्ली में पदस्थ मध्यप्रदेश के अधिकारियों से कहा है कि केन्द्र सरकार से समय-समय पर खाद की आपूर्ति के लिए पहल करें।
मुख्यमंत्री श्री चौहान की उर्वरक मंत्रालय में संयुक्त सचिव श्री सतीश चन्द्रा के साथ हुई बैठक के अवसर पर मध्यप्रदेश के नई दिल्ली में आवासीय आयुक्त श्री विमल जुल्का, विशेष आयुक्त श्री अनिल जैन और मुख्यमंत्री के सचिव श्री एस.के. मिश्रा उपस्थित थे।

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Tuesday, October 20, 2009

रबी सीजन में किसानों को प्रमाणित बीज पर अनुदान

प्रदेश में रबी सीजन में किसानों को प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने के लिये किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने निर्देश जारी किये हैं। प्रदेश में फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिये उन्नत प्रजातियों के प्रमाणित बीज किसान कल्याण विभाग द्वारा उपलब्ध कराये जा रहे हैं।
प्रदेश में प्रमाणित बीज के उत्पादन में वृद्धि के लिये भी निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। निर्देशों में कहा गया है कि संस्थाओं के पास उपलब्ध प्रमाणित बीज का न्यूनतम 90 प्रतिशत बीज प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के माध्यम से करना अनिवार्य होगा तथा 10 प्रतिशत बीज का वितरण संस्थाएं स्वयं नगद में वितरण कर सकेंगी। एक कृषक को दलहनी एवं तिलहनी फसलों हेतु अधिकतम दो हेक्टेयर एवं गेहूँ के लिये अधिकतम 5 हेक्टेयर तक के उपयोग में लाये जाने वाले बीज पर ही वितरण अनुदान की पात्रता होगी।
रबी वर्ष 2009-10 के लिए प्रमाणित बीजों की उपार्जन तथा विक्रय दरों का निम्नानुसार निर्धारण किया गया है। राज्य में पहला मौका है जब किसानों को इतनी बड़ी राशि का अनुदान देकर प्रमाणित बीज उपलब्ध कराया जा रहा है।
क्रमांक फसल बीज उपार्जन दर बीज विक्रय दर कृषकों अनुदान दर बीज वितरण शुद्ध दर
1. गेहूँ ऊँची किस्में (10 वर्ष तक) 1760/- 2165/- 700/- 1465/-
2- गेहूँ ऊँची किस्में (10 वर्ष से अधिक) 1460 2165/- 700/- 1465/-
3. गेहूँ बोनी जाति (10 वर्ष तक) 1595/- 2000/- 700/- 1300/-
4. गेहूँ बोनी जाति (10 वर्ष से अधिक) 1295/- 2000/- 700/- 1300/-
5. चना 2970/- 2725/- 1325/- 1400/-
6. काबुली चना 2970/- 2725/- 1325/- 1400/-
7. मटर 2280/- 2010/- 980/- 1030/-
8. मसूर 4190/- 4150/- 2000/- 2150/-
9. तोरिया 2850/- 3015/- 1475/- 1540/-
10. सरसों 2970/- 3150/- 1535/- 1615/-
11. अलसी 3625/- 3575/- 1750/- 1825/-
12. कुसुम 1500/- 1400/- 680/- 720/-
13. बरसीम 5100/- 6150/- निरंक 6150/-
14. जौ (बार्ले) 1100/- 1500/- 700/- 800/

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Monday, October 19, 2009

इंदौर जिले में साढ़े 18 हजार हेक्टेयर में आलू की फसल लेने का कार्यक्रम

Bhopal:Sunday, October 18, 2009:Updated 18:45IST इंदौर संभाग में इस वर्ष रबी सीजन में 20 हजार 241 हेक्टेयर में आलू की फसल ली जायेगी। इसमें सर्वाधिक इंदौर जिले में 18 हजार 500 हेक्टेयर में आलू की बोनी की जायेगी। संभाग में आलू सहित रबी की अन्य फसलों गेहूं और चना के लिये पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है। पिछले दिनों इन्दौर कमिश्नर श्री बसंत प्रताप सिंह ने एक बैठक में कृषि आदान की समीक्षा की।
बैठक में बताया गया कि इन्दौर संभाग में रबी के दौरान 6 लाख 89 हजार हेक्टेयर में फसल ली जायेगी। जो पिछले वर्ष की तुलना में एक लाख 5 हजार हेक्टेयर अधिक है। संभाग में अब तक 657.4 मि.मी. औसत वर्षा हो चुकी है। जो गत वर्ष से 38.9 मि.मी. अधिक है। संभाग में रबी में गेहू, चना, गन्ना, आलू तथा अन्य दलहनी फसल ली जायेंगी। संभाग में रबी के लिये 2 लाख 65 हजार क्विंटल बीज उपलब्ध है।
कमिश्नर श्री सिंह ने बैठक में निर्देश दिये कि रबी के दौरान ऐसी व्यवस्था की जाये कि किसानों को उर्वरक आसानी से उपलब्ध हों। ऐसे किसान जो सहकारी समितियों से उर्वरक नहीं ले पा रहे हो उनके लिये एम.पी. एग्रो द्वारा व्यवस्था की जाये।
उन्होंने निर्देश दिये कि बुरहानुपर में उर्वरकों की आवक के लिये एक रेंक पाईंट बनाया जाये। बैठक में बताया गया कि संभाग में गेहू, चना और आलू की बोनी का कार्य शुरू हो गया है। इन दिनों मण्डी में सोयाबीन की आवक हो रही है।

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Friday, October 16, 2009

किसानों को अनुदान पर मिलेगी आदान सामग्री

गेहूँ के उत्पादन को बढ़ाने के लिये राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन रबी वर्ष 2009-10 के अंतर्गत गेहूँ फसल का चयन किया जाकर उत्पादकता बढ़ाने के लिये इंदौर जिले में अनुदान पर कृषि आदान सामग्री किसानों को दी जायेगी।
जिले में गेहूँ के लिये दिये गये लक्ष्य के अनुरूप विभिन्न सहयोगी घटक जैसे माइक्रोन्युट्रिएन्ट वितरण में प्रत्येक विकासखंड में जिंक सल्फेट 50 प्रतिशत अनुदान पर तथा विकासखण्ड देपालपुर में जिप्सम 50 प्रतिशत अनुदान पर भण्डारण करवाया जा रहा है।
इसी प्रकार रोटावेटर 50 प्रतिशत अधिकतम 30 हजार रुपये, नेपसेक स्प्रे पम्प 50 प्रतिशत अधिकतम तीन हजार रुपये, शक्ति चलित सीड कम फर्टीलाईजर ड्रिल पर 50 प्रतिशत अधिकतम 15 हजार रुपये एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिये नाडेप निर्माण पर कीमत का 50 प्रतिशत अधिकतम 500 रुपये का अनुदान किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है।

