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Jai Kisan,Bharat Mahaan


दीक्षांत समारोह

दीक्षांत समारोह
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

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Monday, November 30, 2009

प्रदेश में अब तक 75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोनी हुई

रबी सीजन में किसानों को 7.14 लाख मेट्रिक टन उर्वरक का वितरण
मध्यप्रदेश में इस वर्ष रबी सीजन में किसानों द्वारा 75 लाख 6 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का कार्य किया जा चुका है। इस वर्ष प्रदेश में रबी सीजन में 92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी किये जाने का कार्यक्रम तय किया गया है। प्रदेश के कुछ जिलों में अल्प वर्षा के कारण 84.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोनी की संभावना व्यक्त की गई थी। 
अक्टूबर एवं नवम्बर माह में अच्छी बारिश होने के कारण रबी का 8 लाख हेक्टेयर रकबा और बढ़ा। इस कारण रसायन उर्वरक की मांग बढ़ी। प्रदेश में किसानों को उनकी मांग के अनुसार रसायन उर्वरक मिल सके इसके लिये किसान कल्याण विभाग द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी की अध्यक्षता में मंत्रालय में नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है।
प्रदेश में 75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का कार्य पूरा 92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य
किसानों को 7 लाख मेट्रिक टन से अधिक रसायन का वितरण
गेहूँ की बोनी 35 लाख हेक्टेयर के विरूद्ध 25 लाख हेक्टेयर में पूरी
प्रदेश में अब तक 75 लाख 6 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोनी की गई है। इसमें चना 29 लाख 6 हजार हेक्टेयर, मसूर 6 लाख 30 हजार हेक्टेयर, सरसो 8 लाख 73 हजार हेक्टेयर, गेहूँ 25 लाख 4 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में प्रमुख रूप से बोया जा चुका है। प्रदेश में इन दिनों गेहूँ की बोनी का कार्य तेज गति से चल रहा है। प्रदेश में इस वर्ष रबी सीजन में 35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूँ की बोनी किये जाने का कार्यक्रम तय किया गया है। 
अब तक सर्वाधिक बोनी उज्जैन संभाग में 97 प्रतिशत, सागर संभाग में 93 प्रतिशत, शहडोल जिले में 89 प्रतिशत, रीवा में 85 प्रतिशत, भोपाल में 84 प्रतिशत, चम्बल संभाग में 83 प्रतिशत, ग्वालियर में 81 प्रतिशत, इंदौर में 78 प्रतिशत एवं जबलपुर संभाग में 69 प्रतिशत बोनी का कार्य पूरा किया जा चुका है। नर्मदापुरम् संभाग में बोनी का कार्य किसानों द्वारा तेज गति से किया जा रहा है।
प्रदेश में किसानों को उनकी मांग के अनुसार 7 लाख 14 हजार मेट्रिक टन उर्वरक वितरण किया जा चुका है। इसमें यूरिया 3.28 लाख मेट्रिक टन, डीएपी 2.33 लाख, काम्पलेक्स 39 हजार, सुपर फास्फेट 90 हजार एवं पोटाश 20 हजार मेट्रिक टन वितरित किया जा चुका है। प्रदेश में यूरिया की मांग के अनुपात में पूर्ति हो सके इसके लिये कृषि विभाग के अधिकारी केन्द्रीय रसायन मंत्रालय से लगातार सम्पर्क कर रहे हैं। रसायन उर्वरक के रैक नियमित रूप से जिलों में पहुंच सके इसके लिये रेल मंत्रालय से भी लगातार अनुरोध किया जा रहा है।

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Thursday, November 26, 2009

रसायन उर्वरक किसानों को उपलब्ध कराने के निर्देश

प्रदेश में अब तक 75 लाख हेक्टेयर में बोनी
प्रदेश में रबी सीजन में बोनी का कार्य तेज गति से चल रहा है। प्रदेश में अब तक 75 लाख हेक्टेयर में बोनी किये जाने की खबर है। राज्य में किसानों को उनकी मांग के अनुसार मानक स्तर के रसायन उर्वरक मिल सके इसके लिये कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी ने समस्त कमिश्नर एवं कलेक्टर को पत्र लिखकर इस कार्य में सतत निगरानी रखे जाने के निर्देश दिये हैं।प्रदेश में 25 सितम्बर से 25 नवम्बर तक प्रदेशव्यापी स्तर पर गुण नियंत्रण हेतु सघन अभियान चलाया गया। इस अवधि में अधिकारियों के दल ने संयुक्त रूप से भ्रमण कर अनेक संस्थानों से खाद बीज के नमूने लेकर उनकी मानक की जाँच की। जिलों में एक सितम्बर से 19 नवम्बर तक की अवधि में किसानों को 3.76 मेट्रिक टन डी.ए.पी एवं 4.36 लाख मेट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया जा चुका है। प्रदेश में इस वर्ष रबी सीजन में 92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी किये जाने का कार्यक्रम तय किया गया है।

