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दीक्षांत समारोह

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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

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Friday, October 17, 2008

डीएपी खाद की किल्लत होने के आसार...

खाद बीज के पर्याप्त भंडारण किए जाने के कृषि के विभाग के तमाम दावों के बावजूद प्रदेश भर से किसानों के खाद बीज के संकट से जूझने की खबरें रहीं हैं। सागर के किसान भीऐसी किल्लत से महफूज नहीं हैं। जिला मुख्यालय के आस पास अच्छे हो सकते हें लेकिन तहसील व विकासखण्ड स्तर से खाद की किल्लत होने की आवाजें लगातार उठ हीं हैं।

किसान डीएपी खाद नहीं मिलने की वजह से परेशान हो रहे हें। खाद का अपर्याप्त भडारण किए जाने के वजह से यह न तो सहकारी समितियों मे उपलब्ध है और नहीं खुले बाजार में।
कृषि विभाग के मुताबिक रबी सीजन मे दलहन फसलोंचना और मसूर के बेहतर उत्पादन के लिए डीएपी खाद फास्फोरस की ज्यादा मात्रा मौजूद होने की वजह से ज्यादा फायदेमंद साबित होती है। अभी तक सागर, रीवा, भोपाल व ग्वालियर संभाग के किसानों से खाद की किल्लत होने की शिकायतें मिलीं हैं।
संचालिक कृषि मप्र के मुताबिक खाद की थोड़ी बहुत कमी तो हरदम बनी रहती है। सरकार ने पूरे इंतजाम किए है। भारत सरकार से रैक आने में एक दो दिन की देरी होने की वजहसे किसानों को थोड़ी किल्लत महसूस हो रही है।
गौरतलब है कि इस साल रबी सीजन मे 4 लाख 65 हजार 51 मीट्रिक टन डीएपी खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है। इसमें विपणन संघ के माध्यम से 1 लाख 96 हजार 576 मीट्रिक टन, एमपी एग्रो के माध्यम से 34 हजार 690 मीट्रिक टन और निजी तौर पर 2 लाख 33 हजार 781 मीट्रिक टन डीएपी खाद किसानों को बेची जानी है। लेकिन फिलहाल किसानों को इसकी कमी का सामना पड़ रहा है।

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Sunday, October 5, 2008

मप्र के किसानों को मिला कृषक कल्याण योजना का तोहफा..


मप्र के किसानों तथा खेती पर आधारित काम धंधों के सहारे जीवन गुजारने वाले व्यक्तियों को समाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने 'मुख्यमंत्री कृषक जीवन कल्याण योजना' लागू की है।
इस योजना का लाभ उन सभी लोगों को मिलेगा जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप मे खेती आधारित कामों मे लगे हैं। कृषि यंत्रों का उपयोग करते समय, सिंचाई कार्य हेतु कुआं खोदते समय, ट्यूबवेल स्थापित या संचालित करते समय, बिजली का करंट लगने या फल-सब्जियों पर रसायनिक दवाईंयों का छिड़काव करते समय हुए हादसे मे मौत या अंग-भंग होने पर पीड़ित को इस योजना का लाभ मिल सकेगा।
इसके अलावा मण्डी के अहाते या मण्डी अधिनियम के तहत प्राधिकृत व राज्य शासन द्वारा घोषित क्रय केन्द्रों पर कृषि उपज की बिक्री के समय, बोरियों का ढेर लगाते समय, मंडी अहाते मे ट्रेक्टर या बैलगाड़ी के पलटने, घर से खेत जाते समय, कुट्टी की मशीन या कृषि संयंत्रों मे बाल फंस जाने, खेती की रखवाली, पशुओं की चराई आदि के कार्यों के दौरान हुए हादसों मे मौत या अंग-भंग होने के हालात मे भी इस योजना का लाभ किसानों व खेती कार्य मे लगे लोगों को मिलेगा।
इस योजना के तहत क्षतिपूर्ति लाभ लेने के लिए हितग्राही या हितग्राही के परिवार के सदस्य या निकट संबंधी को जिले के कलेक्टर के यहां आवेदन करना होगा।