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Thursday, October 15, 2009

बीज वितरण प्रक्रिया निर्धारित

प्रमाणित बीजों के वितरण का लाभ कृषकों को देने के उद्देश्य से राज्यशासन व्दारा बीज वितरण प्रक्रिया निर्धारित की गई है। किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग व्दारा इस संबंध में जारी निर्देशों के अनुसार संस्थाओं के पास उपलब्ध प्रमाणित बीज का न्यूनतम 90प्रतिशत बीज प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से करना अनिवार्य होगा तथा अधिकतमबीज का संस्थाएं स्वंय नगद में विक्रय कर सकेगी।
एक कृषक को दलहनी एवं तिलहनी फसलों हेतु अधिकतम 2 हेक्टर एवं गेहूं के लिए अधिकतम 5 हेक्टर तक के लिए उपयोग में लाए जाने वाले बीज पर ही वितरण अनुदान की पात्रता होगी अर्थात इस सीमा में ही बीज वितरण अनुदान मिलेगा। नगद राशि पर बीज प्रदाय की मात्रा का इन्द्राज कृषक की ऋण पुस्तिका में प्रदाय संस्थाको करना अनिवार्य होगा।
बीज उत्पादक सहकारी समितियों के कृषक सदस्य, जिन्हे उनकी समितियां निर्धारित मात्रा तक प्रमाणित बीज प्रदाय करती है, को उनकी सूची कृषि साख सहकारी समितियों को उपलब्ध कराई जाने पर इन मात्राओं पर वितरण अनुदान की पात्रता होगी।
कृषि साख सहकारी समितियों एवं बीज उत्पादक संस्थाओं अथवा समितियों व्दारा वितरित बीज के लिए वितरण अनुदान सीधे उप संचालक कृषि व्दारा उन्हे प्रदाय किया जाएगा। सहकारी समितियों, संस्थाओं के व्दारा कृषकों की अनुदान राशि उनके बैंक खाते में क्रेडिट की जाएगी।
जिन कृषकों ने नगद क्रय किया है उन्हे अनुदान की राशि का भुगतान अकाऊंट पेयी चेक के माध्यम से किया जाएगा।बीज वितरण करने वाली संस्थाओ को अनुदान का भुगतान प्राप्त करने हेतु कृषकों की जानकारी निर्धारित प्रारूप में संधारितकरनी होगी और इसी प्रारूप के आधार पर विभाग व्दारा अनुदान की राशि उपलब्ध कराईजाएगी।
कृषि साख सहकारी समितियों व्दारा बीजों का वितरण निर्धारित मानकों के अनुसार सामान्य वर्ग,अनुसूचितजाति एवं जनजाति वर्ग के कृषकों को किया जायेगा। उसी के अनुसार विभाग व्दारा बीज वितरण अनुदान की राशि कृषि साख सहकारी समितियों को मदवार उपलब्ध कराई जाएगी।
इसी तरह डीपीआईपी व्दारा गठित बीज उत्पादक कंपनियों एवं अन्य पात्र संस्थाएं जैसे तिलहन संघ, कृभकों,सोपा आदि व्दारा वितरण किए जानेवाले बीजों पर भी उपरोक्त प्रक्रिया के अनुसार ही अनुदान दिया जाएगा। कृषि साख सहकारी समितियों व्दारा बीज उठाते समय बीज उत्पादन संस्था के केन्द्र अथवा विपणन संघ के डबललॉक केन्द्र को रिलीज (आर्डर) एवं उसके साथ बीज मात्रा की राशि का डिमांड ड्राफ्ट (कमीशन की राशि को घटाने के पश्चात) संलग्न किया जाएगा।
कृषि साख सहकारी समितियों व्दारा उठाई जाने वाली (संस्था के केन्द्र अथवा विपणन संघ के डबललॉक) बीज मात्रा का शत प्रतिशत विक्रय करना होगा। समिति व्दारा प्राप्त किए गए बीज को संस्था व्दारा वापस नहीं लिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की योजनाओं के अंतर्गत वर्ष 2009-10में उपलब्ध अनुदान की राशि को दृष्टिगत रखते हुए समस्त दलहनी, तिलहनी फसलों पर एक हजार रूपए प्रति क्विंटल बीज उत्पादन अनुदान (750रूपए बीज उत्पादक कृषक एवं 250 रूपए संस्था को प्राप्त होगा) दिया जाएगा। दस वर्ष की अवधि की गेहूं की अधिसूचित किस्मों पर 300रूपए प्रतिक्विंटल की दर से बीज उत्पादन अनुदान संस्था को देय होगा।
जिलास्तर पर बीज उत्पादन अनुदान का उपसंचालक कृषि यथाशीघ्र संस्था को भुगतान करेगें,ताकि बीज उत्पादक कृषक को संस्था व्दारा अनुदान यथाशीघ्र भुगतान किया जा सके।भारत सरकार की आईसोपॉम योजना के अंतर्गत समस्त रबी दलहनी,तिलहनी फसलों पर 2000रूपए अथवा लागत का 50प्रतिशत प्रति क्विंटल की दर से जो भी कम हो कृषक को बीज वितरण पर अनुदान दिया जाएगा।राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत गेहूं की समस्त अधिसूचित किस्मों पर 700रूपए प्रति क्विंटल की दर से बीज वितरण अनुदान कृषकों को दिया जाएगा।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजनांतर्गत दलहनी एवं गेहूं की फसलों की सभी अधिसूचित किस्में पर अवधि का कोई बंधन नहीं है। मिशन के अंतर्गत जिलो में लाभ मिशन से देय होगा तथा प्रदेश के शेष जिलों में वितरण अनुदान आईसीडीपी या राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से देय होगा।

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धान खरीदी पर प्रति क्विंटल 50 रूपये का बोनस घोषित

मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने प्रदेश के धान उत्पादक किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी पर उन्हें 50 रूपये प्रति क्विंटल का बोनस देने की घोषणा की है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा खरीफ सीजन 2009-10 में धान का समर्थन मूल्य कॉमन 950 रूपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए 980 रूपये प्रति क्विंटल घोषित किया है।
इन समर्थन मूल्यों पर प्रदेश के किसानों से धान खरीदी पर प्रति क्विंटल 50 रूपये की अतिरिक्त बोनस राशि किसानों को देने के राज्य शासन के निर्णय अनुसार अब मध्यप्रदेश में कामन धान की खरीद 1000 रूपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान की खरीद 1030 रूपये प्रति क्विंटल की दर से की जायेगी।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान पूर्व में ही रबी मौसम 2009-10 के लिये गेहूं के समर्थन मूल्य पर प्रदेश के किसानों को 100 रूपये प्रति क्विंटल का बोनस देने का फैसला ले चुके हैं।
श्री चौहान ने कहा कि खेती को लाभदायी व्यवसाय बनाने की राज्य सरकार की प्राथमिकता के अंतर्गत ही धान उत्पादक किसानों से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी पर बोनस देने का यह फैसला लिया गया है।

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Wednesday, October 14, 2009

प्रदेश सरकार किसानों की मददगार - श्री वर्मा

राजस्व, श्रम एवं पुनर्वास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की वास्तविक मददगार है जिसने किसानों के हित में अनेक फैसले लेते हुए उन पर गंभीरता से अमल सुनिश्चित किया है। श्री वर्मा इछावर विकासखंड के ग्राम ब्रिजिशनगर में आयोजित कृषक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। संगोष्ठी में वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को उपयोगी जानकारी दी गई।
कृषक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राज्य मंत्री श्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की सच्ची हितचिंतक है। सरकार ने किसानों के हित में अनेकों ऐसे फैसले लिए हैं जिनके बारे में कभी सोचा भी नहीं गया। उन्होंने कहा कि यह खुशकिस्मती है कि आज प्रदेश का नेतृत्व ऐसे व्यक्ति के हाथों में है जो खुद किसान है। उन्होंने मुख्य मंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा किसानों के हित में लिए गए अनेक फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन फैसलों के चलते किसानों ने काफी राहत महसूस की है।
उन्होंने मुख्यमंत्री के खेती को फायदे का धंधा बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि संकट के किसी भी समय में सरकार किसानों के साथ खड़ी है। हाल ही में हुई वर्षा से सोयाबीन को हुए नुकसान का जिक्र करते हुए उन्होंने किसानों से कहा कि सरकार प्रभावित किसानों की पूरी मदद करेगी। राज्य मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि किसानी मेहनत का कार्य है। समय की मांग है कि कृषि कार्य में बदलाव किए जायें।
किसानों को चाहिए कि वे कृषि वैज्ञानिकों द्वारा दी गई सलाह को तवज्जो दें तथा उसके मुताबिक खेती करें। रासायनिक खाद की जगह जैविक खाद का उपयोग ज्यादा लाभकारी सिद्ध होता है। उन्होंने किसानों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को निराकरण के निर्देश दिए।
संगोष्ठी में आर.ए.के. कृषि महाविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को खेती से संबंधित उपयोगी जानकारी दी गई। कृषि वैज्ञानिकों ने फसल में लगने वाले रोगों से बचाव, कीट नियंत्रण, रबी फसलों का प्रबंधन, महत्वपूर्ण कृषि गतिविधियों पर किसानों को जानकारी दी। जिला सहकारी बैक के प्रबंधक ने बताया कि जिले में करीब 85 हजार किसान कार्डों का वितरण किया जा चुका है।

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Monday, October 12, 2009

आदर्श कृषि फार्म विकसित किये जायेंगे - कृषि विकास मंत्री डॉ. कुसमरिया

प्रदेश में खेती का लाभ का धंधा बनाने के लिये चयनित गाँवों में 5 से 10 हेक्टेयर रकबे में आदर्श कृषि फार्म विकसित किये जायेंगे। इन कृषि फार्मों में कृषि की आधुनिक तकनीकों, जैविक पद्धति, बायोगैस एवं कृषि उपकरणों की जानकारी के साथ-साथ किसानों को उद्यानिकी एवं अन्य गतिविधियों की जानकारी प्रायोगिक तौर पर दी जायेगी।
किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री डॉ। रामकृष्ण कुसमरिया ने उक्त जानकारी पिछले दिनों भोपाल के नजदीक शासकीय फन्दा कृषि फार्म के आकस्मिक निरीक्षण के बाद दी। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि फन्दा कृषि फार्म लाभ की स्थिति में है।
इन आदर्श कृषि फार्मों में किसानों को मत्स्य पालन, पशुपालन, सब्जी-फल उत्पादन, औषधि खेती, मधुमक्खी पालन, रेशम पालन आदि के बारे में एक ही स्थान पर जानकारी दी जायेगी। कृषि विकास मंत्री डॉ. कुसमरिया ने कहा कि प्रदेश में खेती को लाभ का धंघा बनाने के लिये किसानों को परम्परागत फसल लेने के अलावा कृषि से जुड़ी अन्य गतिविधियों की जानकारी दिया जाना जरूरी है। कृषि विभाग इन तमाम गतिविधियों को एक क्षेत्र में आदर्श रूप में प्रस्तुत कर किसानों को इनसे जुड़ने के लिये प्रोत्साहित करेगा। प्रदेश में वर्तमान में किसानों को जैविक खेती से अधिक से अधिक जोड़ने के लिये प्रयास किये जा रहे हैं। इस समय 3130 गांव का चयन जैविक ग्राम के रूप में किया गया है।
कृषि विकास मंत्री ने अपने निरीक्षण के दौरान फन्दा कृषि फार्म में गौशाला, नाडेप एवं वर्मी कम्पोस्ट की विधि को देखा। फन्दा कृषि फार्म के प्रभारी श्री मनोहर दिलवारिया ने बताया कि लगभग 120 हेक्टेयर के इस कृषि फार्म की गौशाला में 125 गायों का पालन किया जा रहा है। इनमें गौमूत्र एवं गोबर का उपयोग बायो गैस संयंत्र एवं जैविक औषधि के लिये किया जा रहा है। कृषि मंत्री ने नाडेप एवं वर्मी कम्पोस्ट की प्रक्रिया को देखा।
कृषि फार्म के बायोगैस संयंत्र से पैदा होने वाली बिजली का उपयोग फार्म हाउस में लगे हेलोजन बल्ब को जलाने में किया जा रहा है। कृषि विकास मंत्री डॉ. कुसमरिया ने बीज प्रोसेसिंग मशीन का निरीक्षण किया। कृषि फार्म में रबी एवं खरीफ सीजन में उन्नत एवं प्रमाणित बीज पैदा किया जा रहा है। साथ ही आसपास के किसानों के उन्नत बीज की ग्रेडिंग भी की जा रही है।
संयुक्त संचालक कृषि श्री डी.के. दुबे ने बताया कि कृषि फार्म में राज्य के अलावा अन्य राज्यों के किसानों के दल नियमित रूप से जैविक खेती एवं बीज प्रोसेसिंग देखने को आते हैं। कृषि विकास मंत्री को बताया गया कि फार्म हाउस में लगी सोयाबीन की उन्नत किस्म जे.एस. 9305 को हाल ही में हुई बारिश के बाद भी नुकसान नहीं पहुंचा है। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे कृषि फार्म को देखने आने वाले किसानों को उन्नत फसलों की विभिन्न किस्मों के बारे में भी जानकारी दें। इस मौके पर कृषि विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे।