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Tuesday, November 24, 2009

प्रदेश में अब तक 65 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोनी

   अब तक 3 लाख मेट्रिक टन रसायन उर्वरक का वितरण
मध्यप्रदेश में पिछले दिनों हुई लगातार बारिश के बाद रबी सीजन में बोनी के कार्य में तेजी आई है। प्रदेश में अब तक 65.41 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी किये जाने की सूचना है। रबी सीजन में चना 26.57 लाख हेक्टेयर, मसूर 6.24 लाख हेक्टेयर, गेहूँ 18.54 लाख हेक्टेयर एवं सरसो 8.53 लाख हेक्टेयर में किसानों द्वारा बोया जा चुका है। प्रदेश में इस वर्ष 92 लाख हेक्टेयर में बोनी का कार्यक्रम तय किया गया है।प्रदेश में 65.41 लाख हेक्टेयर में रबी की बोनी का कार्य पूरा। 92 लाख हेक्टेयर में रबी की बोनी का कार्यक्रम
सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों को 3 लाख 4 हजार मेट्रिक टन रसायन उर्वरक का वितरण
प्रदेश के सागर संभाग में 83 प्रतिशत, चंबल संभाग में 79 प्रतिशत, उज्जैन संभाग में 77 प्रतिशत, भोपाल संभाग में 77 प्रतिशत, रीवा में 76 प्रतिशत, ग्वालियर में 68 प्रतिशत, इंदौर में 66 प्रतिशत, शहडोल में 79 प्रतिशत, जबलपुर में 60 प्रतिशत बोनी हुई है। 
प्रदेश में इन दिनों गेहूँ की बोनी का कार्य तेज गति से चल रहा है। प्रदेश में इस वर्ष 38 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूँ की बोनी किये जाने का कार्यक्रम तय किया गया था। राज्य में पूर्व में 84.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोनी किये जाने का कार्यक्रम तय किया गया था। इस वर्ष अक्टूबर माह में हुई बारिश के बाद रबी का संशोधित कार्यक्रम तैयार किया गया।
प्रदेश में इस वर्ष 92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोनी किये जाने का कार्यक्रम तय किया गया। बोनी का 8 लाख हेक्टेयर रकबा बढ़ने से रसायन उर्वरक की मांग भी बढ़ी है। प्रदेश में पिछले पांच हफ्तों में प्रतिदिन 1.25 लाख से 1.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी किसानों द्वारा की गई है।
प्रदेश में किसानों को रसायन उर्वरक किसानों की मांग के अनुसार मिल सके इसके लिये कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी द्वारा मंत्रालय में नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है। किसानों को कितना यूरिया लगेगा उसका आंकलन जिले वार तैयार किया गया है। इसके अनुरूप कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा रेल मंत्रालय को भी नियमित रूप से रैक लगाए जाने का अनुरोध किया गया है। 
प्रदेश में वर्तमान में सहकारी संस्थाओं में 3 लाख 89 हजार 714 मेट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है। इनमें यूरिया एक लाख 69 हजार 999 मेट्रिक टन, सुपर फास्फेट 65 हजार 662 मेट्रिक टन, डीएपी एक लाख 76 हजार 252 मेट्रिक टन, कॉम्पलेक्स इफको 22 हजार 439 एवं पोटाश 8 हजार 362 मेट्रिक टन है। उपलब्ध उर्वरक में से अब तक किसानों को 3 लाख 4 हजार 617 मेट्रिक टन उर्वरक मांग के अनुसार वितरित किया जा चुका है। किसानों को 2 हजार 720 क्विंटल बीजोपचार औषधि का वितरण भी किया जा चुका है।

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Thursday, November 19, 2009

प्रदेश में प्रमाणित बीजों पर 700 रूपये से लेकर 1535 रूपये प्रति क्विंटल तक अनुदान

प्रदेश में गेहूँ का बीज 7 लाख 29 हजार क्विंटल उपलब्ध
प्रदेश में पिछले तीन वर्षों में प्रमाणित बीजों की मात्रा में लगातार वृद्धि करते हुये किसानों को प्रमाणित बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्ष 2007-08 में 11 लाख 57 हजार क्विंटल, वर्ष 2008-09 में 14 लाख 68 हजार क्विंटल प्रमाणित बीज किसानों को वितरित किया गया। इस वर्ष 2009-10 में 19 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज भंडारण करके किसानों को उनकी मांग के अनुसार उपलब्ध कराया जा रहा है।
प्रदेश में इस वर्ष रबी सीजन में 8.81 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध है जो पिछले वर्ष के वितरण से 3 लाख क्विंटल अधिक है। प्रदेश में गेहूँ का बीज 7 लाख 29 हजार क्विंटल उपलब्ध है जो पिछले रबी सीजन में वितरित की गयी मात्रा से 2 लाख 77 हजार क्विंटल अधिक है। इसी तरह रबी सीजन में चना के एक लाख 21 हजार क्विंटल तथा सरसो के 10 हजार क्विंटल बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुये किसानों को वितरण की व्यापक व्यवस्था की गयी है।
रबी 2009-10 में प्रमाणित बीजों के विक्रय दर में अभी तक के इतिहास में सबसे कम रखी जाकर किसानों को अनुदान का अधिकतम लाभ दिया जा रहा है। गेहूँ में 700 रूपए प्रति क्विंटल, चना में 1325 रूपये प्रति क्विंटल तथा सरसो में 1535 रूपये प्रति क्विंटल अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। 
गेहूँ बोनी किस्म के प्रमाणित बीज की दर 1300 रूपये, चना 1400 रूपये एवं सरसो 1615 रूपये प्रति क्विंटल अनुदान घटाकर किसानों के लिये विक्रय की दर निर्धारित की गयी है। प्रदेश में किसानों को सेवा सहकारी समिति के माध्यम से 90 प्रतिशत बीज उपलब्ध कराया जा रहा है।

