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Wednesday, July 30, 2008

कमलिया कीट - खरीफ की फसल का दुश्मन नम्बर वन..

बुंदेलखण्ड क्षेत्र मे काफी समय बाद अच्छी बारिश होने की वजह से किसानों के चेहरे खिल गए हैं। खरीफ के सीजन मे अच्छी फसल लेने की आस से वे काम मे जुट गए हैं। लेकिन फसलों को कीटों से बचाने के लिए भी खास ध्यान देने की जरुरत है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक इस सीजन मे फसलों को कमलिया कीट से बचाना होता है। बोलचाल की भाषा मे किसान इसे घोषला, कुहरा या कंबल कीड़ा कहते हैं। यह कीड़ा भरपूर बारिश होने के कुछ समय बाद नदी-नालों के पास लगी पत्तियों पर अण्डे दे देता है। पूरे शरीर पर घने काले बालों से ढ़के रहने की वजह से ही यह कमलिया कीड़ा कहलाता है।
उपसंचालक कृषि आईपी पटेल ने बताया कि यह कीट बहू फसल भक्षी कीट है। यह मक्का, ज्वार, उड़द, मुंग, तिल, सन व सोयाबीन की फसलों को काफी नुकसान पहुंचाता है। हल्के पीले रंग के चमकीले अण्डों मे से निकलते समय इसका आकार छोटा व रंग भूरा होता है। लेकिन बड़ी इल्ली बनने पर इनका रंग काला व पीला हो जाता है। परिपक्व होने के बाद ये इल्लियां जमीन के अंदर प्रवेश कर रेशमी जाल बनाकर कत्थई रंग की शंखिंयों मे बदल जातीं हैं और फिर मेढ़ों के आसपास के छायादार पेड़ों की जड़ों मे घुस जातीं हैं।
श्री पटेल के मुताबिक इस कीट पर नियंत्रण की तीन उपाय हैं- जैविक, यांत्रिक व रसायनिक। जैविक उपायों के तहत नीम के तेल या पत्तियों का प्रयोग किया जाता है। इसमें 15 लीटर पानी मे 75 मिमी नीम का तेल मिलाकर पंप से प्रभावित फसल पर छिड़काव किया जाता है या फिर नीम की पत्तियों को दस गुना पानी मे चार से पांच दिन के लिए भिगोकर रख देते हैं बाद मे उसी पानी का फसलों पर छिउ़काव करते हें। इसके अलावा 5 लीटर मठे मे एक किलो नीम की पत्ती व धतूरे के पत्ते डालकर 10 दिन तक सड़ने दें या फिर 5 किलो नीम की पत्तियों को 3 लीटर पानी मे तब तक उबालें जब तक घोल की मात्रा घटकर आधी न रह जाए, फिर इसे 150 लिटर पानी मे घोलकर छिड़काव करें।
यांत्रिक उपाय मे खेत मे प्रकाश प्रपंच लगाएं ताकि वयस्क कीट आकर्षित हो सकें। फिर शुरुआती अवस्था मे ही इन्हें पत्तियों सहित तोड़कर नष्ट कर दें।
रसायनिक उपाय में इण्डोसल्फान 35ईसी 1000-1250 मिली प्रति हैक्टेयर, इण्डोसल्फान 4 मिलि, क्यूनालफास 1.5 मिली, पेराथयान 2 मिली, डक्ट 25 किग्रा० प्रति हैक्टैयर व क्लोरोपायरीफास 20 मिली, इसी 1250-1500 मिली प्रति हैक्टेयर की दर से छिड़काव करके इस कीट से बचा जा सकता है।

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Tuesday, July 29, 2008

बुंदेलखण्ड मे फिर अफलन का शिकार हो सकती है सोयाबीन ..