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Saturday, October 10, 2009

चावल लेव्ही की नई नीति

खाद्य आपूर्ति राज्य मंत्री श्री पारसचंद्र जैन ने आज यहां प्रदेश के राइस मिलर्स महासंघ से चर्चा कर उनके द्वारा उठाई गई कई माँगों को मान लिया। श्री जैन ने यह वादा खास तौर पर किया कि अब से हर सीजन में चावल लेव्ही तय होने के पहले राइस मिलर्स से चर्चा कर दिक्कतों का समाधान किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि मौजूदा खरीफ विपणन साल में चावल पर लेव्ही की नीति हाल ही में तय कर दी गई है। इस पर अमल के पहले आज राज्य मंत्री श्री जैन ने महासंघ को बुलाकर यहाँ चर्चा की।
मिलिंग दर बढ़ाने का प्रस्ताव वित्त को
आज राइस मिलर्स महासंघ ने चावल की लेव्ही के लिए कस्टम मिलिंग की मौजूदा 10 रुपए प्रति क्विंटल की दर में इजाफे की माँग उठाई थी। इसे खाद्य आपूर्ति राज्य मंत्री श्री पारस चंद्र जैन ने सैद्धांतिक रूप से मंजूर कर दिया। इस दर में मुनासिब इजाफे का प्रस्ताव जल्द वित्त विभाग को भेजा जाएगा। श्री जैन ने यह भरोसा भी दिलाया कि इस मामले में वित्त विभाग से बाकायदा पैरवी और सिफारिश की जाएगी क्योंकि इन दरों में कई सालों से इजाफा नहीं हुआ है।
मिलिंग अवधि एक महीने बढ़ी
महासंघ ने लेव्ही को लेकर चावल मिलिंग की एक महीने की मौजूदा अवधि को नाकाफी बताया था। राज्य मंत्री श्री जैन ने आज मौके पर ही अपनी रजामंदी जताते हुए इसे बढ़ाकर दो महीने कर दिया। मिल वालों का कहना यह भी था कि लेव्ही चावल संग्रहण के लिए एक बार इस्तेमाल हो चुके बारदाने की दरें भिन्न होने और वाजिब नहीं होने के चलते उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।
राज्य मंत्री श्री जैन ने इसे मंजूर करते हुए प्रदेश में इन बारदानों की एक समान और वाजिब दर तय करने का ऐलान किया। आज से अफसरों ने इस पर काम शुरू कर दिया है। श्री जैन ने अलबत्ता सरकार का यह पक्ष भी साफ कर दिया कि बारदाने वापिस नहीं लिए जाएंगे।
राज्य मंत्री श्री जैन ने यह माँग भी मान ली कि मिलर्स को भण्डारण के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराई जाए। इस इंतजाम के लिए अफसरों ने फौरन संपर्क शुरू कर दिया है महासंघ यह भी चाहता था कि लेव्ही के सिलसिले में बनी जिला स्तरीय कमेटियों में चावल मिलर्स का प्रतिनिधित्व हो ताकि कुछ व्यावहारिक दिक्कतों का मौके पर ही निदान हो जाए। राज्य मंत्री श्री जैन ने इससे सहमत होते हुए जिला स्तरीय कमेटियों में एक प्रतिनिधि शामिल करने की मंजूरी दे दी है। कलेक्टरों को इस बारे में खबर की जा रही है।
धान की मिलिंग पहले करें
राज्य मंत्री श्री जैन ने राइस मिलर्स महासंघ से यह अपील भी की कि प्रदेश के सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े उपभोक्ताओं के हित में सरकार के लिए धान की मिलिंग पहले की जाए। इसी तरह उसकी गुणवत्ता पर कोई आँच नहीं आए। उन्होंने यह भी कहा कि चावल के मिलर्स अपने करीब के जिलों में ही धान जमा करें ताकि उन्हें अनावश्यक परिवहन व्यय नहीं भुगतना पड़े। श्री जैन ने आश्वस्त किया कि सरकार व्यापारियों के साथ अन्याय कभी होने नहीं देगी लेकिन उन्हें जनता के व्यापक हितों में कानून के दायरे में रह कर काम करना होगा।
महासंघ ने की तारीफ
मध्यप्रदेश राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री ललित माहेश्वरी ने राज्य सरकार के इस कदम की सराहना की कि पहली बार उसने महासंघ से रूबरू होकर उनकी समस्याओं पर गौर किया। इस मौके पर सतना, जबलपुर, बालाघाट, मंडला, डबरा और गाडरवारा जगहों के जहाँ चावल मिलें हैं, सभी मिलर्स मौजूद थे। राज्य सरकार की तरफ से प्रमुख सचिव खाद्य श्री अशोक दास, आयुक्त श्री अजीत केसरी तथा भंडार गृह निगम, भारतीय खाद्य निगम, राज्य विपणन संघ मंडी बोर्ड के आला और मैदानी अफसर भी मौजूद थे।