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Tuesday, November 17, 2009

आकस्मिक बारिश से रबी के उत्पादन के बढ़ने की संभावनाए

ऐसे समय में चना के स्थान पर गेहूँ की बोनी लाभकारी
मध्यप्रदेश के ज्यादातर स्थानों पर हो रही बारिश ने रबी के उत्पादन के बढ़ने की संभावनाएं बढ़ाई हैं। किसान कल्याण विभाग ने लगातार हो रही बारिश को ध्यान में रखकर कृषि सलाह दी है।किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने बताया है कि पूर्व में बोई गई फसलों को इस सीजन में हुई आकस्मिक बारिश ने सिंचाई का लाभ दिया है। आगे भी बिना पलेवा किये गेहूँ बोने की अच्छी संभावनाएं बनी हैं।
प्रदेश में मौसम साफ होने तथा बतर मिलने के बाद रबी की रुकी हुई बुवाई फिर शुरू की जा सकेगी। संचालक कृषि डॉ. डी.एन. शर्मा ने बताया कि कृषि विभाग मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। किसानों को सलाह दी गई है कि बरसात रुकने के बाद खेती के अनुकूल परिस्थिति मिलते ही अधिक से अधिक क्षेत्रफल में बोनी की जाये। किसी भी स्थिति में खेत खाली न छोड़ा जाए।
ऐसे समय में चना के स्थान पर गेहूँ की बोनी करना अधिक लाभकारी है। किसानों द्वारा पूर्व में बोई गई गेहूँ की फसल में यूरिया की टाप ड्रेसिंग बतर आने पर करना चाहिये। इसके लिये फसल की सिफारिशी मात्रा में एक तिहाई हिस्से का बुरकाव करें किन्तु गेहूँ के अलावा किसी अन्य फसल में यूरिया का प्रयोग न करें।
दलहनी तथा तिलहनी फसलों में यदि निचली भूमि में कहीं जल का भराव हो रहा हो तो नाली बनाकर जल निकास की व्यवस्था की जाना चाहिये। इसके अलावा संबंधित फसल का रायजोबियम कल्चर तथा पीएसबी गोबर की खाद में मिलाकर खेतों में बुरकाव करने से लाभकारी जीवाणुओं की संख्या में वृद्धि की जा सकती है। बतर आने पर फसलों की कतारों के बीच ‘हेण्ड व्हील हो’ चलाने से जड़ों तक हवा का संचार होगा, इससे भी पौधों की वृद्धि को बनाये रखने में सहायता मिलेगी।
नये खेतों में जहां बोनी की जा सकती है वहां दलहनी व तिलहनी फसलों में जिप्सम तथा गेहूँ की फसल में जिंक सल्फेट का प्रयोग करना उपयोगी होगा। जैविक खादों का अधिकतम उपयोग भी उत्पादन के लिये किया जाना चाहिये। बोये जाने वाले शत-प्रतिशत बीज का उपचार करने तथा जीवाणु खादों का प्रयोग करने की सलाह भी किसानों को दी गई है।
प्रदेश के अंचलों में पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के संबंध में किसान कल्याण विभाग द्वारा संचालित किसान कॉल सेन्टर में भी किसानों के फोन कॉल्स प्राप्त हो रहे हैं। किसान कॉल सेन्टर के प्रभारी श्री सुरेश मोटवानी ने बताया कि लगातार बारिश से जिन किसानों ने सप्ताहभर पूर्व बोनी की है और उनके खेतों में फसलों के अंकुरण की स्थिति नहीं बनी है उन किसानों को अपने खेतों में पानी निकासी के लिये नाली की व्यवस्था करनी होगी।
इसके अलावा ऐसे किसानों जिन्होंने अब तक बोनी नहीं की है उन्हें 8 से 10 दिन के भीतर खेत तैयार करके गेहूँ की ऐसी किस्म लेना चाहिये जो देर से पकने वाली हों। किसान अपने खेत में गेहूँ की ‘लोकवन किस्म’ बो सकते हैं। लगातार बारिश से दलहनी-तिलहनी विशेष रूप से चने की फसल पर इल्ली के प्रकोप की संभावना बढ़ जाती है।
ऐसी स्थिति में किसानों को बगैर देरी किये फसलों पर जैविक कीटनाशक का छिड़काव करना चाहिये। किसान इस मौसम में अपनी अन्य समस्याओं के निराकरण के लिये टोल फ्री नम्बर 1800-233-4433 पर संपर्क कर सकते हैं। किसान कॉल सेन्टर में कृषि विशेषज्ञ सातों दिन सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक किसानों को आवश्यक कृषि सलाह देने के लिये उपलब्ध रहते हैं। यह काल सेन्टर भोपाल के गंगोत्री भवन में इंडियन सोसायटी ऑफ एग्री बिजनेस प्रौफेशनल्स (आईसेप) द्वारा संचालित हो रहा है।