बुंदेलखण्ड मे सोयाबीन की फसल पर इल्लियों का हमला हो रहा है। पिछले हफ्ते कृषि वैज्ञानिकों ने सागर जिले की बण्डा तहसील के कुछ गांवों के दौरे किया। जहां उन्हें सोयाबीन की फसलें सेमीलूपर, गर्डलवीटल व अन्य कीटों के हमले से ग्रस्त मिलीं।
क़ृषि वैज्ञानिक एचएस राय ने बताया कि बण्डा विकासखण्ड के ग्राम फतेहपुर मौजा, झारगी, दलपतपुर, बेई, अमरमऊ व बीला मे सोयाबीन के उन खेतों मे कीटों का प्रकोप ज्यादा देखने को मिला जिनमें बुवाई परंपरागत ढंग से की गई थी। ऐसे खेतों की 30 से 40 फीसदी तक सोयाबीन की फसल पर कीटों का प्रकोप है। लेकिन जिन खेतों मे किसानों ने सोयाबीन की बुवाई 45 सेमी कतार से कतार की दूरी पर की है उन खेतों मे केवल 5 से 10 फीसदी फसल पर कीटों का हमला देखने को मिला है।
इल्लियों की चपेट मे आई सोयाबीन की फसल के उपचार के सिलसिले मे कृषि विकास अधिकारी एके पाठक ने बताया कि पत्ती खाने वाले कीडों, तना छेदक, गर्डलवीटल एवं सफेद मक्खी के लिए टाईजोफोस 40ईसी 800एमएम दवा प्रति हैक्टेयर के हिसाब से 600 से 700 लीटर पानी के घोल बनाकर छिडकाव किया जाना चाहिए।
लेकिन सिर्फ पत्ती खाने वाले कीडों के लिए क्विनलाफास 1.5 लीटर या क्लोरपायरी फास 1.5 लीटर या इण्डोसल्फान 1 लीटर या मेथोनिल 40एसपी एक किलो प्रति हैक्टेयर मे 600 से 700 लीटर पानी मे घोल बनाकर छिडकाव करना फायदेंमंद होगा। अगर एक बार कीटनाशक दवा के छिडकाव के बाद भी कीट का प्रकोप नजर आता है तो किसान भाई दवा बदलकर 15 दिन के बाद दोबारा छिडकाव करें।
कृषक वैज्ञानिक एचएस राय ने बताया कि गर्डलवीटल से प्रभावित पौधों के भागों को निकालकर, मसलकर मिट्टी मे नष्ट कर दें तथा नीम तेल 5 एमएल प्रति लीटर पानी मे घोल बनाकर 400 से 500 लीटर का घोल प्रति हैक्टैयर के हिसाब से छिडकाव करें।
इसके अलावा जांच दल ने इन कीटों के हमले से सोयाबीन की फसल बचाने के लिए एक अन्य उपाय भी किसानों को बताया। जिसके मुताबिक किसान तीन खाली मटकों का इंतजाम करे तथा एक एक मटके मे गौ मूत्र, गाय का मठा व नीम की पत्तियां 5 से 10 लीटर पानी भरकर डालें और मटकों को जमीन में गाड दें। फिर 15 से 20 दिनों के बाद हर मटके मे से 3-3 लीटर घोल लेकर उसे 100 से 150 लीटर पानी मे मिलाकर प्रति एकड क्षेत्र के हिसाब से 10 दिन के अंतराल पर 3 छिडकाव करें।
इसी सिलसिले मे कृषि वैज्ञानिक श्री रावत ने बताया कि जिन किसानों के खेतों मे सोयाबीन की फसल पर कीटों के हमले का असर कम है वे ऐहतियात के तौर पर अपने खेतों मे चिडियों को बैठने के लिए सूखी झाडियां या टी आकार की 20 से 25 लकडी प्रति हैक्टेयर खेत में लगाएं। इन्होने किसानों को चेताया कि अगर समय रहते इन कीटों का उपचार नहीं किया तो सोयाबीन की फसल बुंदेलखण्ड मे इस बार फिर अफलन का शिकार हो सकती है।

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Saturday, July 26, 2008

खेती को मुनाफे के धंधे मे बदल कर ही दम लेगी सरकार-सीएम

प्रदेश सरकार खेती को घाटे के सौदे से मुनाफे के धंधे मे बदलकर ही दम लेगी। यह बात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को सागर जिले की खुरई तहसील मे विकास सम्मेलन मे करीब 10 हजार लोगों को संबोधित करते हुए कही। इसी सिलसिले मे श्री चौहान ने कहा कि खेती की लागत को कम व उत्पादन बढा कर ही यह लक्ष्य पूरा कर पाएगी। अबतक खेती की लागत घटाने की दिशा मे प्रदेश सरकार ने किसानों के बिजली के बकाया बिलों का अधिभार माफ कर‍ने के साथ उन्हें पहले की 1.20 प्रति यूनिट की जगह 0.75 पैसे प्रति यूनिट की दर से देना शुरु किया हे।
इसके अलावा किसानों से प्रदेश मे की गई गेहूं की खरीद मे प्रति क्विंटल 100 रुपए का बोनस भी दिया गया है। सहकारी बैंको से किसानों को मुहैया कराए जाने वाले कर्ज पर ब्याज 16 फीसदी से घटा कर 5 फीसदी कर दिया है। जो प्रदेश मे भाजपा की सरकार दोबारा बनने पर घट कर 4 फीसदी कर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने सरकार की गरीबों के कल्याण की सर्वोच्च प्राथमिकता का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में गरीबों को सस्ती दरों पर खाद्यान्न मुहैया कराने के लिए अन्नपूर्णा योजना शुरु की गई है। इसके तहत हर गरीब परिवार को 3 रुपए किलो गेहूं व 4.5 रुपए किलो चावन मुहैया कराया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश मे 23 हजार मेटिक दन गेहूं भण्डारित किया गया है। इस योजना मे हेरफेर करते पाए जाने लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जेल भेजने की सख्त कार्य्रवाही करने के निर्देश दिए गए हैं।

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Friday, July 25, 2008

31 जुलाई तक होगा राहत राशि चैकों का वितरण

सागर जिले मे पाला व तुषार से हुई फसलों के नुकसान संबंधी राहत राशि के चैकों से पैसा निकालने की तारीख आगे बढा दिया है। जिला कलेक्टर हीरालाल त्रिवेदी ने बताया कि सभी बैंको व तहसीलदारों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे राहत राशि के चैकों के वितरण व भुगतान करने के काम 31जुलाई तक पूरे कर ले।

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कीट व्याधि नियंत्रण केन्द्र स्थापित..

सागर जिले मे वर्ष 2008-09 मे खरीफ एवं रबी कीट व्याधि नियंत्रण हेतु जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है। उप संचालक कृषि आईपी पटेल ने बताया है कि यह प्रकोष्ठ सुबह साढे दस बजे से शाम साढे पांच बजे तक कार्यालयील दिनों मे खुला रहेगा।

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Tuesday, July 15, 2008

kheti

आज के तकरीबन सभी अखबार की भ्रष्टाचार की खबरों से रंगे रहे। नवदुनिया ने बारिश ने खोली सड़कों की पोल शीर्षक से सागर शहर की डिंपल पेट्रोल पंप से राधा टॉकीज तिराहा तक करीब 21 लाख रुपए में बनी माल गोदाम सड़क व एक्सीलेंस स्कूल से पीली कोठी तक दो लाख रुपए की लागत से बनी संड़को का पहली ही बारिश मे बह जाने को पहली खबर बनाया है।

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