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Friday, October 9, 2009

केन्द्रीय अध्ययन दल द्वारा किसानों को रबी फसलों की बोनी की तैयारी की सलाह

सागर संभाग में अवर्षा से उत्पन्न स्थिति से रूबरू होने के लिए 6 अक्टूबर को आये केन्द्रीय अध्ययन दल के सदस्यों ने दो टीमें बनाकर 'संभाग' के सागर, दमोह, पन्ना एवं टीकमगढ़ जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर वास्तविकता से रूबरू हुआ।
अध्ययन दल के ए टीम में टीम लीडर डॉ. ए.के. सिक्का तथा दो सदस्य डॉ. एस.के. गुप्ता एवं डॉ. चक्रवर्ती ने सागर, दमोह एवं पन्ना जिले के विभिन्न क्षेत्रों का तथा टीम बी के सदस्य के रूप में इंजीनियर श्री आर.ए.एस. पटेल तथा डॉ. आर.पी. सिंह ने टीकमगढ़ जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर खेतों की स्थितियां देखीं एवं किसानों से चर्चा की।
केन्द्रीय अध्ययन दल की दोनो टीम सागर से सुबह 9 बजे अपने-अपने लिए निर्धारित जिलों की वास्तविक स्थिति से रूबरू होने के लिए रवाना हुईं। टीम ए के सदस्यों ने ग्राम डुंगासरा, सानौधा, परसोरिया, रंगोली, केंकरा, गढ़ाकोटा, बांसा, ग्राम सिहोरा, सिहोरा पड़रिया सहित कई ग्रामों के खेतों में जाकर फसलों की स्थिति का जायजा लिया। केन्द्रीय अध्ययन दल के प्रमुख डॉ. ए.के. सिक्का ने किसानों को रबी फसलों की बोनी हेतु तैयारियां प्राथमिकता के आधार पर शुरू करने की सलाह दी।
केन्द्रीय अध्ययन दल की टीम ए के भ्रमण के समय सागर राजस्व संभाग के कमिश्नर श्री एस.के. वेद, दमोह जिला कलेक्टर श्री आर.ए. खंडेलवाल तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उनके साथ थे। इसी प्रकार टीम बी के भ्रमण के समय संबंधित जिलों के अधिकारी उनके साथ थे।
टीम ए के सदस्य सागर, दमोह और पन्ना जिले के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण करने के बाद पन्ना में रात्रि विश्राम करेंगे। यह दल शुक्रवार को सुबह पन्ना से मार्ग में पड़ने वाले खेतों का अवलोकन करते हुए खजुराहो पहुंचेगा और वहां से वायुयान द्वारा दिल्ली रवाना हो जायेगा।
केन्द्रीय अध्ययन दल की टीम बी के सदस्य सागर से टीकमगढ़ के लिए सुबह रवाना हुए और सड़क मार्ग पर पड़ने वाले खेतों का अवलोकन किया। इस दल के सदस्य 9 अक्टूबर को दतिया जिले का भ्रमण करने के बाद झाँसी से दिल्ली लौट जायेगा।

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अब मजूदरी मिलेगी हाट-बाजार में

रोजगार गारंटी योजना में ग्रामीणों की मजदूरी के लिये अब बीस किलोमीटर दूर नहीं जाना पड़ेगा। जिला योजना समिति की बैठक में प्रभारी मंत्री श्रीमती रंजना बघेल ने आज निर्देश दिये कि ग्रामीणों को निकट के हाट-बाजार में जाकर मजदूरी दी जाये।
बैंक खुद चलकर मजदूर के पास में जाये। विधायक विजय शाह ने खालवा ब्लाक के कुछ गांवों में बैंक की शाखा 20 किलोमीटर दूर होने पर आ रही दिक्कतों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया था।

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अब मजूदरी मिलेगी हाट-बाजार में

रोजगार गारंटी योजना में ग्रामीणों की मजदूरी के लिये अब बीस किलोमीटर दूर नहीं जाना पड़ेगा। जिला योजना समिति की बैठक में प्रभारी मंत्री श्रीमती रंजना बघेल ने आज निर्देश दिये कि ग्रामीणों को निकट के हाट-बाजार में जाकर मजदूरी दी जाये।
बैंक खुद चलकर मजदूर के पास में जाये। विधायक विजय शाह ने खालवा ब्लाक के कुछ गांवों में बैंक की शाखा 20 किलोमीटर दूर होने पर आ रही दिक्कतों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया था।

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Thursday, October 8, 2009

समर्थन मूल्य पर धान और मोटा अनाज

प्रदेश में 15 अक्टूबर से धान और मोटे अनाज की खरीदी शुरू होने जा रही है। उपार्जन व्यवस्था का जायजा लेने तथा स्टॉक की गुणवत्ता और विषयांतर्गत अन्य निर्णय लेने के लिए हर जिले में प्रशासकीय समितियाँ गठित की जा रही हैं। इस समिति को खरीदी संबंधी सारे विवादों के अंतिम निराकरण का अधिकार भी होगा। उपार्जन की तैयारियाँ तेज कर दी गई हैं।
राज्य शासन के निर्देश के मुताबिक जिला प्रशासकीय समिति के अध्यक्ष संबंधित कलेक्टर या उनके प्रतिनिधि होंगे। इसके सदस्यों में उप पंजीयक या सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं, जिला या शाखा प्रबंधक भारतीय खाद्य निगम, प्रबंधक जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक, उप संचालक कृषि, जिला प्रबंधक म.प्र. राज्य सहकारी विपणन संघ, जिला प्रबंधक या शाखा प्रभारी म.प्र. राज्य भंडार गृह और लाजिस्टिक्स निगम तथा सचिव कृषि उपज मंडी शामिल रहेंगे।
अनुभाग स्तर पर खास दल
धान और मोटे अनाज के समर्थन मूल्य पर उपार्जन संबंधी निगरानी, सुपरवीजन आदि के लिए अनुभाग स्तर पर खास दल भी गठित किए जा रहे हैं। कलेक्टर द्वारा गठित होने वाले इन दलों में कृषि, राजस्व, सहकारिता, भारतीय खाद्य निगम और उपार्जन संस्था के प्रतिनिधि शामिल होंगे। ये दल खरीदी केन्द्रों का आकस्मिक निरीक्षण करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि वहाँ बिक्री के लिए आ रहा खाद्यान्न तयशुदा गुणवत्ता के मुताबिक ही खरीदा जा रहा है या नहीं। इनके जिम्मे क्रेता और विक्रेताओं के विभिन्न विवादों का निराकरण करना भी होगा।