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Sunday, November 15, 2009

लाख की खेती बनायेगी लखपति

22 हजार पलाश एवं बेर के पेड़ों पर लाख की खेती प्रारंभ
बैतूल जिले में लाख की खेती को प्रोत्साहित करने के लिये जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के अंतर्गत बैतूल में संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र के तकनीकी मार्गदर्शन में लाख का उत्पादन कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है।राष्ट्रीय कृषि परियोजना के अंतर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र बैतूल द्वारा तीन विकासखण्डों आमला, मुलताई एवं बैतूल के तीन-तीन गांवों का चयन किया गया है। इन गांवों के चयनित किसानों के यहां लगभग 22 हजार पलाश एवं बेर के पेड़ों पर लाख की खेती प्रारंभ की गई है। 
लाख एक कीट कोरिया लक्का की कार्यकीय प्रक्रिया द्वारा उत्सर्जित पदार्थ है जो ठोस रूप से एकत्र हो जाता है। सौन्दर्य प्रसाधन, पेंट, इलेक्ट्रानिक उपकरणों, गहनों व दवाइयों आदि में इसका प्रयोग होता है। जिले में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन जंगल को देखते हुए कृषकों के लिये लाख का उत्पादन कम लागत एवं मेहनत में अतिरिक्त आमदनी का जरिया हो सकता है।
जिले में किसानों की परम्परागत फसलों से निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा लाख के उत्पादन का कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। लाख की खेती पलाश, बेर, गटोर आदि के पेड़ों पर होती है। यह पेड़ जिले के इन तीनों विकासखण्डों में बहुतायत में पाये जाते हैं। 
लाख उत्पादन के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी देने के उद्देश्य से पिछले दिनों एक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया जा चुका है। इस प्रशिक्षण में चयनित 9 गांवों के 30 युवा किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को लाख की खेती पर केन्द्रित डाक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई गई। जिन 30 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया है, वे रिसोर्स पर्सन की हैसियत से अपने क्षेत्रों में अन्य किसानों को भी लाख की खेती करने के लिये प्रोत्साहित कर रहे हैं।
कृषि विज्ञान केन्द्र बैतूल से जुड़े कृषि वैज्ञानिक समय-समय पर किसानों के खेतों पर पहुंचकर लाख की खेती की गतिविधियों का अवलोकन कर रहे हैं और उन्हें इससे जुड़े अन्य पहलुओं की भी जानकारी दे रहे हैं।

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Saturday, November 14, 2009

गहरी जुताई के लिये किसानों को ट्रेक्टर एवं पावर टिलर का वितरण

  प्रदेश में  ट्रेक्टरों की संख्या  2 लाख 71 हजार
प्रदेश में खेतों की गहरी जुताई के लिये किसानों को ट्रेक्टर एवं पावर टिलर का वितरण किया जा रहा है।प्रदेश के बड़े एवं मध्यम किसानों को अब तक 388 ट्रेक्टर एवं पावर टिलर का वितरण किया गया है। किसानों को 859 शक्तिचलित एवं स्वचलित कृषि उपकरण भी वितरित किये गये हैं।

इनमें किसानों को रोटावेटर, लेवलर, सीड-कम-फर्टिलाइजर ड्रिल, पोटटो प्लान्टर, रीपर एवं थ्रेशर आदि का वितरण किया गया। किसानों को किसान कल्याण विभाग द्वारा नियमानुसार अनुदान भी उपलब्ध कराया गया। प्रदेश में इस समय ट्रेक्टरों की संख्या लगभग 2 लाख 71 हजार के करीब है।

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Wednesday, November 11, 2009

प्रदेश में 35 हजार से अधिक कृषि यंत्रों का वितरण

अनुदान पर आधुनिक कृषि यंत्रों का वितरण
Bhopal:Tuesday, November 10, 2009 प्रदेश में कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए लघु एवं सीमान्त किसानों को अनुदान पर आधुनिक कृषि यंत्रों का वितरण किया जा रहा है।
प्रदेश में अब तक 36 हजार 587 बेल एवं हस्तचलित कृषि यंत्रों का वितरण किया गया है। इसके अलावा किसानों को 935 शक्तिचलित एवं 399 टेक्टर एवं पावर टीलर यंत्रों का वितरण किया गया है। इन यंत्रों के वितरण पर किसानों को नियमानुसार अनुदान भी उपलब्ध कराया जा रही है।

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किसानों को रबी मौसम में विद्युत प्रदाय के पुख्ता इंतजाम