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Thursday, October 2, 2008

सागर जिले मे रबी सीजन मे नहीं होगी खाद-बीज की कमी-कलेक्टर

सागर जिले मे इस साल अच्छी बारिश हुई है। इससे किसानों व कृषि विभाग दोनों ने ही पिछले साल की तुलना मे ज्यादा रकबे मे रबी की फसल लेने की तैयारी कर रहे हैं। इसी बात को ध्यान मे रखकर जिला प्रशासन ने जिले मे बीज व खाद की भरपूर आपूर्ति बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। 6 अक्टूबर से चना बीज व 10 अक्टूबर से ऊंची किस्म के असिंचित गेहूं का वितरण भी शुरू किया जा रहा है । यह बात जिला कलेक्टर ने जिले की कृषि आदान की साप्ताहिक समीक्षा बैठक मे कही।
बैठक मे कृषि उपसंचालक आईपी पटेल ने बताया कि इस साल सागर जिले मे सितंबर माह के अंत तक 11 सौ मिमी से ज्यादा वर्षा दर्ज हुई है। जो जिले के सामान्य वर्षा 1230.50 मिमी से महज 89.60 मिमी ही कम है। इसी के चलते जिले मे रबी की फसल के लिए 4 लाख 79 हजार 700 हैक्टेयर क्षेत्र मे बुवाई का कार्यक्रम बनाया गया है। जो पिछले साल मुकाबले 92 हजार 800 हैक्टयर अधिक है।
इस बढ़े हुए बुवाई क्षेत्र को ध्यान मे रखकर जिले मे 27 हजार क्विंटल बीज वितरण का कार्यक्रम बनाया गया है। जो बीते साल की पूर्ति 10 हजार 899 क्विंटल से 17 हजार 101 क्विंटल अधिक है। इस साल बीज की अनुमानित मांग की पूर्ति के लिए बीज सेवा सहकारी समितियों एवं डबललॉक केन्द्रों मे भंडारण कराया जा रहा है।
खाद वितरण के बारे मे श्री पटेल ने बताया कि इस रबी सीजन के लिए 44 हजार 275 मीट्रिक टन खाद का कार्यक्रम बनाया गया है। वर्तमान मे जिले मे विभिन्न स्रोतों से 29 हजार टन उर्वरका उपलब्ध है। जिसमे से 7हजार मीट्रिक टन उर्वरक का उठाव अभी तक हुआ है। इसके अलावा विपणन संघ के डबललॉक केन्द्रों पर भी पर्याप्त मात्रा मे उर्वरक उपलब्ध है।
आने वाले समय मे उर्वरक की मांग बढ़ने के हालात मे आपूर्ति के कार्यक्रम के सिलसिले मे उपसंचालक श्री पटेल ने बताया कि ऐसे हालात मे मार्कफेड द्वारा उर्वरक की आपूर्ति कराया जाना सुनिश्चित किया गया है। इसी सिलसिले मे बैठक मे 203 क्विंटल बीजोपचार औषधि वितरण के कार्यक्रम के बारे मे भी बताया गया । इसके मुताबिक औषधि का भंडारण डबललॉक केन्द्र एवं समितियों मे कराया जाएगा। इसके अलावा 2 लाख 10 हजार कल्चर के पैकिट वितरण कार्यक्रम भी बनाया गया है। किसानों की सुविधा को ध्यान मे रखते हुए 1 लाख 42 हजार 600 पैकेट कल्चर का भंडारण डबललॉक केन्द्र, समितियों एवं विकासखण्ड स्तर पर कराया गया है। इसके साथ सूक्ष्म पोषक जिंक, जिप्सम का भी भण्डारण डबललॉक केन्द्रों मे कराया गया है।

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