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Wednesday, October 7, 2009

कृषि को लाभदायी बनाने के लिये गठित कार्य समूह का प्रस्तुतीकरण (मंथन-2009)

100 से अधिक अनुशंसाओं पर हुआ विचार-विमर्श
मंथन-2009 कार्यशाला के अंतर्गत कृषि को लाभदायी बनाने के लिये गठित कार्य समूह ने आज शाम प्रशासन अकादमी सभागार में अपनी अनुशंसाएं प्रस्तुत कीं। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान, राज्य मंत्रिपरिषद के सदस्य और मंथन कार्यशाला में भाग ले रहे अधिकारी उपस्थित थे।
कार्य समूह की प्रमुख अनुशंसाओं में प्रदेश में नर्सरी एक्ट बनाने, उद्यानिकी के संकर बीज की हायब्रिड उत्पादन इकाई निजी क्षेत्र में लगाने, बीज परीक्षण प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ाने और बीज के डी.एन.ए. परीक्षण की प्रयोगशाला की स्थापना, प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं में बाराबंदी लागू करने लिफ्ट एरीगेशन स्कीमों में बिजली का प्रभार कृषि दर पर लेने, कृषि कार्य के लिये कम से कम 7 घंटे लगातार 3 फेस पर बिजली देने, प्राकृतिक जल संरचनाओं के पुनरूद्धार और जल उपयोग की कार्य योजना बनाने, ग्राम स्तर पर जल और भूमि संरक्षण के लिये समन्वित कार्यक्रम बनाने जैसी अनुशंसाएं शामिल हैं।
इसी तरह धारा 11 की श्रेणी में आने वाले सहकारी बैंकों की माली हालत सुधारने का समयबद्ध कार्यक्रम बनाने, सहकारी ऋणों की वसूली में सुधार, व्यावसायिक बैंकों के माध्यम से भी किसान क्रेडिट कार्ड जारी करने का अभियान चलाने, फसलों की आनावारी वर्तमान उत्पादन के आधार पर पुनरीक्षित करने, जल कृषि के लिये भी आनावारी लागू करने, मौसम आधारित बीमा योजना की वर्तमान जिलों की पायलट योजना के सफल होने पर उसका विस्तार करने, उर्वरक की वितरण व्यवस्था में सुधार हेतु प्रदेश में भण्डारण की क्षमता में वृद्धि करने और सामान्य शिक्षा में कृषि विषय को शामिल करने की अनुशंसाएं भी समूह ने की हैं।
इसके अलावा कार्य समूह की अन्य प्रमुख अनुशंसाओं में कृषि यंत्रों का पूल ग्रामवार स्थापित करने, बैलचलित कृषि यंत्रों पर भी अनुदान देने और छोटे कृषि यंत्रों पर अनुदान हेतु किसानों को अधिक प्रोत्साहित करने की बात कही गई है। समूह ने क्षेत्र विस्तार एवं उत्पादकता में वृद्धि के लिये मल्टी टायर खेती को प्रोत्साहन देने, इनसिटू न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट को बढ़ावा देने और नर्मदा घाटी को अधिक कीमत की फसलों के उत्पादन हेतु योजनाबद्ध तरीके से प्रोत्साहित किया जाने वाला झोन घोषित करने, बीहड़ भूमि के कृषिकरण को प्रोत्साहित करने की अनुशंसा की है।
पशुपालन के अंतर्गत समूह द्वारा की गई अनुशंसाओं में जिला सीधी और केसला में महिलाओं द्वारा संचालित सफल कुक्कुट पालन योजना का विस्तार पूरे प्रदेश में करने, श्वेत क्रांति के लिये पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशु प्रदाय के साथ ही उनके वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन, आहार और स्वास्थ्य की घर पहुंच सेवा उपलब्ध करवाने, बल्क मिल्क कूलर की स्थापना पर अनुदान पर लगी रोक को हटाने, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत क्षेत्रवार प्रोजेक्ट/अधोसंरचना के निर्माण के कार्य हाथ में लेने मिल्क रूट व्यवस्था को प्रदेश में अभियान के रूप में लेने और ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को संगठित करने संबंधी अनुशंसाएं की हैं।
इसी तरह , अच्छी गुणवत्ता के पशु आहार की उपलब्धता के लिये निजी क्षेत्र में पशु आहार की स्थापना को बकरी पालन हेतु पशुपालकों को प्रोत्साहितप्रोत्साहित करने और गौ-शालाओं के माध्यम से गौ वंश उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने जैसी अनुशंसाएं भी समूह ने की हैं।
मत्स्य पालन के अंतर्गत ग्रामीण तालाबों की मत्स्य उत्पादकता नरेगा योजना के माध्यम से बढ़ाकर उन्हें बारहमासी बनाने, निर्माणाधीन बड़े और मध्यम जलाशयों में मत्स्य बीजों की पूर्ति हेतु परियोजना राशि से मत्स्य-बीज प्रक्षेत्र निर्माण हेतु भूमि का अधिग्रहण और मत्स्य क्षेत्र का निर्माण कराने, बड़े जलाशयों की नहरों के किनारों की भूमि, जो सिंचाई विभाग के स्वामित्व की है, में नये तालाबों का निर्माण कर मत्स्य-पालन के लिये उपयोग करने की अनुशंसा समूह ने की है।
इसी क्षेत्र के अंतर्गत समूह द्वारा की गई अन्य अनुशंसाओं में फिशरमेन क्रेडिट कार्ड उपलब्ध करवाने, बड़े जलाशयों में मत्स्याखेट करने वाले मछुआरों को अधिकतम लाभ दिलाने और उनके हितों को संरक्षित करने के लिये लंबी अवधि पर देने और जिला स्तर पर सहकारिता के अंतर्गत समितियों का जिला स्तर पर संघ गठन करने की अनुशंसा शामिल है।
समूह ने फसलोत्तर प्रबंधन के अंतर्गत कृषि एवं उद्यानिकी फसलों को प्रदेश में, प्रदेश के बाहर तथा विदेशों में निर्यात हेतु रेल, सड़क और वायु मार्ग के माध्यम से समुचित लाजिस्टिक सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया है। इसी तरह स्व-सहायता समूहों के जरिये ग्रामीण क्षेत्र में प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहन देने और प्रदेश के पिछड़े जिलों में उद्यानिकी फसलों के विकास की संभावना अनुसार अधोसंरचना के विकास संबंधी अनुशंसा की गई है।
कार्य समूह ने विपणन के अंतर्गत प्रदेश में उद्यानिकी फसलों के विपणन के लिये फल-फूल एवं सब्जियों की मंडियों की बड़े पैमाने पर स्थापना की जाने और मंडियों में भंडार गृहों की स्थापना पर जोर दिया है। इसके अलावा मंडियों में पेरिशेबल फसलों के विपणन से पूर्व प्री कूलिंग चेम्बर, ग्रेडिंग तथा पैकिंग इत्यादि की सुविधाओं के साथ ही इलेक्ट्रानिक नीलाम के लिये स्पाट एक्सचेंज की सुविधा उपलब्ध करवाने की अनुशंसा समूह ने की है।
कार्य समूह ने बीज क्षेत्र में राज्य शासन का निवेश बढ़ाने, किसानों को भण्डारण शुल्क में 40 प्रतिशत की छूट देने और उर्वरकों के अग्रिम भंडारण के लिये किसानों द्वारा लिये जाने वाले ऋण पर ब्याज में छूट देने पर भी विचार करने को कहा है।
इस समूह के संयोजक प्रमुख सचिव श्री आर. परशुराम और सचिव मुख्यमंत्री के अपर सचिव श्री विवेक अग्रवाल थे। समूह का प्रस्तुतीकरण प्रमुख सचिव कृषि श्री आई.एन. दाणी ने दिया। प्रस्तुतीकरण की तैयारी में प्रमुख योगदान प्रमुख सचिव जल संसाधन ने दिया।