अधिकतम बोनी वाले क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा विद्युत प्रदाय
Bhopal:Tuesday, November 10, 2009 किसानों को रबी मौसम में विद्युत प्रदाय के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं। अंतिम छोर तक पर्याप्त वोल्टेज के साथ बिजली मिले इसके लिये इस वर्ष नेटवर्क, मरम्मत एवं संचालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में तीन फेस पर औसतन 7.45 घंटे तथा सिंगल फेस पर 2.45 घंटे विद्युत का प्रदाय किया जा रहा है। अधिकतम बोनी वाले क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा विद्युत प्रदाय के प्रयास किये जा रहे हैं।
विद्युत बैंकिंग के तहत पीक डिमांड अवर्स में 200 मेगावाट, 700 मेगावाट दिन में तथा देर रात्रि में 1300 मेगावाट विद्युत अन्य राज्यों से प्राप्त हो रही है।
ऊर्जा विभाग कृषि विभाग से लगातार सम्पर्क बनाये हुए है, जिसके तहत प्रयास है कि अधिकतम बोनी वाले क्षेत्रों में अधिक से अधिक विद्युत प्रदाय किया जा सके। संभागीय मुख्यालयों को औसतन 22 घंटे, जिला मुख्यालयों को 19 घंटे, तहसील मुख्यालयों को 14 घंटे विद्युत का प्रदाय किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि रबी मौसम की बुआई चल रही है, जिसका वर्तमान में विद्युत पम्पों में बिजली की खपत के कारण अधिकतम भार पहुंच गया है। वर्तमान में 24 घंटे विद्युत की मांग 6000 मेगावाट से अधिक बनी हुई है और इसकी पूर्ति के लिये ऊर्जा विभाग द्वारा अधिकतम विद्युत प्रदाय किया जा रहा है।
इसी प्रकार ताप विद्युतगृह का उत्पादन अधिकतम 2436 मेगावाट तक पहुंच गया है। इन्दिरा सागर को अधिकतम चलाया जा रहा है, जिसके डाउन स्ट्रीम में ओंकारेश्वर, विद्युतगृह से 200 मेगावाट का उत्पादन तथा सरदार सरोवर से 240 मेगावाट का उत्पादन हो रहा है। सरदार सरोवर का उत्पादन और बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। गुजरात सरकार के अनुरोध पर इसके जलाशय का लेवल भी बढ़ाया जा रहा है।
केन्द्रीय उपक्रमों से 1720 मेगावाट विद्युत प्राप्त हो रही है। वर्तमान में केन्द्रीय क्षेत्र के 220 मेगावाट के काकरापार तथा विंध्याचलगृह की 210 मेगावाट की इकाई वार्षिक रख-रखाव के चलते योजनाबद्ध तरीके से बंद है, जिसके कारण 110 मेगावाट की कमी हो रही है।

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Tuesday, November 10, 2009

कृषि योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचे राज्यमंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह

बुंदेलखण्ड क्षेत्र में अपार नदी संपदा
Bhopal:Monday, November 9, 2009: किसान कल्याण एवं कृषि विकास राज्यमंत्री श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने आज मंत्रालय में किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग का कार्यभार ग्रहण किया। उनके द्वारा कार्यभार ग्रहण किये जाने के समय किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया, लोक निर्माण मंत्री श्री नागेन्द्र सिंह, राज्य कृषक आयोग के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र पाठक, विधायक श्री दीपक जोशी, पूर्व पार्षद आलोक शर्मा एवं बुंदेलखण्ड क्षेत्र के अनेक जन-प्रतिनिधि मौजूद थे।
श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद कहा कि उनका प्रयास होगा कि कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ जरूरतमंद किसानों तक आवश्यक रूप से पहुंचे। श्री सिंह ने कहा कि बुंदेलखण्ड क्षेत्र में अपार नदी संपदा है लेकिन इसके बावजूद इन नदियों का खेती-किसानी के लिये सिंचाई के तौर पर उपयोग नहीं हो पा रहा है।
उनके द्वारा इस दिशा में भी विशेष प्रयास किये जायेंगे। कृषि विकास राज्यमंत्री श्री सिंह ने कहा कि वे प्रदेश के विभिन्न अंचलों में जाकर छोटे किसानों की दिक्कतों को उनके खेतों में पहुंचकर समझेंगे। इसके आधार पर वे कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में विशेष ध्यान देंगे।

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प्रदेश में किसानों को मांग के अनुरूप खाद मिले

डी.ए.पी. के रेक प्रदेश में नियमित लगवाये जाने की व्यवस्था
Bhopal:Monday, November 9, 2009: प्रदेश में इस वर्ष रबी सीजन में बोनी का कार्य तेज गति से चल रहा है। प्रदेश में अब तक 60 से 65 प्रतिशत बोनी किये जाने की सूचना है।
किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा किसानों को उनकी मांग के अनुरूप खाद एवं बीज की आपूर्ति होती रहे इस ओर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश में रबी का सामान्य क्षेत्र 84 लाख हेक्टेयर है। इस वर्ष अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में अच्छी बारिश होने के कारण रबी के क्षेत्रफल में 8 लाख हेक्टेयर की और वृद्धि हुई है। इसकी वजह से किसानों में खाद की मांग ज्यादा बढ़ी है।
विभाग के अधिकारियों द्वारा केन्द्र सरकार के कृषि मंत्रालय एवं रसायन मंत्रालय में खाद की आपूर्ति नियमित किये जाने के संबंध में लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। विभाग के प्रयासों से नवम्बर माह में डी.ए.पी. एक लाख 19 हजार मैट्रिक टन, एन.पी.के. 48 हजार मैट्रिक टन एवं यूरिया का 3 लाख 7 हजार मैट्रिक टन का आवंटन प्राप्त हुआ।
राज्य को प्राप्त फर्टिलाईजर का वितरण प्रदेश के जिलों में समय पर हो सके इसके लिये विभागीय अधिकारियों द्वारा रेल मंत्रालय के अधिकारियों से लगातार सम्पर्क किया जा रहा है। रेल मंत्रालय से अनुरोध किया गया है कि वे प्रतिदिन 8 रेक डी.ए.पी. और एन.पी.के. तथा यूरिया की 5 रेक प्रतिदिन की दर पर व्यवस्था करें। रेल मंत्रालय के अधिकारियों ने कृषि विभाग के अधिकारियों को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है। किसानों को शत-प्रतिशत प्रमाणित बीज उपलब्ध कराया जा रहा है।

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Monday, November 9, 2009

प्रदेश में 55 से 60 प्रतिशत बोनी हुई

प्रदेश में खाद-बीज का पर्याप्त भंडार
कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी ने कहा है कि रबी सीजन वर्ष 2009-10 में प्रदेश में निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध 55 से 60 प्रतिशत बोनी हो चुकी है। प्रदेशभर से मिल रही सूचनाओं के अनुसार कुल मिलाकर पौने दो लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रोजाना बोनी हो रही है।
इस प्रकार पन्द्रह-बीस दिनों में बोनी का निर्धारित लक्ष्य पूरा होने का अनुमान है। प्रदेश में रबी सीजन के लिये किसानों को उनकी मांग के अनुसार खाद, बीज, अन्य आदान उपलब्ध कराये जाने की पूरी व्यवस्था है। इसकी रणनीति डेढ़-दो माह पूर्व ही तैयार कर ली गयी थी।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि प्रदेश में खाद और बीज का पर्याप्त भंडार है। सभी संभागायुक्तों और जिला कलेक्टरों को किसानों को उनकी मांग के अनुसार खाद, बीज आदि की वितरण व्यवस्था सुचारू रूप से सम्पन्न कराने के निर्देश दिये गये हैं।
बीज पर सरकार द्वारा निर्धारित सब्सिडी भी प्रदान की जाती है। कृषि विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिये गये हैं कि वे किसानों को बोनी के लिये खाद, बीज उपलब्ध कराने के कार्य को चुनौती के रूप में लें। वे यह भी सुनिश्चित करें कि किसानों को सरकार से मिलने वाली सहायता और रियायत का लाभ मिल सके और बोनी का निर्धारित लक्ष्य भी समय पूरा हो सके।
राज्य शासन द्वारा जिला कलेक्टरों को खाद की काला बाजारी करने वालों पर कड़ी निगाह रखने और काला बाजारी करते पाये जाने पर कड़ी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिये गये हैं। श्रीमती चौधरी ने कहा कि प्राय: असामाजिक तत्व खाद की कमी का नकली संकट खड़ाकर काला बाजारी करते हैं।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस समय प्रदेश में खाद और बीज की कमी नहीं है बल्कि प्रदेश में आवश्यकतानुसार खाद, बीज का पर्याप्त भंडार है। कलेक्टरों को कहा गया है कि उनके प्रभार के जिलों में खाद, बीज, अन्य आदान पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं, वे किसानों की मांग के अनुरूप उनकी बिक्री और वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित करायें।