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Sunday, October 4, 2009

धान की बजाय गेहूं, चना की फसल लगायें : पी.एच.ई. मंत्री श्री बिसेन

प्रदेश में इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा होने के कारण जल विद्युत परियोजनाओं से बिजली उत्पादन में कमी आने की संभावना है। जिसके कारण ग्रीष्म काल में लगाई जाने वाली धान फसल की सिंचाई के लिए किसानों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पायेगी। कम वर्षा के कारण खरीफ फसलों की कमी की पूर्ति रबी फसलों के सघन उत्पादन से करने का प्रयास किया जायेगा।
इसके लिए प्रदेश सरकार ने किसानों को रबी फसलों के बीज अनुदान पर मुहैया कराने का निर्णय लिया है। रबी सीजन में गेहूं की खरीदी पर किसानों को 100 रू. प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया जायेगा। यह बातें म.प्र. शासन के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं सहकारिता मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन ने बालाघाट में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रेखा बिसेन, कलेक्टर डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, पुलिस अधीक्षक श्री हरिनारायणचारी मिश्रा, जिला पंचायत की कृषि समिति के सभापती श्री गन्नूलाल बिसेन तथा कृषि से संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
मंत्री श्री बिसेन ने इस दौरान बताया कि बालाघाट जिले में किसानों द्वारा ग्रीष्म कालीन धान की फसल लगाई जाती रही है। लेकिन इस वर्ष पूरे म.प्र. में औसत से काफी कम वर्षा होने के कारण बिजली का उत्पादन काफी कम होने की संभावना है।
ऐसी स्थिति में गर्मियों के दिनों में धान फसल की सिंचाई के लिए बिजली दे पाना संभव नहीं होगा। बिजली नहीं मिलने पर किसानों की धान फसल सूख सकती है जिसके कारण उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए जिले के किसानों से अपील की गई है कि वे रबी सीजन में ग्रीष्म कालीन धान की फसल न लगायें।
प्रदेश में कम वर्षा के कारण ढूटी सिंचाई परियोजना से भी ग्रीष्म कालीन धान फसल की सिंचाई के लिए पानी नहीं दिया जायेगा। पानी केवल गेहूं की सिंचाई के लिए दिया जायेगा। मार्च से लेकर अप्रैल माह तक ढूटी परियोजना की नहरों की मरम्मत व सुधार का कार्य प्रारंभ कर दिया जायेगा।
मंत्री श्री बिसेन ने जिले के किसानों से कहा है कि वे ग्रीष्म कालीन धान की बजाय गेहूं, चना तथा अन्य दलहन व तिलहन की फसलें लगायें। प्रदेश सरकार ने रबी फसलों के लिए किसानों को गेहूं , चना व अन्य फसलों के बीज बाजार से कम दाम पर दिलाने के लिए बीज अनुदान देने का निर्णय लिया है।
गेहूं की 2165 रू. मूल्य की उंची किस्म का बीज किसानो को मात्र 1465 रू. में तथा 2 हजार रू. मूल्य का बौनी प्रजाति का गेहूं बीज किसानों को मात्र 1300 रू प्रति क्विंटल की दर से दिया जायेगा। इसी प्रकार किसानों को 2725 रू. मूल्य का काबूली चना बीज 1400 रू. प्रति क्विंटल,, 2010 रू. मूल्य का मटर बीज 1030 रू. प्रति क्विंटल, 4150 रू. मूल्य का मसूर बीज 2150 रू. प्रति क्विंटल, 3015 रू. मूल्य का तोरिया बीज 1540 रू. प्रति क्विंटल, 3150 रू. मूल्य का सरसों बीज 1615 रू. प्रति क्विंटल, 3575 रू. मूल्य का अलसी बीज 1825 रू. प्रति क्विंटल, 1400 रू. मूल्य का कुसूम बीज 720 रू प्रति क्विंटल तथा 1500 रू मूल्य का जौ बीज 800 रू. प्रति क्विंटल की दर से प्रदाय किया जायेगा।
मंत्री श्री बिसेन ने बताया कि दलहनी एवं तिलहनी फसलों पर किसानों को एक हजार रू. प्रति क्विंटल बीज अनुदान दिया जायेगा। जिसमें 750 रू. बीज उत्पादक किसान एवं 250 रू संस्था को प्राप्त होगा। 10 वर्ष अवधि की गेहूं की अधिसूचित किस्मों पर 300 रू. प्रति क्विंटल की दर से बीज उत्पादन अनुदान संसथा को दिया जायेगा। आईसोपाम योजना के अंतर्गत रबी सीजन में दलहनी एवं तिलहनी फसलों पर 2 हजार रू अथवा लागत का 50 प्रतिशत प्रति क्विंटल की दर से जो भी कम हो किसान को बीज वितरण पर अनुदान दिया जायेगा। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत गेहूं की समस्त अधिसूचित किस्मों पर 700 रू. प्रति क्विंटल की दर से बीज वितरण अनुदान दिया जायेगा।
मंत्री श्री बिसेन ने बताया कि संस्थाओं के पास उपलब्ध प्रमाणित बीज का न्यूनतम 90 प्रतिशत बीज प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से वितरण करना अनिवार्य है। संस्थायें अधिकतम 10 प्रतिशत बीज का वितरण स्वयं नगद विक्रय कर सकती है।
उन्होंने बताया कि एक किसान को दलहनी/तिलहनी फसलों के लिए अधिकतम 2 हेक्टेयर एवं गेहूं के लिए अधिकतम 5 हेक्टेयर तक के लिए उपयोग में लाये जाने वाले बीज पर ही वितरण अनुदान की पात्रता होगी। कृषि साख समितियों एवं बीज उत्पादक संस्थाओं व समितियों द्वारा वितरित बीज के लिए वितरण अनुदान सीधे उप संचालक कृषि द्वारा प्रदाय किया जायेगा। सहकारी समितियों को पूर्व में स्वीकृत कमीशन 110 रू. यथावत रहेगा।

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Friday, October 2, 2009

मोटे अनाज का उपार्जन 15 अक्टूबर से

प्रदेश में खरीफ साल 2009-10 में समर्थन मूल्य पर मोटे अनाज की खरीदी के लिए तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। उपार्जन का सिलसिला 15 अक्टूबर से शुरू होकर 15 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान धान, ज्वार, बाजरा और मक्का खरीदे जाएंगे। केन्द्र सरकार ने धान कॉमन के लिए 950 रुपए और धान “ए’’ ग्रेड के लिए 980 रुपए प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य घोषित किया है। मोटे अनाज में औसत अच्छी गुणवत्ता के ज्वार, बाजरा और मक्का के लिए समर्थन मूल्य 840 रुपए प्रति क्विंटल रहेगा।
उपार्जन एजेंसियाँ
धान का उपार्जन मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ और मध्यप्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के जिम्मे किया गया है। ज्वार, बाजरा और मक्का की खरीद सिर्फ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम करेगी। उन 11 जिलों में जहाँ धान की फसल प्रमुखत: पैदा की जाती है वहाँ उपार्जन के लिए दोनों एजेंसियों के बीच जिले बाँट दिए गए हैं। अन्य धान उत्पादन वाले जिलों में भी उपार्जन कार्य का युक्तिसंगत बंटवारा किया गया है।
कृषि साख सेवा सहकारी समितियाँ होंगी एजेंट
उपरोक्त दोनों उपार्जन एजेंसियों के लिए धान एवं मोटे अनाज के उपार्जन का काम संबंधित क्षेत्रों की कृषि साख सेवा सहकारी समितियों के जरिए होगा और ये बतौर एजेंट काम करेंगी। इनका मध्यप्रदेश सहकारी समिति अधिनियम 1960 के तहत पंजीबद्ध होना जरूरी होगा। जहाँ ये समितियां नहीं हैं वहां मार्कफेड से जुड़ी पंजीकृत विपणन सहकारी समितियाँ भी बतोर एजेंट धान खरीद सकेंगी। अन्य किसी समिति को यह अधिकार नहीं होगा।
खरीदी का लक्ष्य
धान खरीदी के लिए नागरिक आपूर्ति निगम और सहकारी विपणन संघ को 1-1 लाख मे. टन उपार्जन का लक्ष्य दिया गया है। इसी तरह 50 हजार मे. टन मक्का और ज्वार तथा बाजरा 5-5 हजार मे.टन खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। दोनों उपर्जान एजेंसियाँ इन लक्ष्यों के मुताबिक बारदाना, साख सीमा, भण्डारण और स्टॉफ का इंतजाम करेंगी। खरीदी केन्द्रों का निर्धारण कलेक्टरों की अध्यक्षता वाली समितियाँ करेंगी।
सिर्फ स्थानीय फसल और किसान को ही लाभ
समर्थन मूल्य पर धान तथा मोटे अनाज की खरीद केवल मध्यप्रदेश के किसानों और स्थानीय तौर पर उत्पादित फसल की ही होगी। इसी तरह खरीदी सीधे वास्तविक किसानों से होगी और बिचौलियों का दखल बिल्कुल नहीं रहेगा। संबंधित एजेंसियों और सारे संबंधित जिला कलेक्टरों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

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Thursday, October 1, 2009

चम्बल संभाग में रबी सीजन में एक ही सिंचाई के लिये पानी दिया जा सकेगा

मध्यप्रदेश के चम्बल संभाग में इस वर्ष रबी सीजन में फसलों की सिंचाई के लिये एक ही सिंचाई का पानी दिया जा सकेगा। यह निर्णय पिछले दिनों मुरैना में आयोजित कमिश्नर श्री एस.डी. अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित कलेक्टर कांफ्रेंस में जल उपयोगिता पर विस्तृत चर्चा के बाद लिया गया।
बैठक में निर्णय लिया गया कि पानी की कम उपलब्धता को देखते हुये 45 दिन नहर चलाकर किसानों को एक ही सिंचाई का पानी दिया जा सकेगा। बैठक में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों द्वारा बताया गया कि इस वर्ष हुयी कम वर्षा के कारण राणा प्रताप सागर और गांधी सागर बाँध में जल का कम भराव हो पाया है।
मध्यप्रदेश के चम्बल संभाग के लिये कोटा बेरेज में मात्र 49 एम.ए.एफ. पानी है। इसमें मात्र 45 दिन ही चम्बल नहर चलायी जा सकेगी। बैठक में निर्णय लिया गया कि कोटा बेरेज से रबी फसलों के लिये इस वर्ष एक नवम्बर से पानी छोड़ा जाये और जल संसाधन विभाग का मैदानी अमला नहरों से पानी वितरण की व्यवस्था पर सजग निगरानी रखे।
चम्बल नहर प्रणाली से इस वर्ष रबी में श्योपुर जिले का 30 हजार और मुरैना जिले का 25 हजार हेक्टेयर रकबा सिचिंत किया जा सकेगा। भिण्ड जिले को पगारा और कोतवार बांध से पानी दिया जा सकेगा। पानी की कम उपलब्धता को देखते हुये इस वर्ष पलेवा के लिये पानी नहीं दिया जा सकेगा।

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