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Sunday, November 8, 2009

रबी मौसम में विद्युत प्रदाय के लिये कंट्रोल रूम की स्थापना

अस्पताल तथा न्यायालय विद्युत कटौती से मुक्त
Bhopal:Saturday, November 7, 2009:Updated 17:35IST प्रदेश में किसानों को रबी मौसम में सिंचाई के लिये विद्युत प्रदाय के लिये सभी आवश्यक तैयारियां की गई हैं। रबी मौसम में विद्युत कम्पनी स्तर पर कंट्रोल रूम की स्थापना भी की गई है। किसान रबी फसलों का पलेवा कर सकें इसे देखते हुए शासन द्वारा विशेष प्रयास किये जा रहे हैं।
सभी मुख्य ताप विद्युतगृहों का रख-रखाव कार्य भी पूर्ण कर लिया गया है। विद्युत बैंकिंग के तहत 700 मेगावॉट बिजली दूसरे राज्यों से प्राप्त की जा रही है। यह प्रदेश अपने उत्पादन गृहों से कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि रबी मौसम में अतिरिक्त बिजली खरीदे बिना विद्युत का प्रदाय किया जा रहा है।
ऐसी स्थिति चार साल में पहली बार बनी है। यह संभव हुआ है विद्युत के बेहतर प्रबंध के चलते। इसी प्रकार विद्युत के नेटवर्क पर विशेष ध्यान दिये जाने के साथ ही अपव्यय को भी रोका गया है।
संभागीय मुख्यालय, जिला, तहसील तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत प्रदाय के लिये समय भी निर्धारित किया गया है। प्रदेश की राजधानी भोपाल को विद्युत कटौती से मुक्त रखा गया है। राजधानी के जिन फीडरों पर राजस्व प्राप्त नहीं हो रहा है केवल उन्हीं फीडरों पर विद्युत कटौती की जा रही है।
साथ ही प्रदेश के अस्पताल तथा न्यायालय भी विद्युत कटौती से मुक्त रखे गये हैं। रबी मौसम में नवम्बर माह के दौरान प्रदेश के संभागीय मुख्यालयों में 20 घंटे, जिला मुख्यालयों पर 18 घंटे, तहसील मुख्यालयों पर 14 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 10 घंटे विद्युत प्रदाय की जायेगी।
विद्युत वितरण एवं पारेषण नेटवर्क के तहत 220 के.व्ही., 33 के.व्ही. तथा 11 के.व्ही. निम्न दाब लाईनों तथा उपकेन्द्रों का रख-रखाव कार्य करीब-करीब पूर्ण कर लिया गया है। साथ ही जिन फीडरों पर विगत 12 माह में विद्युत प्रदाय संतोषजनक नहीं हुआ है अथवा बार-बार व्यवधान आया है उन फीडरों का प्राथमिकता पर रख-रखाव किया गया है।
रबी मौसम शुरू होने के पूर्व समस्त वितरण ट्रांसफार्मरों का भौतिक सत्यापन कर उनमें आईल की कमी तथा तकनीकी त्रुटियों का निदान भी किया गया है। सभी जले/खराब ट्रांसफार्मरों को निर्धारित समय-सीमा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में किसी भी माध्यम से प्राप्त सूचना के 72 घंटे एवं शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे के पूर्व बदले तथा जले हुए ट्रांसफार्मरों को बिना किसी विलंब के दुरुस्त कराकर चालू किया जाना सुनिश्चित किया जा रहा है।
विद्युत कटौती की अवधि में ही जले/खराब वितरण ट्रांसफार्मर बदले जा रहे हैं जिससे विद्युत प्रदाय की घोषित अवधि में अवरोध उत्पन्न न हो।
सिंचाई के लिये कृषकों को अस्थाई कनेक्शन प्रदान करने में विलंब न हो यह सुनिश्चित किया जा रहा है। वितरण ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा के लिये पूर्व में गठित ग्राम सुरक्षा समितियों को पुनर्जीवित कर ग्रामीणों का सहयोग प्राप्त करने के लिये निर्देश दिये गये हैं।
सभी 33/11 के।व्ही. उपकेन्द्रों में स्थापित कैपेसिटर बैंक को सुधारा गया है। विद्युत बिलों की गड़बड़ी के निराकरण के लिये समय-समय पर विभिन्न स्थानों पर विद्युत पंचायत भी आयोजित की जा रही है। प्रत्येक ग्राम पंचायत, कोटवारों, उत्साही ग्रामीणों से सहयोग प्राप्त कर सूचना तंत्र विकसित किया जा रहा है, जिससे ट्रांसफार्मर खराब तथा लाईन काटने, कंडेक्टर चोरी करने इत्यादि की जानकारी तुरंत प्राप्त हो सके तथा कम से कम अवधि में व्यवस्था बहाल की जा सके।
कम्पनी स्तर पर कंट्रोल रूम की स्थापना
रबी मौसम में कम्पनी स्तर पर कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है। इसके तहत अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है ताकि तुरंत व्यवस्था बहाल करने में सुचारु रूप से कार्य किया जा सके। विद्युत उपकेन्द्रों का उच्च अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया जा रहा है।

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Thursday, November 5, 2009

किसानों को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बिजली दी जाये

ऊर्जा मंत्री द्वारा विभागीय गतिविधियों की समीक्षा
Bhopal:Wednesday, November 4, 2009:Updated 18:42IST ऊर्जा, खनिज साधन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री राजेन्द्र शुक्ल ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि रबी मौसम में किसानों को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बिजली की आपूर्ति की जाये। उन्होंने पारेषण और वितरण पर कड़ी निगाह रखने और बिजली चोरी को सख्ती से रोकने के निर्देश दिये हैं।
श्री शुक्ल आज राज्य मंत्रालय में ऊर्जा विभाग की गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। इस अवसर पर ऊर्जा सचिव श्री एस.पी.एस. परिहार, अध्यक्ष एवं प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश विद्युत क्षेत्र वितरण कम्पनी भोपाल श्री संजय शुक्ल भी उपस्थित थे।
बैठक में विद्युत उपलब्धता एवं प्रदाय की स्थिति, रबी मौसम के लिये वितरण ट्रांसफार्मरों की व्यवस्था, विद्युत उत्पादन क्षमता वृद्धि के लिये भविष्य का कार्यक्रम एवं प्रगति, क्षमता वृद्धि के लिये जारी नीतियां, वर्तमान में स्थापित विद्युत इकाईयों की दक्षता बढ़ाने के लिये कार्यक्रम, कृषक राहत योजना, बोर्ड की वित्तीय स्थिति, कोयले की उपलब्धता की स्थिति, सिंगाजी तथा सारणी ताप विद्युतगृह में इकाईयों के लिये कोयले की व्यवस्था, एनटीपीसी तथा बीएचईएल के साथ समझौता ज्ञापन संबंधी विषयों तथा एमओयू के संदर्भ में बनाई जा रही नीति की विस्तार से समीक्षा की।
बैठक में श्री शुक्ल ने कहा कि विद्युत का वितरण सही ढंग से हो। उन्होंने कहा कि किसानों को रबी मौसम में तय कार्यक्रम के अनुसार निर्बाध रूप से लगातार छह घंटे बिजली मिले इसके पुख्ता इंतजाम किये जायें। श्री शुक्ल ने कहा कि बिजली चोरी को रोकने के लिये और अधिक कारगर उपाय करने की जरूरत है।
ऊर्जा राज्यमंत्री ने राजस्व बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने इसके लिये विभागीय अमले को पूरी तत्परता से कार्य करने को कहा। श्री शुक्ल ने प्लान्ट लोड फेक्टर बढ़ाने तथा पारेषण हानि कम करने की जरूरत पर भी बल दिया।
बिजली कटौती की समीक्षा करते हुए ऊर्जा राज्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि बिजली कटौती अघोषित न होकर तयशुदा समय के अनुसार की जाये जिससे लोगों को असुविधा न हो।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिये किये जा रहे सुनियोजित प्रयासों को और गति दी जाये जिससे कि प्रदेश बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो सके। इस संबंध में निजी क्षेत्र के साथ किये गये अनुबंधों को भी तेजी से लागू करने के उन्होंने निर्देश दिये।
श्री शुक्ल ने कहा कि लोगों को बिजली की बचत करने के संबंध में प्रभावी रूप से शिक्षित और जागरूक किया जाये तथा गुणवत्तापूर्ण बिजली की आपूर्ति की जाये। इन दोनों उपायों से उपलब्ध बिजली का श्रेष्ठतम उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। उन्होंने बिगड़े ट्रांसफार्मरों को शीघ्र सुधारने के भी निर्देश दिये।
सचिव ऊर्जा श्री एस.पी.एस. परिहार ने बैठक में विभागीय गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले छह वर्षों में प्रदेश की स्थापित क्षमता में दोगुनी वृद्धि हुई है। वर्ष 2004 में स्थापित क्षमता करीब 2900 मेगावॉट थी जो अब बढ़कर छह हजार मेगावॉट से ऊपर हो गई है।
इस दौरान 3147 मेगावॉट की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने रबी सीजन में किसानों को बिजली प्रदाय किये जाने के लिये बनाये गये प्लान की जानकारी दी। श्री परिहार ने बताया कि केन्द्रीय क्षेत्र से प्रदेश को दो हजार मेगावॉट बिजली मिलना चाहिये जिसके विरुद्ध सिर्फ 16-17 सौ मेगावॉट बिजली मिल रही है।
श्री परिहार ने बैठक में पीएलएफ, टीएनडी लास, ग्रामीण विद्युतीकरण, विद्युतगृहों, विद्युत परियोजनाओं, ट्रांसफार्मर, बिजली के दक्षतापूर्ण उपयोग, गैर-परम्परागत ऊर्जा की परियोजनाओं आदि के विषय में विस्तार से बताया। उन्होंने फीडर सेपरेशन के संबंध में भी जानकारी दी।
अध्यक्ष एवं प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी भोपाल श्री संजय शुक्ल ने भी अपनी कम्पनी के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।

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एक लाख क्विंटल से अधिक बीज का वितरण

रबी सीजन में बोनी के कार्य में तेजी
Bhopal:Wednesday, November 4, 2009:Updated 18:28IST प्रदेश में इस वर्ष रबी सीजन में बोनी के कार्य में तेजी आयी है। बोनी में आयी तेज गति को देखते हुये किसानों को उनकी मांग के अनुसार प्रमाणित बीज का वितरण किसान कल्याण एवं कृषि विभाग द्वारा सुनिश्चित किया जा रहा है।
प्रदेश में रबी वर्ष 2009-10 के लिये 8 लाख 76 हजार क्विंटल बीज वितरण का कार्यक्रम तय किया गया है, जो पिछले वर्ष के वितरण से तीन लाख क्विंटल अधिक है। प्रदेश में संस्थागत स्त्रोतों से 4.93 लाख क्विंटल तथा निजी स्त्रोतों से 3.92 लाख क्विंटल इस प्रकार कुल 8 लाख 85 हजार क्विंटल बीज उपलब्ध है। उपलब्ध प्रमाणित बीज में गेहूँ बोनी किस्म 7.12 लाख क्विंटल शामिल हैं।
प्रदेश में अभी तक एक लाख 95 हजार क्विंटल बीज संस्थागत स्त्रोतों से एवं एक लाख 81 हजार क्विंटल बीज निजी स्त्रोतों से बीज विक्रय केन्द्रों पर उपलब्ध कराया गया है। इन केन्द्रों से किसान अपनी जरूरत के अनुसार बीज प्राप्त कर रहे हैं।
सहकारी संस्थाओं में गेहूँ बीज 61 हजार 992 एवं चना बीज 32 हजार 622 क्विंटल कुल 94 हजार 614 क्विंटल बीज का भंडारण किया गया है। किसानों को गेहूँ 61 हजार 92, चना 42 हजार 80 इस प्रकार कुल एक लाख तीन हजार 172 क्विंटल प्रमाणित बीजों का वितरण अब तक किसानों को किया गया है।

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